बिजनेस स्टैंडर्ड - माइंडट्री के नतीजे से एलऐंडटी को लाभ के नहीं संकेत
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माइंडट्री के नतीजे से एलऐंडटी को लाभ के नहीं संकेत

श्रीपाद एस ऑटे /  May 05, 2019

माइंडट्री में प्रवर्तकों की 20 प्रतिशत हिस्सेदारी खरीदने के बाद इंजीनियरिंग एवं ढाचागत क्षेत्र की दिग्गज कंपनी लार्सन ऐंड टुब्रो (एलऐंडटी) ने इस सूचना-प्रौद्योगिकी (आईटी) कंपनी खरीदने की दिशा में पहला बड़ा कदम उठाया है। हालांकि इससे मंगलवार को माइंडट्री के शेयर में बहुत अधिक प्रतिक्रिया नहीं दिखी, वहीं दूसरी तरफ एलऐंडटी का शेयर गिरावट के साथ बंद हुआ। माइंडट्री के चौथी तिमाही के नतीजों से यह सवाल उठता है कि निकट अवधि में एलऐंडटी के लिए यह अधिग्रहण कितना कारगर साबित होगा। कुछ परिचालन मानदंडों पर विचार करें तो मध्यम अवधि में माइंडट्री के कारोबार पर दबाव दिखा रहा है। 

 
प्रभुदास लीलाधर में विश्लेषक अनिकेत पांडेय कहते हैं, 'कम सौदे और अधिक संख्या में कर्मचारियों का नौकरी छोड़कर जाना माइंडट्री पर अधिग्रहण का असर बताता है। अधिग्रहण के बाद (जो अब लगभग निश्चित लग रहा है) सबकी नजरें प्रबंधन में बदलाव पर टिक गई हैं। इससे निकट से मध्यम अवधि में माइंडट्री के प्रदर्शन पर असर पड़ सकता है।' वैसे माइंडट्री के प्रबंधन ने दावा किया कि एलऐंडटी की आक्रामक बोली से नए सौदों में कमी नहीं आई है और न ही कर्मचारी इस वजह से नौकरी छोड़कर जा रहे हैं। 
 
हालांकि आंकड़े कुछ और ही कहते हैं। उदाहरण के लिए माइंडट्री को मिले कुल 24.2 करोड़ डॉलर मूल्य के सौदे चौथी तिमाही में सालाना आधार पर 19 प्रतिशत कम हो गए। पिछली छह तिमाहियों का यह सबसे कमजोर आंकड़ा रहा। पूरे वित्त वर्ष 2019 के लिए भी नए सौदों की संख्या वित्त वर्ष 2018 के 9 प्रतिशत के मुकाबले महज 6 प्रतिशत रफ्तार से बढ़ी। इससे आने वाली तिमाहियों में माइंडट्री के राजस्व पर असर पड़ सकता है। मैक्वायरी  के विश्लेषकों के अनुसार माइंडट्री को 13 से 14 प्रतिशत विकास दर हासिल करने में भी काफी परिश्रम करना होगा। माइंडट्री के लिए अनुमान बाजार की उम्मीदों से अब भी कम है, हालांकि यह इन्फोसिस के 7.5 से 9.5 प्रतिशत के मुकाबले अधिक है। फिलहाल बाजार वित्त वर्ष 2020 में राजस्व के 12.7 प्रतिशत रहने की उम्मीद कर रहा है। वित्त वर्ष 2019 में यह आंकड़ा 28.5 प्रतिशत था। 
 
हालांकि कुछ खास खंडों में ग्राहकों, खासकर ऐसे जो यूरोपीय क्षेत्र में बैंकिंग एवं वित्तीय सेवा क्षेत्रों में काम कर रहे हैं, से जुड़े मुद्दों के मद्देनजर ये अनुमान भी जोखिम से सुरक्षित नहीं हैं। इसका कुछ असर बुक-टू-बिल रेशियो (ऑर्डर पूरा करने की कंपनी की क्षमता) पर दिख रहा है, जो चौथी तिमाही में कम होकर 0.9 प्रतिशत रह गया। यह अनुपात 1 से अधिक रहता है तो इससे संकेत मिलता है कि नए सौदों की संख्या मौजूदा सौदे पूरे होने की तादाद से अधिक है और यह मांग मजबूत रहने का संकेत है। अनुपात 1 से कम रहना कमजोर मांग का संकेत है। 
 
सौदों का विश्लेषण करें तो अधिक मार्जिन देने वाले डिजिटल खंड से आने वाले सौदों में चौथी तिमाही में 7 प्रतिशत कमी आई और मूल्य के लिहाज से ऐसे सौदे चार तिमाहियों में सबसे कम रहे। यह लगातार दूसरी तिमाही रही जब डिजिटल खंड के सौदों में कमी आई। ये सौदे मार्जिन के लिहाज से फायदेमंद रहते हैं और इनसे प्राप्तियों में अधिक समय (6 से 8 महीने) नहीं लगता है। अगर डिजिटल खंड से अर्जित सौदे कम रहे तो इससे माइंडट्री के मुनाफे पर असर पड़ सकता है। चौथी तिमाही में कर्मचारियों के नौकरी छोडऩे की दर सबसे अधिक रही, जिससे माइंडट्री के लिए कर्मचारियों पर आने वाली लागत अधिक रह सकती है। इससे राजस्व भी प्रभावित होगा। ग्राहकों के साथ बेहतर तालमेल के लिए कर्मचारियों के नौकरी छोड़कर जाने की रफ्तार पर अंकुश लगाना होगा।
 
इन चुनौतियों के मद्देनजर यह देखने वाली बात होगी कि कर एवं ब्याज पूर्व आय में 100 से 120 आधार अंक के सुधार का प्रबंधन का अनुमान वित्त वर्ष 2020 में पूरा होता है या नहीं।  कैंपस हायरिंग में तेजी और डिजिटल खंड में कीमत बढ़ाने की क्षमता से मार्जिन को मजबूती मिल सकती है। एचडीएफसी सिक्योरिटीज के विश्लेषकों का मानना है कि कर्मचारियों की उपयोगिता से जुड़ी चुनौतियों, वेतन बढ़ोतरी और अन्य कुछ अन्य कारणों से मार्जिन में 80 आधार अंक से अधिक वृद्धि हो सकती है। निवेशकों के लिए वित्त वर्ष 2020 की अनुमानित आय के 19 गुना से अधिक मौजूदा मूल्याकन के मद्देनजर माइंडट्री को मिल रही तवज्जो उद्योग जगत के अनुरूप है। कंपनी ने पिछले सप्ताह पूंजी आवंटन नीति की घोषणा की है, जिससे निकट अवधि में शेयर को कुछ मदद मिल सकती है। हालांकि इस नीति के तहत नकदी काफी मात्रा में निकली है। कंपनी ने 27 रुपये प्रति शेयर की दर से लाभांश की घोषणा की है, जो कुल 533 करोड़ रुपये होता है।  
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