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आईटी शेयरों के लिए अपना रुतबा बरकरार रखना नहीं आसान

श्रीपाद एस ऑटे और रोमिता मजूमदार /  May 05, 2019

सूचना-प्रौद्योगिकी (आईटी) क्षेत्र की कंपनी कॉग्निजेंट ने गुरुवार को कैलेंडर वर्ष 2019 के लिए राजस्व और मुनाफे का अनुमान घटा दिया। इससे आईटी क्षेत्र में चल रही उठापटक एक आर फिर सामने आ गई। कुछ बड़ी भारतीय कंपनियों ने भी वित्त वर्ष 2020 के लिए राजस्व अनुमान में कटौती की है। इससे संकेत मिल रहा है कि ज्यादातर आईटी कंपनियों का वित्तीय प्रदर्शन आने वाली तिमाहियों में कमजोर रह सकता है। इसके उलट एसऐंडपी बीएसई आईटी सूचकांक का प्राइस-टू-अर्निंग्स (पी/ई) मूल्यांकन 21 गुना स्तर पर पांच वर्षों के औसत से 9 प्रतिशत अधिक है। इस लिहाज से मूल्यांकन में बढ़त बरकरार रखना आईटी कंपनियों के लिए मुश्किल हो सकता है। एचडीएफसी सिक्योरिटीज के विश्लेषक अमित चंद्रा कहते हैं, 'जो कंपनियां डिजिटल खंड में विकास दर बरकरार रखेंगी और लागत का दबाव झेलने के बाद भी मुनाफा अर्जित करती हैं, उन्हें बेहतर मूल्यांकन मिलता है।' 2016 में खस्ता प्रदर्शन के बाद मोटे तौर पर पूरे आईटी क्षेत्र का प्रदर्शन अच्छा रहा था। कैलेंडर वर्ष 2016 में 8 प्रतिशत नुकसान झेलने के बाद बीएसई आईटी इंडेक्स दिसंबर 2018 तक दो वर्षों की अवधि में 18 प्रतिशत चक्रवृद्धि दर से बढ़ा है। 2016 में गिरावट के बाद सस्ता मूल्यांकन, वित्तीय प्रदर्शन में सुधार और कुछ दूसरे क्षेत्रों के कमजोर प्रदर्शन से आईटी शेयरों के प्रति उत्साह में सुधार हुआ है। हालांकि वृहद आर्थिक स्तर पर मुश्किलों के मद्देनजर पिछली दो तिमाहियों से परिस्थितियां फिर प्रतिकूल लग रही हैं। उदाहरण के लिए मार्च 2019 तिमाही के लिए घोषित कुछ आईटी कंपनियों के नतीजों से आपूर्ति संबंधी चुनौतियों का संकेत मिल रहा है। 

 
कर्मचारियों के मद में होने वाला खर्च खासा मायने रखता है और इस क्षेत्र के कुल राजस्व में इसकी हिस्सेदारी 50 प्रतिशत होती है। ऐसे में कर्मचारियों पर थोड़ा भी खर्च बढऩे से आईटी कंपनियों के मुनाफे या कर एवं ब्याज पूर्र्व आय (एबिटा) पर असर पड़ सकता है। आईटी कंपनियों ने चौथी तिमाही के  अपने नतीजों में वेतन दर एवं सब-कॉन्ट्रैक्टिंग चार्ज का जिक्र किया है, जो प्रतिभाओं की कमी का संकेत देता है। चौथी तिमाहियों में जिन बड़ी कंपनियों ने अपने नतीजे घोषित किए हैं, उनके एबिटा मार्जिन में 50 से 100 आधार अंक तक की कमी आई है। उदाहरण के लिए इन्फोसिस के एबिटा मार्जिन में क्रमागत आधार पर 113 अंक की कमी आई है। वित्त वर्ष 2020 के लिए भी इन्फोसिस ने मुनाफे का अनुमान 100 आधार अंक घटाकर 21-23 प्रतिशत कर दिया है। 
 
शेयरखान में शोध प्रमुख संजीव होता कहते हैं,'अगर कंपनियां मार्जिन के मोर्चे बाजार की सामान्य उम्मीदों पर खरी नहीं उतरीं तो उनका मूल्यांकन प्रभावित हो सकता है।' हालांकि कंपनियां मार्जिन बरकरार रखने के लिए लागत नियंत्रित करने और अधिक लाभकारी विदेशी सौदों और डिजिटल कारोबारों पर जोर दे रही हैं, लेकिन मांग की स्थिति देखते हुए इनके प्रदर्शन पर सबकी नजरें रहेंगी। मुनाफे के अलावा राजस्व में कमजोर वृद्धि आईटी कंपनियों के लिए एक और चिंता बढ़ाने वाली बात हो सकती है। वैसे कई कंपनियां को लगता है कि मांग बरकरार है, लेकिन उन्होंने स्वास्थ्य क्षेत्र एवं यूरोप में कारोबार कमजोर रहने के संकेत दिए हैं। 
 
वित्तीय एवं बैंकिंग क्षेत्रों में कमजोरी की कॉग्निजेंट की चिंता ने वृद्धि दर को लेकर आशंका और बढ़ा दी है। चंद्रा कहते हैं, 'वित्तीय एवं बैंकिंग और बीमा क्षेत्रों में स्थितियां बिगड़ीं तो आईटी कंपनियों का मूल्यांकन और कमजोर रह सकता है।' इसके अलावा अच्छे सौदे नहीं मिलने से भी आंकड़ों पर असर पड़ सकता है। कई मझोली और छोटी कंपनियों ने नए सौदे मिलने में कमी या इसकी रफ्तार धीमी होने की बात कही हैं। शीर्ष कंपनियों टाटा कंसल्टैंसी सर्विसेस (टीसीएस) और इन्फोसिस ने कुछ नए अच्छे सौदे मिलने की बात कही है, जो निश्चित तौर पर राहत है। नारनोलिया फाइनैंशियल एडवाइजर्स में शोध प्रमुख विनीता शर्मा कहती हैं, 'नए सौदे या ग्राहकों से मिले ऑर्डर का आकार निवेशकों के लिए कंपनियों का रुझान भांपने का अहम मानदंड होता है। अधिक बाजार हिस्सेदारी और डिजिटल सौदों में मजबूत वृद्धि हासिल करने वालीं कंपनियों का प्रदर्शन बेहतर रहना चाहिए।' शर्मा का मानना है कि मौजूदा स्तर से कंपनियों के मूल्यांकन में बढ़ोतरी की थोड़ी ही गुंजाइश है। वास्तव में कुछ कंपनियों में ग्राहकों से जुड़ी समस्याएं मुश्किलें और बढ़ा रही हैं और इनका कुछ असर मूल्यांकन पर दिखा है। कुल मिलाकर विशेषज्ञ निवेशकों को आईटी शेयरों पर दांव लगाते वक्त सतर्क रहने की सलाह देते हैं। उनकी नजर में बड़े शयरों में टीसीएस सवार्धिक पसंदीदा शेयर है, वहीं मझोले एवं छोटे शेयरों में जेनसार, मैजेस्को और एलऐंडटी इन्फोटेक प्रमुख हैं।
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