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राजनीतिक दलों का आखिरी दो चरणों की तैयारी पर जोर

निवेदिता मुखर्जी /  05 05, 2019

लोकसभा चुनावों के पांचवें चरण के लिए छह मई को मतदान होगा और इसके लिए प्रचार अभियान शनिवार को थम गया। इसके साथ ही राजनीतिक दलों ने अब 12 मई को होने वाले अगले दौर के चुनावों की तैयारी शुरू कर दी है। सोमवार को पश्चिम बंगाल की सात संसदीय सीटों पर चुनाव हो रहे हैं। इनमें बैरकपुर और हावड़ा से लेकर हुगली और आरामबाग शामिल हैं। इन सीटों पर प्रचार अभियान की समयसीमा समाप्त होने से पहले राजनीतिक दलों ने अंतिम क्षणों में सघन प्रचार किया लेकिन कोलकाता में विभिन्न दलों के दफ्तरों में चर्चा छठे और सातवें चरण के चुनावों के स्टार प्रचारकों के इर्दगिर्द रही।

सिंगूर के एक मोटल में स्थानीय लोग अब भी पिछले दशक की घटनाओं से उबर नहीं पाए हैं। सिंगूर तब सुर्खियों में आया था जब टाटा समूह ने यहां अपनी महत्त्वाकांक्षी नैनो कार का कारखाना स्थापित करने का फैसला किया था और फिर 997 एकड़ जमीन के अधिग्रहण को लेकर हुए राजनीतिक विरोध प्रदर्शनों के कारण उसे अक्टूबर 2008 में छोड़कर जाना पड़ा था। स्थानीय लोग इसके लिए पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस की संस्थापक ममता बनर्जी को ही जिम्मेदार मानते हैं लेकिन इसके बावजूद इस बात से इनकार नहीं करते हैं कि वे अब भी यहां बहुत लोकप्रिय हैं। धर्म और संस्कृति की अच्छी जानकारी रखने वाले 60 साल के भैरव नाथ चक्रवर्ती का कहना है कि भाजपा का पश्चिम बंगाल में 23 सीट जीतने का दावा बढ़ाचढ़ाकर पेश किया गया है। वह कहते हैं, 'यह दीदी की बहुत बड़ी गलती थी लेकिन भाजपा राज्य में सात-आठ से ज्यादा सीट नहीं जीत पाएगी।' टाटा की परियोजना के लिए जमीन के अधिग्रहण का विरोध कर रहे किसानों को विपक्ष की नेता ममता बनर्जी के समर्थन के बाद कंपनी सिंगूर छोड़कर गुजरात के साणंद चली गई थी। 

हुगली से भाजपा की उम्मीदवार लॉकेट चटर्जी नियमित रूप से सिंगूर आती रही हैं और उन्होंने यहां चीजों को बदलने का वादा किया है। तृणमूल कांग्रेस की रत्ना डी नाग ने भी आक्रामक प्रचार किया है लेकिन उन्होंने शायद ही कभी टाटा का जिक्र किया। पार्टी के सूत्रों का कहना है कि भूमि अधिग्रहण पर उच्चतम न्यायालय का फैसला ममता बनर्जी के रुख से अलग नहीं है।

दीदी फिर सड़क पर

सिंगूर से दूर ममता ने शनिवार को चक्रवाती तूफान फनी के बांग्लादेश की ओर जाने के बाद प्रचार अभियान बहाल कर दिया। फनी के कारण उन्होंने 48 घंटे तक प्रचार अभियान रोक दिया था और वह खडगपुर से स्थिति पर नजर रख रही थीं। उन्होंने घाटल और मेदनीपुर संसदीय क्षेत्रों में पदयात्राएं और जनसभाएं की। ये दोनों स्थान कोलकाता से 100 किमी दूर हैं। पार्टी के दूसरे नेताओं ने भी प्रचार के बचे खुचे समय का भरपूर फायदा उठाया। तृणमूल के लिए ममता ही पार्टी का चेहरा हैं, ठीक वैसे ही जैसे भाजपा के लिए प्रधानमंत्री मोदी चेहरा हैं। यानी तृणमूल के लिए ममता ही वोट खींचने वाली नेता हैं। फिल्मी कलाकार और यशवंत सिन्हा जैसे दिग्गज नेता भी पार्टी के प्रचार में जुटे हैं। लेकिन दूसरे दलों में मामला अलग है।

मोदी और शाह का जादू

कॉलेज स्क्वायर स्थित भाजपा कार्यालय में शनिवार शाम को मोदी की अगले सप्ताह झारग्राम और कांथी में होने वाली जनसभाओं की तैयारी की योजना बनाई जा रही थी। कांथी कोलकाता से करीब तीन घंटे की दूरी पर है। प्रधानमंत्री की एक रैली पुरुलिया में भी है जो कोलकाता से सड़क मार्ग से छह घंटे की दूरी पर है। भाजपा संगठन और प्रचार तंत्र पूरी तरह 12 मई को होने वाले चुनावों की तैयारियों में जुट गया है। भाजपा अध्यक्ष अमित शाह का भी फिर से पश्चिम बंगाल आने का कार्यक्रम है। पार्टी को इस बार पश्चिम बंगाल में सबसे ज्यादा फायदा होने की उम्मीद है। 2014 के आम चुनावों में भाजपा को दो सीटें मिली थीं जबकि तृणमूल ने 34, कांग्रेस ने चार और माकपा ने दो सीटें जीती थीं। 

पश्चिम बंगाल में भाजपा के पास कोई लोकप्रिय चेहरा नहीं है। यही वजह है कि मोदी और शाह ही स्टार प्रचारक हैं। मोदी पहले ही राज्य में करीब 10 जनसभाएं कर चुके हैं और उन्हें अभी करीब सात रैलियां और करनी हैं। 2014 में उन्होंने राज्य में केवल चार जनसभाएं की थीं। शाह ने अभी तक आठ जनसभाएं की हैं जबकि उनको एक रोड शो के साथ पांच रैलियां और करनी हैं। विश्लेषकों का कहना है कि भाजपा उत्तर प्रदेश और हिंदी पट्टी के अन्य राज्यों में होने वाले संभावित नुकसान की भरपाई पश्चिम बंगाल से करना चाहती है। हालांकि पार्टी का दावा है कि 2014 में उसकी सीटों की संख्या बढ़ेगी। 

भाजपा का नया कार्यालय

इसे पश्चिम बंगाल की भाजपा के लिए बेहतर भविष्य का संकेत कहा जा सकता है कि उसे दक्षिण कोलकाता के हेस्टिंग्स में नया दफ्तर मिल गया है। पार्टी के एक प्रवक्ता ने कहा कि वह अपना कुछ कामकाज खासकर आईटी शाखा को जल्दी ही नए दफ्तर भेज देगी। पार्टी सूत्रों ने शनिवार शाम को कहा कि पश्चिम बंगाल में उसे 12 सीटें मिल सकती हैं। अमित शाह ने हाल में दावा किया था कि पार्टी राज्य में 23 सीट जीतेगी। 

राहुल से आएगा आकर्षण

अगर भाजपा की मशीनरी अगले दौर के चुनाव के लिए अपने राष्ट्रीय नेताओं और स्टार प्रचारकों का कार्यक्रम बनाने में व्यस्त है तो कांग्रेस भी इस काम में जुटी हुई है। कोलकाता के लाल मोहन भट्टाचार्य रोड स्थित पार्टी के दफ्तर में पदाधिकारी कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के अगले सप्ताह होने वाले दौरे की तैयारियों में जुटे हैं। राहुल ने इससे पहले माल्दा और रायगंज में प्रचार किया था और वह 7 मई को पुरुलिया आ रहे हैं। पार्टी रोड शो के लिए प्रियंका गांधी वाड्रा को पश्चिम बंगाल लाना चाहती है लेकिन अभी इसकी कोई पुष्टि नहीं हुई है। 

कांग्रेस के नेता राज्य में पार्टी की संभावनाओं को लेकर व्यावहारिक रुख रखते हैं। एक सूत्र ने कहा, 'पश्चिम बंगाल में पार्टी की स्थिति बहुत अच्छी नहीं है इसलिए अपने संसाधनों को झोंकने का कोई फायदा नहीं है।' पार्टी के जानकारों का कहना है कि राज्य में तृणमूल कम से कम 26 से 28 सीटें जीतेगी जबकि भाजपा की सीटों की संख्या इकाई अंक में रहेगी। वे स्वीकार करते हैं कि कांग्रेस और माकपा की सीटें छह से अधिक नहीं होंगी। उनका कहना है कि कांग्रेस धर्मनिरपेक्ष पार्टी है और पश्चिम बंगाल में ध्रुवीकरण की राजनीति हो रही है।

वामपंथी दृष्टिकोण

33 साल तक पश्चिम बंगाल में सत्ता में रही माकपा के कार्यालय में पदाधिकारी कुछ भी कहने को तैयार नहीं हैं। अलीमुद्दीन स्ट्रीट स्थित पार्टी कार्यालय में पूर्व मुख्यमंत्री ज्योति बसु की तस्वीरें और लाल सलाम के पोस्टर लगे हैं। चुनाव के इस मौसम में भी वहां शांति छाई हुई है और कॉमरेड संवेदनशील बूथों की सूची बनाने में जुटे हैं। उन्होंने मीडिया के किसी भी सवाल का जवाब देने से इनकार कर दिया। लेकिन रायगंज से सांसद मोहम्मद सलीम कहते हैं, 'मैं आंकड़ों में विश्वास नहीं करता हूं।' लेकिन उनका कहना है कि तृणमूल का सभी 42 सीटें जीतने का दावा पार्टी का अहंकार दिखाता है। 
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