बिजनेस स्टैंडर्ड - मोदी से जूझने का माद्दा रखती हैं ममता बनर्जी
 Search  BS Hindi  Web   BS E-Paper|      Follow us on 
Business Standard
Friday, May 24, 2019 04:58 PM     English | हिंदी

होम

|

बाजार

|

कंपनियां

|

अर्थव्यवस्था

|

मुद्रा

|

विश्लेषण

|

निवेश

|

जिंस

|

क्षेत्रीय

|

विशेष

|

विविध

|

अर्थनामा

 
होम विशेष खबर

मोदी से जूझने का माद्दा रखती हैं ममता बनर्जी

राष्ट्र की बात
शेखर गुप्ता /  May 05, 2019

आप अपना रूपक चुन सकते हैं: लोहा ही लोहे को काटता है या हीरा हीरे को काटता है। आप चाहें तो यह भी कह सकते हैं कि जहर ही जहर की काट है। इन सारी बातों का मतलब एक है। परंतु चूंकि हम देश के अब तक के सबसे जहरबुझे चुनाव अभियान की बात कर रहे हैं तो इनमें से अंतिम उपमा ही सही प्रतीत होती है। इस अभियान का रुख प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तय किया। उनसे यह उपलब्धि कोई नहीं छीन सकता। विरोधियों को देशद्रोही कहने, पाकिस्तान से सांठगांठ वाला बताने, परिवार जमानत पर होने जैसी बातें उन्होंने ही शुरू कीं। उनकी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इसे आगे बढ़ाया। एक ने मुस्लिम प्रवासियों को दीमक बताया तो दूसरे ने बजरंग बली बनाम अली का राग छेड़ा। देश के बड़े हिस्से में, खासकर हिंदी प्रदेशों में यह कारगर साबित हुआ है। परंतु यह वहीं काम कर रहा है जहां भाजपा की प्रमुख प्रतिद्वंद्वी कांग्रेस है। 

 
महाराष्ट्र, गुजरात, मध्य प्रदेश, बिहार, दिल्ली, हरियाणा, उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश में भाजपा की यह युक्ति काम कर रही है क्योंकि इन जगह भाजपा के सामने कांग्रेस है। जवाब में कांग्रेस कहती है कि इंदिरा गांधी ने पाकिस्तान के दो टुकड़े किए थे, ऐसे में उसकी देशभक्ति पर सवाल कैसे उठाया जा सकता है? यह भी कि जब कांग्रेस अध्यक्ष के पिता और उनकी दादी आतंकियों के हाथों मारे गए तो उस पर आतंक के खिलाफ नरमी का इल्जाम कैसे लगाया जा सकता है? परंतु यह जवाब रक्षात्मक और नरमी भरा है। जाहिर है जहर को नारियल पानी से नहीं काटा जा सकता।
 
इसे समझने के लिए पश्चिम बंगाल का उदाहरण देखना होगा। इस प्रांत में पूरे देश में सबसे अधिक मौखिक और भौतिक हिंसा से भरे चुनाव हो रहे हैं। यह वह जगह है जहां मोदी और शाह को दीदी यानी ममता बनर्जी के रूप में अपनी टक्कर का नेता मिला है। भाजपा को जवाब देते हुए वह एक भी ऐसा शब्द नहीं बोलती हैं जिससे लगे कि वह रक्षात्मक हैं। न ही वह पीडि़त नजर आती है। अपना मजाक उड़ाए जाने पर वह भी पलटकर आपका मखौल उड़ाती हैं। वह इतने भद्दे तरीके से प्रत्युत्तर देती हैं जो शायद हाल के दिनों में राज ठाकरे ही कर पा रहे हैं। 
 
मोदी-शाह की भाजपा पांच वर्ष से पश्चिम बंगाल पर हमलावर है। अगर हिंदू-मुस्लिम ध्रुवीकरण उसके लिए सत्ता की कुंजी है तो पश्चिम बंगाल इस मामले में उत्तर प्रदेश से भी अधिक संवेदनशील होना चाहिए। ऐसा इसलिए कि असम की तरह पश्चिम बंगाल में भी 30 फीसदी आबादी मुस्लिम है। असम में कांग्रेस की तरह धारणा यही है कि पश्चिम बंगाल में भी पहले वाम और फिर ममता वोट के लिए मुस्लिमों का तुष्टीकरण कर रही हैं। असम में यह तरीका कामयाब रहा। भाजपा मान रही है कि पश्चिम बंगाल में भी यह कारगर होगा। यही कारण है कि पार्टी यहां 42 में से 22 लोकसभा सीट जीतने का दावा कर रही है। उत्तर प्रदेश (80) और महाराष्ट्र (48) के बाद यह सबसे अधिक सांसदों वाला राज्य है।
 
भाजपा को लग रहा है कि 2014 में उत्तर प्रदेश और अन्य राज्यों में मिली अपार जीत में इस बार जो कमी आएगी, उसकी भरपाई वह पश्चिम बंगाल में कर लेगी। ऐसा सोचना गलत है। यह सही है कि प्रधानमंत्री की रैलियां सफल रही हैं लेकिन जनाधार की कमी के चलते पार्टी के लिए यहां चुनावी जीत हासिल करना कंचनजंघा पर विजय प्राप्त करने जैसा होगा। भाजपा की डराने-धमकाने की चाल भी ममता पर बेअसर है। इस वक्त वह संभवत: देश की सबसे सख्त राजनेता हैं। इस मामले में वह मायावती पर भी भारी हैं। उनका अतीत सड़क पर लडऩे का रहा है। राहुल और प्रियंका, कमलनाथ और अखिलेश यादव पर यह बात लागू नहीं होती। हालांकि अरविंद केजरीवाल उस श्रेणी में आते हैं। ममता ने उस राज्य में अपना अस्तित्व कायम किया जो उनके लिए वाम यातना शिविर से कम नहीं था। उन्हें प्रतिकूलता को अवसर में बदलने का हुनर आता है। वह मोदी के इस तंज में भी अवसर तलाश लेती हैं कि बंगालियों के लिए दुर्गापूजा मनाना तक कठिन हो गया है।
 
मैंने उस दिन उनकी रैलियों का अवलोकन किया जिस दिन फनी तूफान दस्तक दे रहा था और उनका हेलीकॉप्टर हिचकोले खा रहा था। भाटापार (बैरकपुर, जहां से पूर्व रेल मंत्री दिनेश त्रिवेदी चुनाव लड़ रहे हैं) और कोलकाता का बाहरी इलाका राजारहाट (जहां से काकोली घोष तीसरी बार जीत के लिए मैदान में हैं) में भी दुर्गा पूजा चुनावी मुद्दा है। मंच पर वायरलेस माइक लिए यहां-वहां टहलती हुई ममता बिना किसी की आंख में आंख डाले जिस तेजी से बोलती हैं, उसका मुकाबला गौतम गंभीर जैसे जल्दी बोलने वाले वक्ता भी नहीं कर सकते। ममता कहती हैं, 'मोदी बाबू, आपको हम बंगालियों पर चीखने चिल्लाने के पहले गृहकार्य करके आना चाहिए। ऐसा न करने वाले स्कूली बच्चों तक को उनके शिक्षक डांटते हैं। आप झूठ बोलेंगे तो लोग आपके साथ क्या करेंगे? आप बंगाल आकर लोगों से कहते हैं कि यहां दुर्गा पूजा नहीं होती? माताओं और बहनों आप मुझे बताओ, हमारे यहां दुर्गा पूजा होती है या नहीं?' भीड़ इसका जवाब हां में देती है। वह पूछती हैं कि क्या कोई दुर्गा पूजा करने से रोकता है? भीड़ नकारती है। वह लक्ष्मी पूजा, सरस्वती पूजा, क्रिसमस, रमजान और छठ पूजा के होने या न होने के बारे में सवाल करती हैं। भीड़ सारे सवालों का जवाब हां में देती है। इस पर वह कहती हैं कि यहां केवल एक काम नहीं होता- यहां मोदी नहीं होता, यहां भाजपा नहीं है, यहां झूठ नहीं है, कुत्सा (चरित्रहनन) नहीं है। ममता मोदी से कहती हैं कि वे अच्छे से तैयारी करके आएं ताकि उनका मजाक न उड़े। मोदी राहुल को शहजादा कहते हुए या राहुल मोदी को चोर कहते हुए जितना मजाक नहीं उड़ाते, उससे सौ गुना तंज भरे लहजे में वह 'मोदी बाबू' कहती हैं। वह एक सांस में उन तमाम पूजाओं के नाम लेती हैं जो बंगाल में की जाती हैं। वह मोदी पर तंज करती हैं कि क्या उन्हें सरस्वती मंत्र आता है? उसके बाद वह संस्कृत में इस मंत्र का उच्चारण करती हैं। मुस्लिमों समेत तमाम श्रोताओं का उत्साह देखते ही बनता है।
 
 इसके बाद वह खानपान का जिक्र करते हुए कहती हैं, 'मोदी बाबू, अगर हम गुजरात जाते हैं तो ढोकला खाते हैं, तमिलनाडु में इडली, केरल में उपमा, बिहार में लिट्टïी-चोखा, गुरुद्वारों में हलवा, पंजाब में लस्सी पीते हैं। आप लोगों को आदेश देते हो कि मछली-मांस और अंडा मत खाओ। गर्भवती महिलाओं को अंडा नहीं खाना चाहिए। मेरे भाई आप कौन हो यह आदेश देने वाले कि महिलाएं क्या खाएं, क्या नहीं?' वह कहती हैं कि देश को वही खाने को कहा जाता है जो मोदी खाते हैं, वह पहनने को कहा जाता है जो मोदी पहनते हैं, पूरा दिन उनको टीवी पर देखने को कहा जाता है। ममता कहती हैं, 'मैं सोचती थी कि वह निस्वार्थ आरएसएस प्रचारक हैं लेकिन खाकी निकर में परेड करने वाले आरएसएस के ये लोग अब पैंट पहनकर, ब्रीफकेस लेकर मॉल में घूमते हैं और करोड़ो कमाते हैं।' वह नोटबंदी को लेकर उन पर हमला करती हैं, लेकिन राफेल पर समय नहीं खराब करतीं। वह अंतिम प्रहार करते हुए कहती हैं, 'अभी कुछ समय पहले जो पार्टी भूखों मरती थी और दिन में तीन बार एक ही बीड़ी फूंकती थी, अब उसके पास अरबों की संपत्ति है।'
 
जनता की ओर से चौकीदार चोर है कि नारों के बीच वह कहती हैं कि इतना सब कुछ होने पर भी वे खुद को चौकीदार कहते हैं। पश्चिम बंगाल में कांग्रेस उनकी विरोधी है लेकिन उन्होंने राहुल के नारे को अपना लिया है।  सवाल यह है कि यह नारा एक राज्य की नेता के पास इतना प्रभावी क्यों लगता है जबकि कांग्रेस ने इसका अविष्कार किया और देश भर में प्रसार भी किया? ऐसा इसलिए कि शायद कांग्रेस को अभी भी मोदी और शाह की रणनीति को समझना है। अटल बिहारी वाजपेयी और आडवाणी के उलट ये दोनों जमीन पर जूझने वाले हैं और इससे पार्टी की प्रकृति बदल गई है। ऐसे लोगों से इन्हीं के तरीकों से निपटा जा सकता है। अगर मोदी और शाह ने 2019 के आम चुनाव के लिए जहरीली बातों और धु्रवीकरण को अपना ब्रह्मास्त्र बनाया है, तो ममता बनर्जी भी उनको उनकी सीमाओं का अहसास करा रही हैं कि उनके 42 सीटों वाले राज्य में यह नहीं होगा।
Keyword: parliament, election, ECI, BJP, congress, narendra modi, mamta,,
Advertisements
  Cover from Earthquake & Floods. Buy Home Insurance
   Get seamless access to Business Standard & WSJ.com starting at just Rs. 49/- per month*
Display Name  Email-Id  
Post your comment

CAPTCHA Image Reload Image Enter Code*:
  आपका मत
 क्या हिंदुजा संग जेट एयरवेज की बनेगी बात?
हां नहीं  
पढ़िये
ईमेल
About us Authors Partner with us Jobs@BS Advertise with us Terms & Conditions Contact us RSS Site Map  
Business Standard Private Ltd. Copyright & Disclaimer feedback@business-standard.com
This site is best viewed with Internet Explorer 6.0 or higher; Firefox 2.0 or higher at a minimum screen resolution of 1024x768
* Stock quotes delayed by 10 minutes or more. All information provided is on "as is" basis and for information purposes only. Kindly consult your financial advisor or stock broker to verify the accuracy and recency of all the information prior to taking any investment decision. While due diligence is done and care taken prior to uploading the stock price data, neither Business Standard Private Limited, www.business-standard.com nor any independent service provider is/are liable for any information errors, incompleteness, or delays, or for any actions taken in reliance on information contained herein.