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कॉरपोरेट एनपीएस के ढेरों लाभ, कुछ खामियां

संजय कुमार सिंह /  May 05, 2019

कई कंपनियों के कर्मचारियों को पिछले दिनों अपने दफ्तर के मानव संसाधन विभाग से चि_िïयां मिली होंगी, जिनमें राष्टï्रीय पेंशन प्रणाली (एनपीएस) का जिक्र होगा। इन चि_िïयों में कहा गया है कि कर्मचारी यदि चाहें तो एनपीएस खाता शुरू कर सकते हैं और कंपनी उनकी ओर से उसमें निवेश की रकम जमा करेगी। एनपीएस में निवेश कर्मचारी भविष्य निधि (ईपीएफ) में योगदान के अलावा होगा। यदि आप कंपनी की एनपीएस योजना चुनते हैं तो आपको अतिरिक्त कटौती की शक्ल में बहुत बड़ा फायदा हो सकता है। नियोक्ता आपकी ओर से इसमें जो भी निवेश करते हैं, उस पर आयकर अधिनियम की धारा 80सीसीडी (2) के तहत मिलने वाली कटौती का लाभ हासिल होता है। क्लियरटैक्स के संस्थापक और मुख्य कार्य अधिकारी अर्चित गुप्ता समझाते हैं, 'नियोक्ता द्वारा किए गए वास्तविक योगदान और मूल वेतन तथा महंगाई भत्ते के 10 फीसदी में से जो भी राशि कम होगी, उसे ही कर कटौती के लिए अधिकतम राशि माना जाएगा।'

 
इस धारा के तहत कटौती के लिए रुपये के लिहाज से कोई सीमा नहीं रखी गई है। एनपीएस में आपके योगदान पर धारा 80सीसीडी (1) के तहत कर में रियायत भी मिलती है। लेकिन इसमें किया गया निवेश भी धारा 80सी के तहत निर्धारित 1.50 लाख रुपये की कुल सीमा के अंतर्गत ही आता है। इसीलिए अगर आप दूसरी योजनाओं में निवेश के जरिये 1.50 लाख रुपये बचा चुके हैं तो एनपीएस आपके लिए बहुत काम की नहीं रह जाती है। हालांकि इसमें आपको आयकर अधिनियम की धारा 80सीसीडी (1बी) के तहत एक और लाभ भी मिलता है। इसके तहत एनपीएस में आपके कुल योगदान पर 50,000 रुपये तक की कटौती का फायदा मिल जाता है।
 
कंपनी की एनपीएस योजना से जुडऩा उन लोगों के लिए ज्यादा ठीक है, जिनके पास जरूरत से अधिक पैसा उपलब्ध है। सेबी में पंजीकृत निवेश सलाहकार और पर्सनल फाइनैंस प्लान डॉट इन के संस्थापक दीपेश राघव ने कहा, 'जो व्यक्ति सबसे ऊंचे कर दायरे में आता है, वह यह विकल्प अपनाकर अच्छी खासी रकम बचा सकता है।' एनपीएस से कुछ और फायदे भी होते हैं। टाटा कैपिटल फाइनैंशियल सर्विसेज के प्रमुख (संपत्ति प्रबंधन) सौरभ बसु बताते हैं, 'एनपीएस खाते में संपत्ति सेवानिवृत्ति तक जुड़ती है, इसलिए चक्रवृद्घि दर से ब्याज मिलने का बड़ा फायदा होता है। इसमें खोले गए खाते के रखरखाव और राशि के प्रबंधन के लिए शुल्क बहुत कम रहता है, इसलिए लंबी अवधि में बड़ी धनराशि इक_ïी करने में मदद मिलती है।'
 
हालांकि अगर आपको यह योजना पसंद आ रही है तो निवेश करने से पहले आपको एक बात समझ लेनी चाहिए। इसमें पैसा लगाने पर आपके हाथ में आने वाला वेतन कम हो जाएगा। इसलिए इस योजना में रकम लगाना तभी शुरू करें, जब आपको लगे कि इससे नकदी की किल्लत नहीं होगी। इसके अलावा एनपीएस सेवानिवृत्ति के लिए कोष तैयार करने में मदद करती है। इसलिए रिटायर होने से पहले आप इसमें से आसानी से रकम नहीं निकाल पाएंगे। यह बात भी ध्यान में रखें और योजना को तभी अपनाएं, जब आपको यकीन हो कि इस पैसे की जरूरत 60 साल की उम्र से पहले नहीं पड़ेगी। बसु स्पष्टï करते हैं, 'हालांकि समय से पहले निकासी संभव है, लेकिन 80 फीसदी राशि को एन्यूइटी में लगाना अनिवार्य है और केवल 20 फीसदी राशि एकमुश्त दी जाती है।'
 
एनपीएस से आंशिक निकासी के नियम भी बहुत अधिक सख्त हैं। राघव बताते हैं, 'अगर कुछ रकम निकालनी है तो उसकी मंजूरी भी एनपीएस में निवेश आरंभ करने के 10 साल बाद ही दी जाती है और कर्मचारी के योगदान में से केवल 25 फीसदी रकम की निकासी ही करने दी जाती है। नियोक्ता एनपीएस में जो योगदान करता है उसे नहीं छूने दिया जाता और न ही निवेश पर मिले प्रतिफल को निकालने की इजाजत दी जाती है।' आंशिक निकासी की मंजूरी भी कुछ खास उद्देश्य से ही दी जाती है। इनमें गंभीर बीमारी, संतान की शिक्षा या शादी और घर खरीद आदि शामिल हैं। खरीद आदि में ही दी जाती है। कॉरपोरेट एनपीएस में निवेश से दूसरी योजनाओं में हो रहे आपके निवेश में किसी तरह की कटौती नहीं आनी चाहिए। बहुत से कर्मचारी इस असमंजस में फंस जाते हैं कि कॉरपोरेट एनपीएस से जुड़ा उनके लिए अच्छा रहेगा या स्वैच्छिक भविष्य निधि (वीपीएफ) के जरिये ईपीएफ में योगदान बढ़ाना बेहतर होगा। सार्वजनिक भïिवष्य निधि (पीपीएफ) भी निवेश के लिहाज से एक और लोकप्रिय विकल्प है। लेकिन उस विकल्प को चुनने से पहले अपने संपत्ति आवंटन पर नजर जरूर डाल लें।
 
एनपीएस हाइब्रिड योजना है, जिसमें इक्विटी में अधिकतम 75 फीसदी निवेश किया जा सकता है। इससे आपके पोर्टफोलियो में इक्विटी आवंटन बढ़ता है। इसके लंबी अवधि में ऊंचा प्रतिफल देने के आसार होते हैं। ईपीएफ/वीपीएफ और पीपीएफ मुख्य रूप से डेट योजनाएं हैं। पहले अपने संपत्ति आवंटन को जांचें और यह देखें कि क्या आपके पोर्टफोलियो को अतिरिक्त इक्विटी या डेट की खुराक की जरूरत है। एनपीएस से आपको अतिरिक्त कर लाभ मिलेंगे, लेकिन आपको यह भी ध्यान रखना चाहिए कि इसमें निकासी बहुत मुश्किल है। 
 
ईपीएफ/वीपीएफ और पीपीएफ आकर्षक डेट योजनाएं हैं, जिनमें क्रमश: 8.65 फीसदी और 8 फीसदी प्रतिफल मिलता है। दोनों में ईईई (छूट-छूट-छूट) कर लाभ मिलता है। आपको पूरी राशि परिपक्वता पर मिल जाती है और एन्यूइटी खरीदने की कोई बाध्यता नहीं है। एनपीएस में धनराशि का 60 फीसदी हिस्सा आपको एकमुश्त मिलता है और इस पर कोई कर नहीं लगता है। आपको शेष 40 फीसदी राशि से एक एन्यूइटी खरीदनी होगी। एन्यूइटी से आमदनी को आपकी आय में जोड़ा जाता है और इस पर कर लगता है। जिन लोगों के पास निजी एनपीएस खाता है, वे उसे एक फॉर्म भरकर कॉरपोरेट एनपीएस में पोर्ट कर सकते हैं। 
Keyword: NPS, pension, income tax,,
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