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पद छोड़ रहे कंपनियों के स्वतंत्र निदेशक

ऐश्ली कुटिन्हो / मुंबई May 03, 2019

नियामकीय बदलाव के बीच भारतीय कंपनी जगत इस वित्त वर्ष में स्वतंत्र निदेशकों के इस्तीफे से दो चार हो सकते हैं। पिछले साल 1,000 से ज्यादा स्वतंत्र निदेशकों ने अपना पद छोड़ा, जिसकी वजह कंपनियों में बड़ी धोखाधड़ी, खाता-बही में अनियमितता और वैश्विक भ्रष्टाचार निरोधक कानून का लागू होना है। पिछले दो महीने में करीब 400 स्वतंत्र निदेशकों ने अपना पद छोड़ा है जबकि 200 ऐसे निदेशकों की नियुक्ति हुई। ये चीजें मांग-आपूर्ति के बीच बढ़ती खाई का संकेत दे रहे हैं, जो आगामी महीनों में नजर आएगा।
 
करीब 1,500 स्वतंत्र निदेशकों ने 2014-15 में पांच साल के कार्यकाल पर हस्ताक्षर किए थे, जिसका इस साल नवीनीकरण होना है। विशेष प्रस्ताव के जरिए मंजूरी के बाद स्वतंत्र निदेशकों को दूसरा कार्यकाल मिल सकता है। इनगवर्न रिसर्च सर्विसेज के संस्थापक व प्रबंध निदेशक श्रीराम सुब्रमण्यन ने कहा, इनमें से कई स्वतंत्र निदेशक अपने कार्यकाल का विस्तार नहीं करने का विकल्प चुन सकते हैं क्योंकि जवाबदेही बढ़ी है। 1 अप्रैल 2014 से प्रभावी कंपनी अधिनियम 2013 में स्वतंत्र निदेशकों के लिए अलग संहिता बनाई गई है। कोटक समिति की सिफारिशों के आधार पर सूचीबद्धता के नियम में हुए हालिया बदलाव ने भी कंपनी प्रशासन की अनिवार्यताओं में इजाफा किया है।
 
धोखाधड़ी का पता लगाने में स्वतंत्र निदेशकों की भूमिका भी नियामकों की जांच के दायरे में आ गई है क्योंकि अंकेक्षकोंं के साथ वे पहली पंक्ति के स्वतंत्र अधिकारी हैं जिनकी जिम्मेदारी गड़बड़ी के शुरुआती दिनों में सवाल उठाने का है। स्वतंत्र निदेशकों के पास कानूनी व नियामकीय जवाबदेही है और वह बड़े मामलों पर ऊंगली उठा सकते हैं और अपना असंतोष दर्ज कर सकते हैं। केपीएमजी इंडिया के पार्टनर साईं वेंकटेश्वरन ने कहा, अब स्वतंत्र निदेशकों की भूमिका की सराहना हो रही है, लेकिन यह उनके ऊपर बड़ी जवाबदेही भी डालता है, जिसे अगर सही तरीके से पूरा नहीं किया गया तो उनके लिए बड़ा जोखिम पैदा हो सकता है।
 
कंपनी अधिनियम के तहत निदेशक क्लास एक्शन सूट का सामना कर सकते हैं और आईपीसी की धारा 403 व धारा 405 के तहत भी इन्हें परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। ऐसा परिदृश्य भी हो सकता है जहां इरादतन चूक करने वालों के निदेशक मंडल में शामिल स्वतंत्र निदेशक ने अगर अपना असंतोष जाहिर नहीं किया हो या कदम उठाने में नाकाम रहे हों तो उन्हें भी निदेशक के तौर पर डिफॉल्टर का तमगा मिल सकता है। इससे वह किसी भी वित्तीय इंटरमीडियरी में कोई बड़ा पद संभावने या किसी वित्तीय नियामकीय गतिविधियों को अंजाम देने में अनुपयुक्त घोषित हो सकते हैं। विनोद कोठारी ऐंड कंपनी के प्रबंध निदेशक विनोद कोठारी ने कहा, स्वतंत्र निदेशक अपनी जिम्मेदारी, कर्तव्य आदि को लेकर ज्यादा सतर्क हो गए हैं। अंकेक्षण समिति में हम और निगरानी व सतर्कता देखते हैं, खास तौर से संबंधित पक्षकारों के लेनदेन पर। हालांकि सकारात्मक बदलाव हुए हैं, लेकिन अभी इसे लंबा रास्ता तय करना है।
Keyword: company, CEO, director,,
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