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रिलायंस कैपिटल में ईपीएफओ के 2,500 करोड़ रुपये फंसे

जश कृपलानी और देव चटर्जी / मुंबई May 03, 2019

कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) का रिलायंस कैपिटल में 2,500 करोड़ रुपये निवेश है, जो नकदी की समस्या का सामना कर रही है। 18 मार्च 2019 को इस कंपनी का नकद व बैंक शेष घटकर 11 करोड़ रुपये रह गया है। वैश्विक ब्रोकरेज फर्म मॉर्गन स्टैनली के मुताबिक, ईपीएफओ के अलावा भारतीय जीवन बीमा निगम ने रिलायंस कैपिटल व इसकी सहायक रिलायंस होम फाइनैंस को 4,700 करोड़ रुपये निवेश किए हैं। विभिन्न लेनदारों की उधारी से जुड़ी रिपोर्ट में मॉर्गन स्टैनली ने कहा है कि आरकैप की इकाइयों को दी गई रकम पर लेनदारों को कटौती करनी पड़ सकती है।  मॉर्गन स्टैनली ने 29 अप्रैल की रिपोर्ट में कहा है, हमने सितंबर 2018 तक लेनदारों के पास गैर-परिवर्तनीय ऋणपत्र के आंकड़ों की तुलना की है। मौजूदा निवेश हालांकि अलग हो सकता है, लेकिन यह दस्तावेज संभावित नामों व अनुमानित निवेश के बारे में जानकारी तो देता ही है।
 
रिपोर्ट में कहा गया है कि येस बैंक ने आरसीएफएल को 1,360 करोड़ रुपये का निवेश किया हंै जबकि रिलायंस होम फाइनैंस में उसका 990 करोड़ रुपये लगा हुआ है। बैंक ने आरकैप में 990 करोड़ रुपये निवेश किए हैं, इस तरह से इसका कुल निवेश 3,340 करोड़ रुपये है। नाबार्ड ने भी आरसीएफएल में 2,800 करोड़ रुपये निवेश किए हैं जबकि रिलायंस होम फाइनैंस में 100 करोड़ रुपये। नाबार्ड के एक अधिकारी ने आरकैप को दी गई गई रकम की जानकारी दी, वहीं येस बैंक के प्रवक्ता ने किसी खास क्लाइंट के मामले पर टिप्पणी करने से मना कर दिया। मॉर्गन स्टैनली के मुताबिक, इन तीनों कंपनियों पर कुल बकाया सितंबर 2018 के आखिर में 52,490 करोड़ रुपये था।  
 
26 अप्रैल को केयर रेटिंग्स ने आरकैप की सहायक कंपनियों रिलायंस कॉमर्शियल फाइनैंस और रिलायंस होम फाइनैंस की रेटिंग घटाकर डी कर दी थी, जो संभावित डिफॉल्ट के बारे में बताता है। यह कदम एनसीडी के भुगतान की समय सीमा में बदलाव और बैंक कर्ज के भुगतान में देरी के चलते उठाए गए। रेटिंग एजेंसी ने यह भी कहा है कि मूल कंपनी रिलायंस कैपिटल के प्रोफाइल में बदलाव को देखते हुए वह इसकी सहायक को पर्याप्त सहारा देने की स्थिति में शायद नहीं होगी। रिलायंस कैपिटल के लंबी अवधि के कर्ज की रेटिंग अभी ए है और घटनाक्रम में हो बदलाव के चलते यह निगरानी के दायरे में है। इस बीच, आरकैप के मुख्य वित्तीय अधिकारी अमित बाफना ने बातचीत में कहा, मौजूदा लेनदेन के समय के बेमेल के चलते आरसीएफएल व रिलायंस होम फाइनैंंस के पुनर्भुगतान में देरी हुई है। इसके अलावा हम भविष्य में भुगतान पर किसी तरह का दबाव नहीं देख रहे हैं।
 
18 अप्रैल के बयान में केयर ने कहा था कि आरसीएल के पास तरल निवेश नहीं है या बिना इस्तेमाल वाली रकम नहीं है, जिससे इसकी नकदी की स्थिति और अवरोधित होगी। ऐसे में रिलायंस कैपिटल की नकदी की स्थिति समूह की परिसंपत्ति या निवेश का मुद्रीकरण तय समयसीमा में होने पर निर्भर करेगी। इसके एनसीडी व वाणिज्यिक प्रतिभूतियों का भुगतान अप्रैल, मई व जून 2019 में क्रमश: 593 करोड़ रुपये, 1,035 करोड़ रुपये और 718 करोड़ रुपये होना है।       
 
(साथ में अभिजित लेले)
Keyword: reliance, capital, EPFO,,
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