बिजनेस स?टैंडर?ड - स्वामित्व के लिए फिनोलेक्स परिवार का विवाद गहराया
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स्वामित्व के लिए फिनोलेक्स परिवार का विवाद गहराया

पवन लाल / मुंबई May 03, 2019

होल्डिंग कंपनी ऑर्बिट इलेक्ट्रिकल्स के जरिये फिनोलेक्स ग्रुप के शेयरों के स्वामित्व को लेकर जारी जंग में प्रवर्तक प्रकाश छाबडिय़ा अगली बोर्ड बैठक में अपने पहले चचेरे भाई दीपक छाबडिय़ा को हटाने की संभावना तलाश रहे हैं। सूत्रों ने यह जानकारी दी और कहा कि अगली बोर्ड बैठक तीन महीने के भीतर होने वाली है। दीपक छाबडिय़ा फिनोलेक्स केबल्स (एफसीएल) के प्रमुख हैं। फिनोलेक्स इंडस्ट्रीज (एफआईएल) के प्रबंध निदेशक प्रकाश छाबडिय़ा के साथ-साथ ऑर्बिट इलेक्ट्रिकल्स के बहुलांश शेयरधारक दीपक छाबडिय़ा को हटाने की कोशिश कर रहे हैं। उन पर समूह में अस्थिरता लाने और तमाम मुकदमों के जरिये ब्रांड की छवि खराब करने का आरोप लगाया गया है। फिनोलेक्स अंग्रेजी के शब्द फाइन और फ्लेग्जिबल से बना है जिसे कंपनी के उत्पादों की उत्कृष्टïता दर्शाने के लिए तैयार किया गया था। प्रवर्तकों की अगली पीढ़ी भले ही कुछ भी हो लेकिन वे एक-दूसरे के साथ फाइन और फ्लेग्जिबल हैं।
 
विवाद उस समय शुरू हो गया जब संयुक्त रूप से कंपनी स्थापित करने वाले उनके पिता ने शेयर हिस्सेदारी के लिए एक ढांचा तैयार किया। इसके तहत ऑर्बिट को एफसीएल में 31 फीसदी और एफआईएल में 19 फीसदी हिस्सेदारी दी गई थी। इसके बदले दोनों सूचीबद्ध कंपनियों की एक-दूसरे में हिस्सेदारी थी यानी एफसीएल की एफआईएल में 32 फीसदी थी जबकि एफआईएल की एफसीएल में 15 फीसदी हिस्सेदारी थी। साथ ही ऑर्बिट और एफसीएल में से प्रत्येक की ड्रिप सिंचाई कंपनी फिनोलेक्स प्लैसन में 10 फीसदी हिस्सेदारी थी। हालांकि एफआईएल की प्लैसन में 46 फीसदी हिस्सेदारी थी। प्लैसन दीपक के छोटे भाई विजय छाबडिय़ा द्वारा संचालित कंपनी है। विवाद में शामिल किसी भी प्रवर्तक ने इस मुद्दे पर पूछे गए सवालों का जवाब नहीं दिया।
 
दीपक छाबडिय़ा द्वारा किए कानूनी दावे के अनुसार, भाइयों- प्रहलाद और किशन छाबडिय़ा के बीच स्वामित्व एक अनौपचारिक समझौते पर आधारित था जिसके तहत कारोबार को एक ढांचे के तहत अलग करने का निर्णय लिया गया था। उस समय कागजी कामकाज को सुदृढ़ करने, कर मामलों को सुचारू बनाने और कंपनी में निर्णय लेने की प्रक्रिया को आसान बनाने के उद्देश्य से बहुलांश हिस्सेदारी किसी एक को दी गई थी। मोनोपोलिस ऐंड रेस्ट्रिक्टिव ट्रेड प्रैक्टिसेज (एमआरटीपी) ऐक्ट एवं अन्य कानून बनने के बावजूद कंपनी की इक्विटी ढांचे में बदलाव करने की किसी ने कोशिश नहीं की। 
 
एफसीएल के एक करीबी सूत्र ने बताया कि आमतौर पर लोग यह समझ रहे थे कि प्रहलाद छाबडिय़ा अपने मूल समझौते के अनुसार कंपनी में शेयर हिस्सेदारी का विभाजन करने जा रहे हैं। उन्होंने कहा, 'उनका इरादा परिवार का साथ रखने की थी और इसलिए वे समूह का ढांचा इस तरीके से तैयार करना चाहते थे ताकि अन्य निदेशकों एवं प्रवर्तकों की सहमति के लिए किसी एक व्यक्ति के पास कंपनी का नियंत्रण न रहे।' इसे इस तरीके से पलट दिया गया है जो पीढिय़ों से चली आ रही इस कारोबारी समूह की योजना के खिलाफ है।
 
हालांकि एफआईएल के करीबी सूत्रों ने संकेत दिया कि परिवार के संरक्षक जानते थे कि उानके बेटे और भतीजे में तकरार हो सकती है और इसलिए समूह का नियंत्रण किसी एक व्यक्ति के हाथ में न देने की संभावनाओं पर गौर किया गया। लेकिन बाद में उन्होंने अपना निर्णय बदल लिया और केवल अपने बेटे को ही अपने शेयर हस्तांतरित कर दिए। इस पर मामला कुछ समय के लिए अदालत भी पहुंचा था। बहरहाल, इस मुद्दे पर कोई विवाद नहीं है कि प्रहलाद छाबडिय़ा कानूनी तौर पर समूह के संरक्षक थे और वह निष्पक्ष थे। फिनोलेक्स के एक वरिष्ठï अधिकारी ने कहा, 'प्रहलाद और किशन में मतभेद हो सकता था लेकिन वास्तव में वे साथ बैठते थे और लगभग तीन दशक तक उन्होंने दफ्तर में साथ खाना खाया।' उन्होंने कहा कि भाइयों में भी ऐसा ही देखा गया। यहां तक कि संस्थापक ने अपने पत्र में लिखा था, 'अपने भाई के साथ उनका संबंध अभेद्य था।'
 
क्या चचेरे भाइयों ने शांति बनाने की कोशिश की। एक छाबडिय़ा ने अपनी कानूनी याचिका में कहा है कि यह कंपनी उन्हें स्वाभाविक उत्तराधिकार के तौर पर मिली है। जबकि दूसरे ने शेयर हस्तांतरण की कानूनी वैधता पर सवाल उठाया है। लेकिन मूल बात यह है कि दीपक छाबडिय़ा को जानने वालों का कहना है कि वह शांति चाहते हैं बशर्ते उन्हें अपने पिता के कारण जो भी कानूनी अधिकार हैं वे दे दिए जाएं। हालांकि उनके चचेरे भाई का कहना है कि यदि उनके चाचा के परिवार को लगता है कि उनके पास उचित हिस्सेदारी थी और उनके पास मौखिक रिकॉर्डिंग है तो वे उनके जीवनकाल में कानूनी तौर पर दावा क्यों नहीं किया।
Keyword: finolex cable, telecom, share,,
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