बिजनेस स्टैंडर्ड - एनबीएफसी के लिए सख्त होंगे नकदी नियम
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एनबीएफसी के लिए सख्त होंगे नकदी नियम

रघु मोहन / मुंबई 05 01, 2019

10 और 15 फीसदी का मौजूदा नकदी अंतर सख्त होगा

एनबीएफसी बोर्डों को नहीं होगी अपवाद की अनुमति
वाणिज्यिक प्रतिभूतियों पर निर्भरता में होगी कटौती
एनबीएफसी के सेक्टरों का भी रखा जाएगा ध्यान
बैंकों के अनुरूप होंगे एनबीएफसी के परिसंपत्ति-देनदारी के नियम

बिजनेस स्टैंडर्ड एनबीएफसी के लिए सख्त होंगे नकदी नियमभारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) गैर बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (एनबीएफसी) के नकदी नियमों को सख्त बनाने की तैयारी में है। केंद्रीय बैंक इन कंपनियों को फंडिंग के ज्यादा स्थायी स्रोतों की तरफ ले जाना चाहता है और इसे सुनिश्चित करने के लिए नकदी अंतर के बारे में नई सीमाएं लागू की जाएंगी। माना जा रहा है कि नए दिशानिर्देश चरणबद्घ तरीके से लागू किए जाएंगे। नकदी जमा नहीं करने वाली अहम कंपनियां और नकदी जमा स्वीकार करने वाली सभी कंपनियां इसके दायरे में आएंगी। इस तरह बैंकिंग नियामक एनबीएफसी के परिसंपत्ति-देनदारी में विसंगति से जुड़े नियमों को बैंकों की तरह बनाना चाहता है जो सख्त हैं।

एनबीएफसी के नकारात्मक अंतर (फंड के आने और जाने में अंतर) की समीक्षा की जा रही है। अभी एक दिन से लेकर एक साल की अवधि में यह 10 फीसदी है जबकि एक दिन से लेकर एक महीने की अवधि के लिए 15 फीसदी है। सामान्य शब्दों में कहें तो अगर एनबीएफसी को 100 रुपये देने हैं तो वह बाजार से केवल 10 रुपये ही ले सकती है और बाकी 90 रुपये उसे अपने कारोबारी परिचालन से जुटाने होंगे। सशक्त परिसंपत्ति-देनदारी प्रबंधन नीति एनबीएफसी और आवास वित्त कंपनियां नियमों का पालन करती हैं लेकिन इसमें भी अपवाद की गुंजाइश है। 

इन नियमों की समीक्षा की जा रही है और आरबीआई नए मानक दिशानिर्देश जारी करने की तैयारी में है। खासकर परिसंपत्तियों और देनदारी के बीच अंतर को पाटने के लिए वाणिज्यिक प्रतिभूतियों पर एनबीएफसी की निर्भरता की सीमा निर्धारित की जाएगी। एक सूत्र ने बताया कि नए नियमों में इस बात का भी ध्यान रखा जाएगा कि एनबीएफसी का कार्यक्षेत्र क्या है। उदाहरण के लिए बुनियादी ढांचे के क्षेत्र में काम करने वाली एनबीएफसी के लिए नकदी की समस्या तब पैदा होती है जब सरकारी संस्थाएं समय पर पैसा जारी नहीं करती हैं। 

सूत्रों के मुताबिक एनबीएफसी के मुख्य कार्यकारियों और वरिष्ठ अधिकारियों की भी केंद्रीय बैंक के साथ बातचीत चल रही है। उन्होंने आरबीआई की पहल का स्वागत किया है लेकिन उनका कहना है कि नई व्यवस्था अपनाने के लिए उन्हें समय दिया जाना चाहिए। अहम एनबीएफसी उन गैर बैंकिंग वित्तीय कंपनियों को कहा जाता है जिनकी परिसंपत्ति का आकार 500 करोड़ रुपये है। पूरे एनबीएफसी क्षेत्र को तुरंत सख्त निगरानी के दायरे में नहीं लाने का एक कारण यह भी है कि इस तरह की कंपनियां और उनके जुड़े क्षेत्रों को कोई परेशानी न हो। एनबीएफसी ने आरबीआई के गवर्नर शक्तिकांत दास के साथ बैठक में इस बात पर जोर दिया था। नकदी जमा स्वीकार करने वाली एनबीएफसी को इसके दायरे में लेने का मकसद जमाकर्ताओं के हितों की रक्षा करना है।
Keyword: NBFC, bank, micro finance, RBI,
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