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को-लोकेशन मामला : अलग खाते में हैं 2,000 करोड़ रु.

सचिन मामबटा / मुंबई May 01, 2019

बाजार नियामक ने कारोबारी वॉल्यूम के लिहाज से देश के सबसे बड़े एक्सचेंज को एक घोटाले के मामले में 1,000 करोड़ रुपये चुकाने को कहा है। इस घोटाले के तहत कुछ ब्रोकरों को स्टॉक एक्सचेंज के सर्वर पर आसान पहुंच के जरिए कमाई का मौका मिला था। एक्सचेंज के खुलासे से पता चलता है कि उसने अपने राजस्व से 2,000 करोड़ रुपये बाजार नियामक सेबी के लंबित निर्देश के लिए अलग रखा था। दिसंबर 2018 के वित्तीय विवरण के एक नोट में कहा गया है, सेबी ने निर्देश दिया है कि लंबित जांच पूरी होने तक सितंबर 2016 से को-लोकेशन के जरिए अर्जित राजस्व (इसके जरिये हुए कारोबार पर लेनदेन शुल्क समेत) को एक अलग खाते में हस्तांतरित किया जाए और 1,994.77 करोड़ रुपये एक अलग बैंक खाते में हस्तांतरित किए गए हैं। इस रकम का निवेश निदेशक मंडल की तरफ से मंजूर कंपनी की नीति के तहत किया गया है।
 
हालांकि यह रकम प्रावधान की प्रकृति की नहीं है। इसका मतलब यह होगा कि किसी तरह का भुगतान लाभ-हानि या बैलेंस शीट में प्रतिबिंबित होगा। दिसंबर 2018 के वित्तीय विवरण में कहा गया है, प्रबंधन का मानना है कि सेबी के साथ लंबित इन मामलों के निष्कर्ष, इसे लेकर देनदारी का भरोसेमंद अनुमान अभी नहीं लगाया जा सकता, ऐसे में वित्तीय नतीजे में इस तरह का कोई प्रावधान या समायोजन नहीं किया गया है। वित्तीय विवरण के नोट में यह भी कहा गया है कि निवेश को प्रतिबंधित के तौर पर दिखाया गया है। वित्त वर्ष 2018 की बैलेंस शीट से पता चलता है कि गैर-चालू परिसंपत्ति के तौर पर 3,403.25 करोड़ रुपये का निवेश है। इसके अलावा मौजूदा परिसंपत्ति के तहत 2,873.89 करोड़ रुपये का निवेश भी है। चालू परिसंपत्तियां उसे माना जाता है जिसे एक वित्त वर्ष में होल्ड किया जाता है। गैर-चालू परिसंपत्तियां वे होती हैं जिसे लंबी अवधि तक रखा जाता है।
 
इसे प्रतिबंधित श्रेणी में रखा गया था क्योंकि आरोप पर उस समय जांच चल रही थी। व्हिसलब्लोअर के पत्र में मामले का विस्तृत ब्योरा दिया गया था, जो एक्सचेंज के को-लोकेशन सर्वर से जुड़ा था। ये सर्वर एक्सचेंज के पास थे और ब्रोकरों को किसी ट्रेड को क्रियान्वित करने के लिए एक सेकंड से भी कम का समय लगता था। कुछ ब्रोकरों की अन्य के मुकाबले सर्वर तक अनुचित पहुंच थी। इससे उन्हें बाजार के अन्य प्रतिभागियों की कीमत पर कमाई का मौका मिला। सेबी की जांच जारी थी।
 
मंगलवार को सेबी ने एक्सचेंज को कई आदेशों के जरिये 687.47 करोड़ रुपये चुकाने को कहा। अलग-अलग आदेशों को देखें तो कुल रकम ब्याज समेत 1,000 करोड़ रुपये से ज्यादा बैठती है। यह सालाना लाभ का दो तिहाई से ज्यादा बैठता है। मार्च 2018 में समाप्त वित्त वर्ष में एक्सचेंज का लाभ 1,461.47 करोड़ रुपये रहा। साथ ही वित्त वर्ष 2019 के पहले नौ महीने में लाभ बढ़कर 1,343.32 करोड़ रुपये रहा। प्रवक्ता ने इस बारे में जानकारी के लिए भेजे गए ईमेल का जवाब नहीं दिया।
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