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कोल इंडिया : 65.5 करोड़ टन उत्पादन पर निगाह

अभिषेक रक्षित / कोलकाता May 01, 2019

कोयला मंत्रालय ने चालू वित्त वर्ष के दौरान कोल इंडिया के लिए 65.5 करोड़ टन उत्पादन लक्ष्य निर्धारित किया है। पिछले वित्त वर्ष में इस महारत्न कंपनी का उत्पादन 60.7 करोड़ टन रहा और इसने वास्तविक उत्पादन में 7.23 प्रतिशत वृद्धि दर्ज की। पिछले वित्त वर्ष में मंत्रालय ने कंपनी के लिए 61 करोड़ टन का उत्पादन और आपूर्ति लक्ष्य निर्धारित किया था। संयोग से इस वर्ष मंत्रालय का लक्ष्य उस अपेक्षित लक्ष्य से मात्र 50 लाख टन ही ज्यादा है जो दुनिया की इस सबसे बड़ी कोयला उत्पादक ने पिछले वित्त वर्ष में अपने लिए निर्धारित किया था।

 
बिजली संयंत्रों तथा इस्पात और सीमेंट जैसे अन्य क्षेत्रों की अनुमानित आवश्यकता के आधार पर प्रत्येक वित्त वर्ष की शुरुआत में कोयला मंत्रालय कोल इंडिया के साथ एक करार करता है जिसे सहमति पत्र (एमओयू)  कहा जाता है।  कंपनी के सूत्रों का कहना है कि पिछले साल उत्पादन में जो उछाल दर्ज की गई, उसे देखते हुए मंत्रालय चाहता है कि कोल इंडिया वृद्धि की इस रफ्तार को बनाए रखे। इस वर्ष का लक्ष्य उसी वृद्धि की रूपरेखा के अनुरूप है जिसे कंपनी ने उत्पादन बढ़ाने के लिए  तैयार किया है।
 
हालांकि इसकी सबसे बड़ी सहायक कंपनी महानदी कोलफील्ड्स (एमसीएल) को लगतार श्रमिकों, ग्रामीणों और मंजूरी संबंधी मसलोंसे जुड़ी उत्पादन और विस्तार की समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। ये समस्याएं उत्पादन को प्रभावित कर सकती हैं लेकिन इसकी अन्य सहायक कंपनियां पिछले साल नई ऊंचाई पर पहुंच चुकी हैं। पिछले वित्त वर्ष में साउथ-ईस्टर्न कोलफील्ड्स (एसईसीएल) और महानदी कोलफील्ड्स के बाद नॉर्दन कोलफील्ड्स 10 करोड़ टन उत्पादन का आंकड़ा पार करने वाली कंपनी की तीसरी बड़ी सहायक कंपनी बन गई। दूसरी ओर एसईसीएल 15 करोड़ टन से अधिक का उत्पादन करते हुए कोल इंडिया की पहली सहायक कंपनी बन गई जबकि ईस्टर्न कोलफील्ड्स और वेस्टर्न कोलफील्ड्स पांच-पांच करोड़ टन वाली कंपनियां बनी हुई हैं।
 
कंपनी के अधिकारियों के अनुसार पिछले साल उत्पादन वृद्धि में वित्त वर्ष 2017-18 के 2.33 प्रतिशत की तुलना में लगभग तीन गुना इजाफा हुआ है। अधिकारियों का मानना ​​है कि इस साल तीन महत्त्वपूर्ण रेल पटरियों के चालू होने से कंपनी की आपूर्ति क्षमता में वृद्धि होगी और खदानों से निकासी बढ़ेगी। पूरी तरह चालू होने के बाद इन रेल पटरियों से कंपनी की कोयला आपूर्ति की क्षमता में 10 करोड़ टन तक का इजाफा हो सकता है। इनमें से पहली झारसुगुडा-सरडेगा रेल पटरी 53 किलोमीटर लंबी है जहां पिछले साल अप्रैल से आंशिक परिचालन शुरू हो चुका है। दूसरी झारखंड में 44.37 किलोमीटर लंबी टोरी-शिवपुर रेल पटरी है जहां रेक डालने का काम आंशिक रूप से शुरू हो चुका है। छत्तीसगढ़ से गुजरने वाली तीसरी और महत्त्वपूर्ण संपर्क लाइन है - पूर्वी गलियारा और पूर्वी-पश्चिमी गलियारा जिसका आंशिक परिचालन इस साल जून से शुरू होने की उम्मीद है।
 
इसके अलावा मशीनीकरण पर अधिक ध्यान देने से कोल इंडिया पिछले महीने एक दिन में 31.4 लाख टन कोयला उत्पादन करने में सफल रही थी जबकि उस महीने में कोल इंडिया ने 7.919 करोड़ टन कोयला उत्पादन किया था। जब से कोल इंडिया की शुरुआत हुई है तब से एक महीने में अब तक का यह सबसे अधिक उत्पादन दर्ज किया गया है और कंपनी के अधिकारी इस उपलब्धि पर बहुत उत्साहित लगते हैं।
Keyword: coal india, export, import,,
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