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वर्षों की गिरावट के बाद डेरी उत्पाद निर्यात में आई तेजी

दिलीप कुमार झा / मुंबई May 01, 2019

चार साल की मंदी के बाद वित्त वर्ष 2018-19 में भारत के डेरी निर्यात ने जोर पकड़ते हुए दूसरा सर्वकालिक शानदार प्रदर्शन किया। स्किम्ड मिल्क पाउडर (एसएमपी) और घी-दूध सहित अन्य दुग्ध उत्पादों की आपूर्ति में कमी के कारण वैश्विक कीमतों में वृद्धि इसकी वजह बनी।  कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (एपीडा) के आंकड़े बताते हैं कि अप्रैल 2018 और फरवरी 2019 के बीच भारत में डेरी उत्पादों का कुल निर्यात 40.4 करोड़ डॉलर रहा जो पिछले वर्ष की इस तुलनात्मक अवधि में $26 करोड़ डॉलर था। विशेषज्ञों का मानना ​​है कि मार्च में 10 करोड़ डॉलर की अनुमानित राशि का डेरी निर्यात हुआ और पूरे वित्त वर्ष 2019 में 50 करोड़ डॉलर पार करने का अनुमान है जो 2013-14 के दौरान बने 72.8 करोड़ डॉलर के रिकॉर्ड के बाद दूसरा सर्वाधिक स्तर है।
 
डेरी निर्यात में अचानक आई सक्रियता से उन भारतीय निर्यातकों को बड़ी राहत मिली है जो कई वर्षों से वैश्विक बाजार में कमी और कीमतों के जोर पकडऩे का इंतजार कर रहे थे। पिछले चार वर्षों के दौरान भारतीय बाजार को दूध और इसके एसएमपी, घी तथा मक्खन जैसे उत्पादों की भारी आपूर्ति का सामना करना पड़ रहा था। अमूल ब्रांड के तहत दूध और इसके उत्पादों की बिक्री करने वाले गुजरात सहकारी दुग्ध विपणन महासंघ के प्रबंध निदेशक आरएस सोढ़ी ने कहा कि एसएमपी, मक्खन और अन्य उत्पादों का निर्यात मार्च में भी जारी रहा। यहां तक ​​कि हमने भी मार्च में लगभग 30,000 टन एसएमपी का निर्यात किया है। अन्य डेरी कंपनियों ने भी अंतरराष्ट्रीय बाजार में बड़ी मात्रा में एसएमपी का निर्यात किया है। आने वाले महीनों में भी यह जारी रहेगा। पिछले दो महीनों के दौरान घरेलू और अंतरराष्ट्रीय दोनों बाजारों में एसएमपी की कीमतों में काफी वृद्धि हुई है।
 
एसएमपी के जो दाम कुछ समय पहले तक अंतरराष्ट्रीयबाजार में 1,800 डॉलर प्रति टन तक लुढ़क गए थे, वे अब बढ़कर लगभग 2,200-2,300 डॉलर प्रति टन के आसपास आ गए हैं। संयुक्त राष्ट्र के खाद्य और कृषि संगठन (एफएओ) ने अपनी हालिया रिपोर्ट में मार्च 2019 के अपने डेरी मूल्य सूचकांक में लगातार तीसरे मासिक इजाफे के साथ 6.2 प्रतिशत की क्रमबद्ध वृद्धि दर्ज की है। मार्च में मक्खन, दूध पाउडर और पनीर के अंतरराष्ट्रीय दामों में इजाफा हुआ। दूध उत्पादन में सीजनल गिरावट के कारण निर्यात उपलब्धता में कमी की आशंका से आयात मांग बढऩे से दामों में मजबूती आई। 
 
घरेलू बाजार में भी बेंचमार्क एसएमपी के दाम तकरीबन 25 प्रतिशत तक उछलकर या 60-70 रुपये प्रति किलोग्राम तक बढ़कर अब 230-240 रुपये प्रति किलोग्राम के आसपास हैं। दिलचस्प यह है कि बाजार में स्टॉक की अनुपलब्धता के कारण एसएमपी की घरेलू मांग पांच महीने से तेज रही है। सोढ़ी का पूर्वानुमान है कि जून के अंत तकएसएमपी की कीमतें 290 रुपये प्रति किलोग्राम के सर्वकालिक उच्च स्तर तक पहुंच जाएंगी। अंतरराष्ट्रीय बाजार में वसा की कीमतों में भी पिछले दो महीने के दौरान 33 प्रतिशत तक का खासा इजाफा हुआ है। मार्च में सफेद मक्खन के दाम 210 रुपये प्रति किलोग्राम थे जो अब उछलकर 280 रुपये चल रहे हैं। घी के दाम भी 10 प्रतिशत बढ़कर 340 रुपये के करीब आ गए हैं। मार्च में दाम 208-300 रुपये प्रति किलोग्राम के स्तर पर थे। अंतरराष्ट्रीय बाजार में घी की कीमतें 20 प्रतिशत तक बढ़कर अब 6,000 डॉलर प्रति टन के दायरे में है। 
 
मदर डेयरी के प्रवक्ता ने कहा कि पिछले दो महीने में दूध की कीमतों में डेढ़ से दो रुपये किलो तक का इजाफा हुआ है। बाजार में एसएमपी की बढ़ती कीमतों ने हमारी उत्पादन लागत को प्रभावित नहीं किया है क्योंकि हम बाजार से खरीद नहीं करते हैं। कीमतों के रुख पर हमारी नजर है। लेकिन निकट भविष्य में कीमतों में बढ़ोतरी का विचार नहीं है। इस बीच चारे और पानी की कमी के कारण महाराष्ट्र में किसानों के लिए स्थिति विकट बनती जा रही है। किसान अन्य राज्यों में  अपने दुधारू पशु बेच रहे हैं। इसलिए दूध की आपूर्ति गड़बड़ा गई है। मक्का, खली और चावल भूसी समेत चारे के बढ़ते दामों से उनकी पशुपालन क्षमता बिगड़ गई है। डायनामिक्स ब्रांड के तहत डेरी उत्पाद बेचनी वाली श्राइबर डायनामिक्स डेयरीज के प्रबंध निदेशक अमिताभ रे ने कहा कि महाराष्ट्र में पानी की बहुत किल्लत है। दूध आपूर्ति में कमी आ रही है जिससे मांग बढ़ रही है जो डेरी उत्पादों के दामों में इजाफा ला रही है। हालांकि विशेषज्ञों का मानना ​​है कि महाराष्ट्र में दूध खरीद की कीमतें छह रुपये प्रति लीटर तक बढ़कर 26-27 रुपये प्रति लीटर हो गई हैं। इससे राज्य में डेरियों के मुनाफे में कमी आ सकती है।
Keyword: milk, dairy, SMP,,
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