बिजनेस स्टैंडर्ड - जीएसटी प्रभाव: सेवा क्षेत्र को लाभ, सरकारी को नुकसान
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जीएसटी प्रभाव: सेवा क्षेत्र को लाभ, सरकारी को नुकसान

अभिषेक वाघमारे / नई दिल्ली April 30, 2019

वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) के पहले दो वर्ष विभिन्न उतार-चढ़ाव से जुड़े रहे। इस अवधि के दौरान दर कटौती से लेकर राजस्व नुकसान और तकनीकी समस्याएं भी देखने को मिलीं। बिजनेस स्टैंडर्ड को मिले आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, लेकिन जब बात सेवा क्षेत्र की हो तो यह स्पष्ट दिखा है कि इसमें कर भुगतान और संग्रह का परिदृश्य बदला है।  सभी 10 प्रमुख सेवाओं में, सरकार के लिए राजस्व जीएसटी के पहले साल में सेवा कर व्यवस्था के पहले साल की तुलना में 20 प्रतिशत तक घटा है। यह गिरावट एक साल में इन सेवाओं के लिए कर देनदारी में 50 प्रतिशत तक की वृद्घि के बावजूद आई है। 
 
सरकारी अधिकारियों और विश्लेषकों का कहना है कि इसकी वजह जीएसटी के तहत कर भुगतान के लिए इनपुट-टैक्स क्रेडिट का अधिक इस्तेमाल है। उनका कहना है कि इससे अप्रत्यक्ष कर भुगतान के लिए नकदी खर्च में कमी के संदर्भ में सेवा क्षेत्र की दिग्गज कंपनियों को फायदा हुआ है और उनके मुनाफे में सुधार देखने को मिला है। आंकड़ों से पता चलता है कि जहां इन क्षेत्रों में कंपनियां 2016-17 में व्यवस्था में उपलब्ध इनपुट-टैक्स क्रेडिट का इस्तेमाल कर अपनी लगभग 50 प्रतिशत कर देनदारी का समायोजित करने में सक्षम रहीं, वहीं 2017-18 में इनपुट टैक्स क्रेडिट का इस्तेमाल कर उन्होंने अपनी कर देनदारी का 70 प्रतिशत से ज्यादा का भुगतान किया। 2017-18 के लिए, तीन महीनों (अप्रैल से जून) के लिए कर सेवा कर से और शेष 9 महीनों (जुलाई से मार्च) के लिए जीएसटी से संबद्घ था। इनपुट-टैक्स क्रेडिट एक ऐसा लाभ है जिसके लिए कोई व्यवसाय उत्पाद सामग्री पर चुकाए गए कर के लिए दावा कर सकता है।
 
वित्त मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बिजनेस स्टैंडर्ड को बताया, 'कर देनदारी में वृद्घि से पता चलता है कि क्षेत्र अच्छा प्रदर्शन कर रहे हैं। लेकिन सेवा कंपनियां अब क्रेडिट के तौर पर अच्छी मात्रा में इनपुट टैक्स का लाभ हासिल करने में सक्षम हैं। हालांकि इसका सरकारी राजस्व पर नकारात्मक प्रभाव पड़ा है, लेकिन इससे सेवाओं की कीमतों में कुछ हद तक कमी लाने में मदद मिली है।' सूची में ऐसी सेवाएं शामिल हैं जिनमें ऋण के इस्तेमाल में अच्छी तेजी दर्ज की गई, जैसे दूरसंचार और विमानन, लेकिन बैंकिंग और बीमा सेवाएं इससे अलग हैं। इंजीनियरिंग कंसल्टिंग कंपनियों के लिए, कर देननदारी चुकाने के लिए इस्तेमाल ऋण का मात्रा 2016-17 के 41 प्रतिशत से बढ़कर 2017-18 में 77 प्रतिशत पर पहुंच गई। वहीं दूरसंचार कंपनियों के लिए यह 58 प्रतिशत से बढ़कर 78 प्रतिशत पर पहुंच गई।
 
हालांकि इस पर्यवेक्षण को पूरी तरह न तो जीएसटी के प्रतिनिधि के तौर पर समझा जा सकता है, न ही बाद के वर्षों के लिए, लेकिन आंकड़ों से पता चलता है कि सेवा कंपनियों पर कर बोझ जीएसटी लागू होने के एक साल में घटा है। विश्लेषकों का कहना है कि जीएसटी के पहले साल में इनपुट-टैक्स क्रेडिट के ज्यादा इस्तेमाल में ट्रांजीशन क्रेडिट (जीएसटी से पूर्व की व्यवस्था से उपलब्ध क्रेडिट) शामिल है। लेकिन अर्थशास्त्रियों का कहना है कि क्रेडिट के जरिये कर भुगतान का ज्यादा अनुपात चिंता का विषय है। भारत के पूर्व मुख्य सांख्यिकीविद प्रणब सेन ने कहा, 'अक्सर सेवाओं के लिए, इनपुट का मूल्य आउटपुट के  मूल्य का औसत 30 प्रतिशत है। इसलिए इनपुट पर करों से अर्जित क्रेडिट के जरिये  70 प्रतिशत भुगतान बहुत ज्यादा लग रहा है।'
 
जीएसटी के तहत, सेवा कंपनियां इनपुट के तौर पर खरीदे गए सामन पर भी चुकाए गए करों के समायोजन में सक्षम हैं। वैट या सामान पर चुकाए गए उत्पाद शुल्क पर क्रेडिट सेवा कर व्यवस्था के तहत उपलब्ध नहीं था। उदाहरण के लिए, मान लीजिए कि कोई आईटी/आईटीईएस कंपनी को किसी बड़ी आईटी कंपनी को सेवा देने के लिए 100 लैपटॉप खरीदने की जरूरत है। तो यह आईटी/आईटीईएस कंपनी इन सामान पर चुकाए गए जीएसटी पर क्रेडिट का दावा कर सकती है, जो जीएसटी से पहले की व्यवस्था में संभव नहीं था।
 
दूरसंचार कंपनियों को एआरपीयू (प्रति उपयोगकर्ता औसत राजस्व) में गिरावट की वजह से राजस्व में कमी का सामना करना पड़ रहा है, जबकि स्पेक्ट्रम शुल्कों और  लाइसेंस शुल्कों के तौर पर उनकी इनपुट लागत पिछले कुछ वर्षों से काफी हद तक समान बनी हुई है। इससे 2017-18 में कर देनदारी में कमी आई। 
Keyword: GST, वस्तु एवं सेवा कर, जीएसटी,,
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