बिजनेस स्टैंडर्ड - देश की पहली ई-कार का उत्पादन बंद
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देश की पहली ई-कार का उत्पादन बंद

शैली सेठ मोहिले / मुंबई 04 30, 2019

रेवा से ई2ओ प्लस का सफर

2001: रेवा इलेक्ट्रिक कार कंपनी (आरईसीसी) ने रेवा उतारी
2010: महिंद्रा ने आरईसीसी में नियंत्रण हिस्सेदारी खरीदी
2013: महिंद्रा ने रेवा प्लेटफॉर्म पर आधारित ई2ओ उतारी
2016: महिंद्रा ने कंपनी का नाम बदलकर महिंद्रा इलेक्ट्रिक किया
2016: दो दरवाजों वाले मॉडल की जगह चार दरवाजों वाली ई2ओ प्लस उतारी
2019: घरेलू बाजर के लिए ई2ओ प्लस मॉडल का उत्पादन बंद किया

बिजनेस स्टैंडर्ड देश की पहली ई-कार का उत्पादन बंदमहिंद्रा ऐंड महिंद्रा की इलेक्ट्रिक वाहन कंपनी महिंद्रा इलेक्ट्रिक मोबिलिटी ने महिंद्रा ई2ओ प्लस का उत्पादन बंद कर दिया है। सूत्रों के मुताबिक कंपनी को कमजोर बिक्री और सख्त सुरक्षा नियमों के कारण यह फैसला उठाना पड़ा। इसके साथ ही देश की पहली इलेक्ट्रिक कार के लिए आगे का रास्ता बंद हो गया। इस हैच मॉडल का उत्पादन रेवा प्लेटफॉर्म पर किया जा रहा था और महिंद्रा ने ई2ओ की अंतिम यूनिट का उत्पादन 31 मार्च को किया।

महिंद्रा इलेक्ट्रिक में मुख्य कार्यकारी महेश बाबू ने पुष्टि की कि कंपनी ने घरेलू बाजार के लिए इस मॉडल का उत्पादन बंद कर दिया है। उन्होंने कहा कि कंपनी का यह फैसला इलेक्ट्रिक हैचबैक श्रेणी को नए सिरे से तैयार करने की योजना का हिस्सा है। उन्‍होंने कहा, 'एयरबैग और एंटी लॉक ब्रेकिंग सिस्टम पर कुछ नियम बनाए हैं, इसलिए हम हैच श्रेणी पर नए सिरे से काम कर रहे हैं।'

बाबू ने कहा कि इस मॉडल का उत्पादन बंद करना इसमें बदलाव की योजना का हिस्सा है। ई2ओ की बिक्री नेपाल जैसे पड़ोसी देशों में जारी रहेगी। भारत में इसकी जगह इस कैलेंडर वर्ष के अंत में केयूवी100 के इलेक्ट्रिक संस्करण को उतारा जाएगा। अभी महिंद्रा देश की एकमात्र कार निर्माता कंपनी है जो इलेक्ट्रिक कार बेचती है। इनमें ई2ओ प्लस और ई-वेरिटो शामिल हैं। कंपनी की योजनाओं की जानकारी रखने वाले एक सूत्र ने बताया कि महिंद्रा ईकेयूवी को ई2ओ ब्रांड के तहत बाजार में उतार सकती है।

बाबू ने साथ ही कहा कि ई2ओ का उत्पादन बंद करने के पीछे एक कारण कमजोर बिक्री भी रही। पर्सनल सेगमेंट में कंपनी औसतन करीब 50 यूनिट ही बेच पा रही थी। महिंद्रा ने 2010 में बेंगलूरु की रेवा इलेक्ट्रिक कार कंपनी में नियंत्रण हिस्सेदारी खरीदी थी। देश में इलेक्ट्रिक वाहन बाजार के तेजी से बढऩे की उम्मीद थी और महिंद्रा इसका फायदा उठाना चाहती थी।  रेवा की अपनी चुनौतियां थी और यह भारतीय बाजार में कभी भी अपना मुकाम हासिल नहीं कर पाई। इसके पीछे कई कारण थे जिनमें इसकी ऊंची कीमत और सरकार की इलेक्ट्रिक वाहन नीति की अनिश्चितता शामिल थी। रेवा की स्थापना 2001 में हुई थी और तबसे लेकर 2010 तक उसने इस मॉडल की केवल 3500 इकाइयां ही बेची। अधिग्रहण के साथ महिंद्रा को उम्मीद थी कि तीन-चार साल में वह इसे पटरी पर ले आएगी। 

2013 में महिंद्रा ने रेवा में बाकी हिस्सेदारी भी मैनी परिवार से खरीद ली और इसका मूल कंपनी में विलय कर दिया गया। कंपनी का नया नाम महिंद्रा इलेक्ट्रिक मोबिलिटी रखा गया। इसके बावजूद इस मॉडल की किस्मत ने पलटा नहीं खाया। इसके इलेक्ट्रिक वाहन नीति पर सरकार की ढुलमुल नीति भी जिम्मेदार रही। पिछले  वित्त वर्ष के दौरान महिंद्रा ने घरेलू बाजार में कुल 350 इलेक्ट्रिक वाहन बेचे हैं।
Keyword: vehicle, car, electric, petrol, diesel, mahindra,,
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