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ईएमसी अब होगी आम शेयरधारक

अभिषेक रक्षित / कोलकाता April 29, 2019

विलियमसन मैगोर ग्रुप (डब्ल्यूएमजी) की सहायक इंजीनियरिंग कंपनी मैकेनली भारत इंजीनियरिंग ने अपने पूर्व प्रवर्तक शेयरधारक ईएमसी लिमिटेड को एक आम शेयरधारक के तौर पर वर्गीकृत किया है। जबकि मैकेनली भारत इंजीनियरिंग नैशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (एनसीएलटी) के कोलकाता पीठ में दिवालिया प्रक्रिया का सामना कर रही है। ईएमसी को नए सिरे से वर्गीकृत करने के इस प्रस्ताव पर कंपनी को अगले 2 से 3 महीने में डाक मतपत्र से शेयरधारकों से मंजूरी लेनी होगी। ईएमसी का कहना है कि वह मैकेनली भारत की किसी भी गतिविधि में प्रत्यक्ष अथवा अप्रत्यक्ष तौर पर शामिल नहीं रही है। कंपनी के परिचालन संबंधी मामलों में उसका कोई नियंत्रण नहीं रहा है। वह फिलहाल किसी प्रमुख प्रबंधकीय पद पर भी मौजूद है और इसलिए उसे अपनी शेयरधारिता को नए सिरे से वर्गीकृत करने की जरूरत है।

 
मैकेनली भारत इंजीनियरिंग के एक सूत्र ने बताया कि कंपनी ने नवंबर 2018 में भी अपनी शेयरधारिता को नए सिरे से वर्गीकृत कराने की कोशिश की थी लेकिन ईएमसी की उचित घोषणा के अभाव में शेयरधारकों से मंजूरी नहीं ली जा सकी थी। जबकि मैकेनली भारत इंजीनियरिंग में ईएमसी लिमिटेड की हिस्सेदारी में लगातार गिरावट दर्ज की गई। ईएमसी लिमिटेड के निदेशक मनोज तोशनीवाल ने कहा, 'ईएमसी के शेयरों को गिरवी रखा गया था और लेनदार अपने बकाये की वसूली के लिए उन गिरवी शेयरों को भुना रहे हैं। यही कारण है कि मैकेनली भारत इंजीनियरिंग में ईएमसी लिमिटेड की हिस्सेदारी घट रही है।'
 
मैकेनली भारत इंजीनियरिंग में ईएमसी लिमिटेड में पूंजी निवेश के लिए रकम जुटाने के क्रम में इन शेयरों को गिरवी रखा गया था। इससे पहले मैकेनली भारत इंजीनियरिंग में ईएमसी लिमिटेड ने ईएमसी लिमिटेड के लिए विलय योजना तैयार की थी लेकिन उसे अंतिम रूप नहीं दिया जा सका। ईएमसी ने 2015 में मैकेनली भारत इंजीनियरिंग में एक रणनीतिक निवेशक के तौर पर 19.77 फीसदी हिस्सेदारी हासिल की थी। इसके बाद विलियमसन मैगोर ग्रुप ने अपनी इंजीनियरिंग कंपनियों- मैकेनली भारत इंजीनियरिंग, किलबर्न इंजीनियरिंग (केईएल) और मैकेनली सयाजी इंजीनियरिंग- का ईएमसी लिमिटेड के साथ एकीकृत करते हुए 7,000 करोड़ रुपये से अधिक के राजस्व और 10,000 करोड़ रुपये के ऑर्डर बुक के साथ पूर्वी भारत की सबसे बड़ी इंजीनियरिंग कंपनी बनाने की योजना तैयार की थी।
 
डब्ल्यूएमजी के खेतान परिवार और ईएमसी के तोशनीवाल परिवार के साथ इस प्रस्ताव पर चर्चा बढऩे के बाद अक्टूबर 2016 में मनोज तोशनीवाल को मैकेनली भारत इंजीनियरिंग के बोर्ड में बतौर अतिरिक्त निदेशक शामिल किया गया था। बाद में दिसंबर 2016 तक उन्होंने 26.66 फीसदी हिस्सेदारी हासिल की थी। लेकिन उसी साल दिसंबर तक बातचीत विफल हो गई और तोशनीवाल ने मैकेनली भारत इंजीनियरिंग के बोर्ड से इस्तीफा दे दिया। तभी से ईएमसी की हिस्सेदारी में लगातार गिरावट दर्ज की जा रही है।
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