बिजनेस स्टैंडर्ड - ई-कॉमर्स में अवसर तलाश रही कॉनकोर
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ई-कॉमर्स में अवसर तलाश रही कॉनकोर

शाइन जैकब / नई दिल्ली April 29, 2019

भारत में तेजी से उभर रहे ई-कॉमर्स बाजार में संभावनाएं तलाशने के प्रयास में भारतीय रेल की सहायक इकाई कंटेनर कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (कॉनकोर) पूरे देश में 20 वितरण लॉजिस्टिक केंद्र स्थापित करने की तैयारी कर रही है। कंपनी इन केंद्रों पर लगभग 5,000 करोड़ रुपये का निवेश करेगी।  भारतीय रेलवे की कंपनी को ई-कॉमर्स दिग्गजों एमेजॉन, फ्लिपकार्ट, शॉपक्लूज, पेटीएम, स्नैपडील और ई-बे द्वारा उसके इन केंद्रों का इस्तेमाल किए जाने की संभावना है। कंपनी के एक वरिष्ठï अधिकारी ने कहा कि अगले चार वर्षों में इन कंपनियों के लिए कम से कम 5 करोड़ वर्ग फुट का भंडारण क्षेत्र उपलब्ध होगा। कॉनकोर के निदेशक (वित्त) मनोज कुमार दुबे ने कहा, 'ये वितरण लॉजिस्टिक केंद्र सार्वजनिक निजी भागीदारी (पीपीपी) मॉडल के तहत काम करेंगे। हमें उम्मीद है कि ई-कॉमर्स कंपनियां संबंधित बोली प्रक्रियाओं में शामिल होंगी।'
 
निजी भागीदार परिचालन का प्रबंधन करने में सक्षम होगा और वितरण लॉजिस्टिक के लिए समझौते होने के बाद उसे संपूर्ण रूप से विपणन की स्वतंत्र हासिल होगी। मार्च में, कंपनी ने चेन्नई में अपना पहला वितरण लॉजिस्टिक केंद्र शुरू किया था। मीडिया खबरों के अनुसार, हालांकि इसे शुरू में एनडीआर समूह द्वारा विकसित किया गया था, बाद में दिल्ली की डीपी वल्र्ड द्वारा खरीद लिया गया था। ऐसा दूसरा केंद्र अगरतला में खुलने की संभावना है। मौजूदा समय में कंटेनर सेगमेंट में कॉनकोर की 75 प्रतिशत की बाजार भागीदारी है। कंपनी ने शुरू में 2017 से 2021 की पांच वर्षों की अवधि के लिए 6,000-8,000 करोड़ रुपये का पूंजीगत खर्च निर्धारित किया था। कंटेनर क्षेत्र में अपनी उपस्थिति बढ़ाकर 80 प्रतिशत किए जाने की कोशिश के तौर पर कॉनकोर ने आक्रामक विपणन योजना की घोषणा की, जो उसके ग्राहकों को 45-दिन का फ्री स्टोरेज प्रदान करती है। कंपनी का लक्ष्य कारोबार 2017-18 के 6,167 करोड़ रुपये से दोगुना बढ़ाकर 2021 तक 12,000 करोड़ रुपये पर पहुंचाना है।
 
दुबे ने कहा कि उनकी कंपनी बांग्लादेश, नेपाल और मिस्र जैसे देशों में भी अपनी उपस्थिति बढ़ाने की संभावना तलाश रही है। उन्होंने कहा, 'एक कंसोर्टियम के तौर पर हमने मिस्र में 20 शुष्क बंदरगाहों के निर्माण एवं परिचालन के लिए बोलियां सौंप दी हैं।' कॉनकोर, सिंगापुर की बंदरगाह ऑपरेटर पीएसए इंटरनैशनल और मिस्र की निर्माण इंजीनियरिंग कंपनी हासन आलम होल्डिंग ने काहिरा के ड्राई पोर्ट वेस्ट के निर्माण के लिए शुरू में समझौते किए थे। सूत्रों के अनुसार, कॉनकोर की इस कंसोर्टियम में 45 प्रतिशत की हिस्सेदारी है, जबकि शेष समान रूप से दो विदेशी कंपनियों द्वारा साझा की जाएगी। 
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