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फैशन की दुनिया में ब्रांड खादी में नया बदलाव

टी ई नरसिम्हन /  April 29, 2019

अरविंद लिमिटेड से लेकर रेमंड और फैशन डिजाइनर बिरादरी से ताल्लुक रखने वाले अन्य ब्रांडेड कपड़ा निर्माता अब ब्रांड खादी पर ध्यान दे रहे हैं। अमूमन खादी की पहचान नेताओं से जुड़ी होती है और यह एक राष्ट्रीय गर्व का प्रतीक भी है। लेकिन अब यह फैशन का हिस्सा भी बन गया है और इसे युवा पीढ़ी भी तरजीह दे रही है। इसमें एक व्यापक बदलाव हो रहा है और मेकओवर की वजह से सरकारी स्वामित्व वाले खादी एवं ग्रामीण उद्योग आयोग (केवीआईसी) के लिए दरवाजे खुल रहे हैं। खादी के समर्थक अब नए ग्राहकों के साथ ऐसी भाषा में बातचीत कर रहे हैं जिससे पुराने दौर के खादी आधुनिक किस्म के बदलाव की गवाह बन रही है। 

 
अरविंद लिमिटेड केवीआईसी से भारी मात्रा में खादी खरीदती है। अरविंद लिमिटेड के लाइफस्टाइल फैब्रिक्स-डेनिम के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) आमिर अख्तर कहते हैं कि देश और विदेश में खादी को लेकर दिलचस्पी बढ़ रही है। वह कहते हैं, 'हम ग्राहकों के दो स्पष्ट उप समूह देख रहे हैं। 20 से 35 साल उम्र वर्ग के ग्राहक इसे आधुनिक फैब्रिक के तौर पर देखते हैं और इसके लंबे समय तक टिकने के पहलू को अहमियत देते हैं जबकि 35 से अधिक उम्र वर्ग के लोग इसके आरामदायक होने के पहलू और इसकी विरासत को तवज्जो देते हैं।'
 
अरविंद जैसी कपड़ा कंपनियां दो बड़े बदलावों की ओर इशारा करती हैं। पहला है कपड़े को लेकर ग्राहकों की धारणा में होने वाला बदलाव। दूसरी बात यह है कि डिजाइनरों की दिलचस्पी भी खादी में बढ़ी है जिनकी वजह से खादी का भविष्य सुनहरा नजर आता है। ये डिजाइनर ही नए स्टाइल तैयार कर रहे हैं और इसका इस्तेमाल करते हुए ग्राहकों के लिए खादी का आधार और व्यापक कर रहे हैं।  निश्चित तौर पर इससे केवीआईसी की तकदीर चमकी है और अब इस वित्त वर्ष में यह करीब 3,200 करोड़ रुपये की सर्वाधिक कमाई दर्ज करेगी और इससे इसका मुनाफा भी बढ़ेगा। कंपनी का कहना है कि पिछले 10 सालों की औसत 7 फीसदी वृद्धि के मुकाबले पिछले चार सालों में केवीआईसी की बिक्री में करीब 30 फीसदी की वृद्धि हुई है। 
 
केवीआईसी के अध्यक्ष विनय कुमार सक्सेना का कहना है कि बिक्री के प्रमुख कारकों में आक्रामक मार्केटिंग, सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (पीएसई) में खादी के उत्पादों के लिए बढ़ती दिलचस्पी और अरविंद लिमिटेड, रेमंड और आदित्य बिड़ला फैशन जैसी कंपनियों के साथ आपूर्ति का गठजोड़ भी शामिल है। उनका कहना है कि खादी को जैविक और देसी वस्तु के तौर पर देखा जाता है और यह दुनिया की उस धारणा के अनुरूप है कि दीर्घकालिक फैशन वाले पोशाक को पसंद किया जाए। अख्तर इसकी लोकप्रियता में बढ़ोतरी को इसके कम आधुनिक सौंदर्यबोध को जिम्मेदार ठहराते हैं जिसके प्रति युवाओं की अपील होती है।
 
मैकिंजी ऐंड कंपनी ने दि बिजनेस ऑफ फैशन (दि स्टेट ऑफ फैशन, 2019) के साथ मिलकर जो एक रिपोर्ट लिखी है उसके मुताबिक फैशन में एक शीर्ष रुझान टिकाऊपन का भी है। रिपोर्ट में कहा गया, 'प्रतिक्रिया देने वालों की सूची में टिकाऊपन और निरंतरता सबसे अहम चुनौती है।' टिकाऊपन की खासियत रखने वाले फैब्रिक की तरफ बेहतरीन डिजाइनर प्रतिभाओं का आकर्षण होना स्वभाविक होता है। केवीआईसी ने बिना देरी किए ही बड़ी तेजी से इस बात को भुनाने की कोशिश की थी कि खादी का पर्यावरण पर कम असर होता है और इसने यह घोषणा भी की कि वैश्विक उत्पादों पर इसके शून्य प्रभाव या खराबी को सुनिश्चित करने की कोशिश होगी। उन्होंने इसके लिए कुछ आंकड़े भी दिए मसलन, एक मीटर खादी के कपड़े को तीन लीटर पानी की जरूरत है जबकि एक मीटर मिल फैब्रिक में 55 लीटर पानी लगता है। ग्राहकों और डिजाइनरों का इन पैमानों पर ध्यान गया जो प्रीमियम बाजार में अपनी पर्यावरण अनुकूल पहचान बनाना चाहते थे। सक्सेना ने कहा कि उन्होंने बेहतर डिजाइनरों का साथ लेने की कोशिश की है जिनमें वैश्विक डिजाइनर गेविन राजा से लेकर भारतीय फैशन डिजाइनर रितु बेरी तक शामिल हैं जो खादी के इस्तेमाल की वकालत करती हैं।
 
अख्तर कहते हैं कि छोटे शहरों और गांवों में खादी को एक राष्ट्रवादी विकल्प के तौर पर देखा जाता है और इसे बुजुर्ग आबादी ही तरजीह देती है। लेकिन बड़े शहरों में युवाओं का ध्यान खादी की तरफ बढ़ा है क्योंकि यह पर्यावरण अनुकूल है और आधुनिकता का एक प्रतीक है। वैश्विक स्तर पर इसकी टिकाऊ फैब्रिक की पहचान बनी है।  अख्तर कहते हैं, 'पैटागोनिया, लिवाइस, गैप और सीऐंडए जैसे वैश्विक ब्रांडों की दिलचस्पी को देखते हुए हम प्रोत्साहित हैं। वे इस श्रेणी के टिकाऊपन वाली खूबियों की तारीफ करते हैं। निश्चित तौर पर इस पर कम पर्यावरणीय असर पड़ता है और खादी के उत्पाद से गांव के दस्तकार समुदाय की आजीविका का इंतजाम होता है और वे सामाजिक और आर्थिक टिकाऊपन में योगदान देते हैं।'
 
अब भी सरकारी विभागों से काफी तादाद में ऑर्डर मिल रहे हैं और केवीआईसी आक्रामक तरीके से ब्रांडेड खादी को बढ़ावा देने में जुटी है। कंपनी का कहना है कि भारतीय रेलवे ने ऑर्डर को तेजी से बढ़ाया है और 2013-14 में इसने केवीआईसी से 3.5-4 करोड़ रुपये का माल खरीदा जबकि 2018-19 में उनका ऑर्डर 100 करोड़ रुपये का रहा। हाथ से बुने हुए धागे खुद के लिए एक वैश्विक दास्तां की पटकथा लिख रहे हैं लेकिन यह पुराने वफादारों के साथ भी अपना भरोसा बनाए हुए हैं।
Keyword: Brand, khadi, fashion,,
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