बिजनेस स्टैंडर्ड - स्वास्थ्य बीमा कंपनी बदलना है बेहद आसान
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स्वास्थ्य बीमा कंपनी बदलना है बेहद आसान

सरबजीत के सेन /  April 29, 2019

पिछले कुछ अरसे से इलाज पर खर्च जिस तरह बढ़ रहा है, वह आपकी जेब को तगड़ा झटका देने के लिए काफी है। इसलिए चिकित्सा बीमा पॉलिसी रखना अब एकदम जरूरी हो गया है। लेकिन जब भी पॉलिसी के नवीकरण यानी रीन्यूअल का वक्त आता है तो आपके मन में यह सवाल उठना लाजिमी है कि पुरानी कंपनी के साथ ही बीमा जारी रखा जाए या कंपनी बदल ली जाए यानी स्वास्थ्य बीमा पोर्ट करा लिया जाए। ऐसा सोचने की कई वजह हो सकती हैं। हो सकता है कि आप मौजूदा बीमा कंपनी से असंतुष्टï हों, उसका रीन्यूअल प्रीमियम बहुत ज्यादा हो, उसकी सेवा में कमी रही हो या आपकी परिस्थितियां बदल गई हों। मामला कुछ भी हो, अगर आप बीमा कंपनी को बदलने के बारे में सोच रहे हैं तो पॉलिसीबाजार डॉट कॉम में स्वास्थ्य बीमा के प्रमुख अमित छाबड़ा की सलाह आपके लिए कारगर हो सकती है। छाबड़ा कहते हैं, 'अच्छा तो यही है कि आप किसी बीमा एग्रीगेटर की वेबसाइट पर जाएं और विभिन्न प्रकार के विकल्पों पर नजर दौड़ाएं। अलग-अलग बीमा कंपनियों से मिल रहे फायदों, उनकी स्वास्थ्य बीमा पॉलिसी की खासियतों और प्रीमियम राशि की तुलना करना ठीक रहेगा। यदि आपको लगता है कि किसी और कंपनी के पास जाने से आपको बेहतर कवरेज मिलेगी और प्रीमियम राशि भी कम रहेगी तो आप अपनी स्वास्थ्य बीमा कंपनी बदल सकते हैं।'

 
अधिक सदस्य जोडऩा
 
उम्र बढऩे के साथ या परिवार में आश्रित सदस्यों की संख्या बढऩे के साथ ही बीमा पॉलिसी में एश्योर्ड राशि भी बढ़ाने की जरूरत हो सकती है। इसमें इजाफा रीन्यूअल के वक्त किया जा सकता है। सिग्ना टीटीके हेल्थ इंश्योरेंस के प्रबंध निदेशक और मुख्य कार्य अधिकारी प्रसून सिकदर कहते हैं, 'बड़ी संख्या में लोग या तो अपने स्वास्थ्य बीमा को किसी दूसरी कंपनी में पोर्ट करा लेते हैं या अपनी पॉलिसी में कुछ अतिरिक्त फीचर जुड़वा लेते हैं।' अगर आपको अपने स्वास्थ्य बीमा कवर में और भी परिजनों को जोडऩा है तो आप अतिरिक्त फीचरों वाला नया स्वास्थ्य बीमा खरीदने पर भी विचार कर सकते हैं।
 
पॉलिसी की शर्तों में बदलाव
 
यदि परिवार में कोई नया सदस्य जुड़ा है या पॉलिसी के दायरे में आने वाले किसी सदस्य का निधन हो गया है तो पॉलिसी की शर्तों में बदलाव करना पड़ सकता है। इससे रीन्यूअल के वक्त दिए जाने वाले प्रीमियम की राशि पर भी असर पड़ सकता है। आश्रित व्यक्तियों के ब्योरे में किसी भी तरह की तब्दीली आप पॉलिसी का नवीकरण कराते समय ही कर सकते हैं।
 
नई पॉलिसी की पेशकश
 
ऐसा भी हो सकता है कि जो स्वास्थ्य बीमा पॉलिसी आपके पास है, लगभग उसी तरह की पॉलिसी कोई दूसरी बीमा कंपनी पेश कर दे और उसका प्रीमियम आपकी पॉलिसी के प्रीमियम से कम रहे। साथ ही नई पॉलिसी में कुछ नए किस्म के फायदे भी हो सकते हैं। लेकिन सिकदर आगाह करते हैं, 'ग्राहक आम तौर पर स्वास्थ्य बीमा पॉलिसी को उस समय किसी दूसरी कंपनी में ले जाते हैं यानी पोर्ट करते हैं, जब पॉलिसी बहुत महंगी पड़ रही होती है या अस्पताल के कमरे के किराये की सीमा या अपनी जेब से भी भुगतान (को-पे) जैसी बंदिशें लग जाती हैं। ग्राहक कम प्रीमियम देखकर भी दूसरी कंपनी का रुख कर सकता है, लेकिन ऐसे मामलों में खबरदार रहना चाहिए क्योंकि अक्सर प्रीमियम कम होने पर बीमा कवरेज का दायरा भी कम हो जाता है।'
 
मगर एक पेच यह भी है कि एक जैसी स्वास्थ्य बीमा पॉलिसियों को ही पोर्ट किया जा सकता है। सिकदर समझाते हैं, 'जो लोग समूह स्वास्थ्य बीमा पॉलिसी के तहत आते हैं और अपनी समूह पॉलिसी को छोड़कर व्यक्तिगत बीमा पॉलिसी लेना चाहते हैं तो उन्हें सबसे पहले अपनी पुरानी बीमा कंपनी में ही व्यक्तिगत बीमा पॉलिसी लेनी होगी। उसके बाद वह अपनी पॉलिसी को किसी दूसरी कंपनी में पोर्ट करा सकते हैं।' आपके सामने किसी भी तरह की मजबूरी हो, आपको अपनी पॉलिसी का रिन्यूअल तय वक्त पर ही करा लेना चाहिए और निश्चित समय सीमा के भीतर ही पॉलिसी को पोर्ट कराने की प्रक्रिया भी पूरी कर लेनी चाहिए। अगर आप अपना रिन्यूअल प्रीमियम वक्त पर नहीं चुकाते हैं तो आपकी पॉलिसी खत्म हो जाती है और आपको कई तरह का खमियाजा भुगतना पड़ सकता है मसलन नो-क्लेम बोनस और प्रतीक्षा अवधि जैसे तमाम फायदे आपको गंवाने पड़ सकते हैं।
Keyword: health, hospital, insurance,,
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