बिजनेस स्टैंडर्ड - 'मझोले एवं छोटे शेयर लग रहे आकर्षक'
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'मझोले एवं छोटे शेयर लग रहे आकर्षक'

पुनीत वाधवा /  April 28, 2019

चुनाव नतीजों से जुड़ी अनिश्चितताएं बाजार का उत्साह ठंडा करने में नाकाम रही हैं। इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि एसऐंडपी बीएसई सेंसेक्स और निफ्टी 50 नए स्तर छू चुके हैं। बीएनपी पारिबा में एशिया-पैसिफिक इक्विटी स्ट्रैटेजिस्ट मनीषी रायचौधरी का मानना है कि मध्यम अवधि में बाजार में निवेश पर वैश्विक केंद्रीय बैंकों की मौद्रिक नीति से जुड़ी गतिविधियां घरेलू राजनीतिक हलचलों के मुकाबले अधिक भारी पड़ेंगी। पुनीत वाधवा ने उनसे कई अहम मुद्दों पर बात की। प्रमुख अंश:

 
बाजार में निकट अवधि में कैसी संभावनाएं देख रहे हैं?
 
मध्यम अवधि के लिहाज से भारतीय शेयर बेहतर दिख रहे हैं। निकट अवधि की बात करें तो हालिया तेजी के बाद बाजार में कुछ समय के लिए गतिविधियां शांत रह सकती हैं। चुनाव के कारण अनिश्चितता बढऩे पर निवेशकों को भारत में निवेश बढ़ाना चाहिए, हालांकि त्रिशंकु लोकसभा और अलग-अलग सोच रखने वाले दलों की गठबंधन सरकार बनने की स्थिति में ऐसा करना हितकर नहीं होगा। वैसे गठबंधन सरकार की संभावना काफी कम लग रही है।
 
चुनाव नतीजे चकित करने वाले रहे तो क्या आप एसऐंडपी बीएसई सेंसेक्स के लिए दिसंबर के लक्ष्य में संशोधन करेंगे? 
 
हमने 2019 के लिए एसऐंडपी बीएसई सेंसेक्स का लक्ष्य 42,000 तक कर दिया है, साथ ही एशिया (जापान को छोड़कर) पोर्टफोलियो में भारतीय शेयरों को लेकर खासा उत्साह दिखाया है। निजी क्षेत्र से पूंजीगत व्यय में सुधार और पूंजी लागत में कमी इसकी प्रमुख वजह रही है। अगर नतीजे अनुमान के उलट नहीं रहे तो चुनाव नतीजों का भारतीय बाजारों पर अस्थायी असर होगा। 
 
किन कारणों से बाजार में गिरावट आ सकती है?
 
वैश्विक आर्थिक वृद्धि दर, खासकर यूरोपीय क्षेत्र और अमेरिका के लिहाज से, कमजोर रही तो बिकवाली से इनकार नहीं किया जा सकता है। इसके साथ ही अमेरिका और चीन के व्यापारिक मतभेद जल्द दूर होने की उम्मीदों पर भी पानी फिर सकता है। प्रतिकूल चुनाव नतीजे और उपभोक्ताओं का ठंडा मिजाज सबसे बड़े जोखिम कहे जा सकते हैं।
 
मझोले और छोटे शेयरों को लेकर आपका क्या नजरिया है? 
 
2018 में कमजोर प्रदर्शन के बाद मझोले एवं छोटे शेयर एक साल पहले के मुकाबले अपेक्षाकृत अधिक आकर्षक लग रहे हैं। हालांकि सभी मझोले एवं छोटे शेयरों के बारे में ऐसा कहना मुश्किल है, क्योंकि हरेक का कारोबारी ढांचा अलग होता है और वृद्धि से जुड़ी संभावनाएं भी भिन्न होती हैं। आकर्षक कारोबार और अच्छी कारोबारी संभावनाओं वाले मझोले शेयर वित्तीय, स्वास्थ्य और औद्योगिक क्षेत्रों में अधिक हैं। 
 
भारतीय शेयरों में विदेशी निवेश की कैसी संभावनाएं लग रही हैं?
 
मध्यम अवधि में दुनिया के केंद्रीय बैंकों का मौद्रिक नीतियों को लेकर रुख घरेलू राजनीतिक हलचलों के मुकाबले अधिक मायने रखेगा। फिलहाल केंद्रीय बैंकों का रुख आक्रामक नहीं लग रहा है। ऐसा लगता है कि अमेरिकी फेडरल रिजर्व दरों में 2020 तक कोई बदलाव नहीं करेगा। चुनाव नतीजे भी भारत में रकम के प्रवाह पर असर छोड़ते हैं, लेकिन यह सीमित अवधि के लिए ही होता है। चुनाव नतीजे सकरात्मक रहने से देश में रकम का प्रवाह थोड़ा बढ़ा था, लेकिन यह स्थिति भी महज डेढ़ से दो महीने के लिए ही रही। 
 
मार्च 2019 तिमाही में कमाई को लेकर आपकी क्या अपेक्षाएं हैं?
 
वित्त वर्ष 2020 के लिए वृहद भारतीय सूचकांकों की कंपनियों के लिए कमाई दर 13 से 16 प्रतिशत रह सकती है। 18 से 19 प्रतिशत का ब्लूमबर्ग का मौजूदा अनुमान थोड़ा अधिक लग रहा है। मार्च 2019 तिमाही और उसके बाद भी वित्तीय क्षेत्र के परिणाम शानदार रह सकते हैं, जबकि आईटी, मटीरियल्स और वाहन क्षेत्रों का प्रदर्शन कमजोर रह सकता है।  
 
निवेशकों को बैंकिंग एवं वित्त खंड में कैसा रवैया अपनाना चाहिए?
 
वित्तीय क्षेत्र में और समेकन दिख सकता है। कई ऐसे बैंक हैं, जिन्हें कारोबार बढ़ाने के लिए पूंजी की जरूरत है और कई एनबीएफसी भी हैं, जिन्हें कारोबार में विविधता लाने के लिए बैंकिंग लाइसेंस की दरकार है। बैंक विलय और अधिग्रहण की संभावनाएं तलाश रहे हैं। हमें निजी बैंक (खुदरा एवं कॉर्पोरेट कर्जदाता) भा रहे हैं जबकि एनबीएफसी खंड में कंज्यूमर फाइनैंस में भी संभावनाएं दिख रही हैं। 
 
अगले 12 से 24 महीने के लिहाज से वाहन शेयर खरीदना अच्छा दांव होगा?
 
इतनी अवधि के लिए कुछ चुनिंदा वाहन कंपनियों पर दांव खेला जा सकता है, खासकर ऐसे शेयरों में निवेश फायदेमंद हो सकता है, जिनकी बाजार हिस्सेदारी और वितरण नेटवर्क मजबूत है या अपने खंडों में आगे चल रही हैं। निकट अवधि में मांग में कमी और सुरक्षा एवं नए उत्सर्जन नियमों के कारण लागत बढऩे से वाहन खंड का प्रदर्शन प्रभावित हो सकता है। 
 
क्या आरबीआई दरों में और कटौती कर सकता है?
 
बाजार कमजोर मॉनसून और महंगाई पर इसके संभावित असर को लेकर चिंतित नहीं है। मोटे तौर पर यही माना जा रहा है कि आबीआई जून या अगस्त में दरें एक बार और घटा सकता है। पिछले कुछ वर्षों के दौरान बारिश और कृषि उत्पादन साथ ही कृषि उत्पादों के बीच आपसी संबंध सीधा नहीं रह गया है। हालांकि ग्रामीण क्षेत्रों में खराब हालत और वर्षा का वितरण असमान रहने से मांग पर और असर पड़ सकता है। 
Keyword: share, market, sensex, बीएसई, कंपनी, शेयर,,
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