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मार्च तिमाही में एसीसी से आगे निकली अल्ट्राटेक

उज्ज्वल जौहरी /  April 28, 2019

मार्च 2019 तिमाही में अल्ट्राटेक का प्रदर्शन उम्मीद से बेहतर रहा है। एसीसीसी सीमेंट के कमजोर प्रदर्शन के बाद परेशान बाजार को भी इससे खासी तसल्ली मिली है। बुधवार को अल्ट्राटेक शेयर का कारोबार शुरू में कमजोर जरूर था, लेकिन बाद में यह 5 प्रतिशत तेजी के साथ बंद हुआ, जबकि एसीसी के शेयर ने 3 प्रतिशत से थोड़ी अधिक छलांग लगाई। अल्ट्राटेक की बिक्री घरेलू बाजार में सालाना 16 प्रतिशत दर से बढ़ी है। यह आंकड़ा मार्च तिमाही में एसीसी के 5.6 प्रतिशत के मुकाबले कहीं अधिक रहा। दोनों ही कंपनियों का देश के सीमेंट बाजार में खासा बोलबाला है और केवल अल्ट्राटेक की बात करें तो पिछले कुछ वर्षों में इसने क्षमता विस्तार पर जोर दिया है। इससे मांग की हालत अच्छी रहने पर कंपनी की बिक्री बढ़ रही है। एसीसी ने मोटे तौर पर क्षमता विस्तार सीमित रखा है और इस दिशा में जो पहल की है वह केवल पूर्वी भारत में ही सीमित है। 

 
अल्ट्राटेक के मुकाबले एससीसी का कारोबार कमजोर रहा। एसीसी की शुद्ध बिक्री सालाना आधार पर 8.2 प्रतिशत बढ़कर 3,850 करोड़ रुपये रही। बाजार कम से कम 3,946 करोड़ रुपये आंकड़ा दर्ज होने की उम्मीद कर रहा था। कंपनी की प्रति टन प्राप्तियां भी उम्मीद से कम रहीं और 4,690 रुपये की दर से इनमें सालाना आधार पर 1.4 प्रतिशत और क्रमागत आधार पर 1.2 प्रतिशत की मामूली तेजी आई। चूंकि, एसीसी का ज्यादातर कारोबार पूर्वी क्षेत्र में हुआ, इसलिए इसकी की कुल प्राप्तियां अधिक नहीं रहीं।  
 
इस वजह से एसीसी का परिचालन प्रदर्शन भी अपेक्षाओं पर खरा नहीं उतरा। विश्लेषकों का मानना है कि कच्चे माल से संयंत्रों की दूरी और कोयला आपूर्ति में कमी से परिचालन लागत प्रभावित हुई है। इस वजह से मार्च तिमाही में कंपनी की कर एवं ब्याज पूर्व आय (ईबीआईटीडीए) सालाना आधार पर 9 प्रतिशत और क्रमागत आधार पर 21 प्रतिशत तेजी के साथ 461.5 करोड़ रुपये रही। यह आंकड़ा ब्लूमबर्ग के 597 करोड़ रुपये के अनुमान से कम रहा। रिलायंस सिक्योरिटीज के विश्लेषकों के अनुसार कंपनी का प्रति टन मुनाफा 589 करोड़ रुपये रहा, जो एक साल पहले 573 और पिछली तिमाही में 513 रुपये के मुकाबले बहुत अधिक नहीं कहा जा सकता। तुलनात्मक रूप से सभी मोर्चों पर अल्ट्राटेक का प्रदर्शन एसीसी के मुकाबले बेहतर रहा। अल्ट्राटेक का प्रति टन मुनाफा सालाना आधार पर 12.7 प्रतिशत तेजी के साथ 1,039 रुपये रहा। 
 
अल्ट्राटेक की कर एवं ब्याज पूर्व आय सालाना आधार पर 30 प्रतिशत उछलकर 2,213 करोड़ रुपये हो गई। वैसे कंपनी की प्रति टन लागत (बिजली, ईंधन और कच्चे माल पर आने वाला खर्च शामिल) मोटे तौर पर सपाट रही, लेकिन प्रति टन माल भाड़े में कमी (सालाना आधार पर 7.6 प्रतिशत प्रति टन) और अन्य खर्चों में नरमी (सालाना आधार पर 7 प्रतिशत कमी) से प्रति टन परिचालन खर्च के मोर्चे पर खासी राहत मिली। अल्ट्राटेक ने कुछ अधिग्रहण किए हैं, जिनका इसे लाभ मिल रहा है और कमाई पर असर साफ तौर पर देखा जा सकता है। 2017-18 में जेपी एसोसिएट्स से सालाना 2.12 करोड़ टन क्षमता के संयंत्र के अधिग्रहण के बाद इसकी कुल क्षमता में इजाफा हुआ है। 
 
अल्ट्राटेक ने नाथद्वारा संयंत्र भी खरीदा है, जो पहले बिनानी सीमेंट के पास था। इसकी स्थापित क्षमता 62.5 लाख टन सालाना है और कंपनी इसका प्रदर्शन सुधारने पर भी काम कर रही है। काफी हद तक क्षमता विस्तार करने के बाद कंपनी की उपयोगिता क्षमता मार्च तिमाही में बढ़कर 72 प्रतिशत हो गई, जो दिसंबर तिमाही में 50 प्रतिशत थी। आलोच्य तिमाही में पेटकोक का इस्तेमाल बढऩे और खर्च कम करने के अन्य उपायों से औसत उत्पादन लागत में नाथद्वारा संयंत्र के अधिग्रहण के बाद 200 रुपये प्रति टन की कमी आई है। 
 
अल्ट्राटेक की कर एवं ब्याजू पर्र्व आय प्रति टन पिछली तिमाही के 740 रुपये प्रति टन से बढ़कर कर 830 रुपये प्रति टन हो गई। कंपनी उपयोगिता बढ़ाकर 80 प्रतिशत करने और खर्च में प्रति टन 50 रुपये कमी करने की दिशा में काम कर रही है। अल्ट्राटेक बहीखाते पर कर्ज भी कम करने का प्रयास कर रही है। मार्च तिमाही में इसने क्रियाशील पूंजी की आवश्यकताएं 900 करोड़ रुपये तक कम कर दीं और अपने कर्ज में 0.73 गुना की कमी की। अल्ट्राटेक के नतीजों के बाद रिलायंस सिक्योरिटीज के विनोद मोदी ने कहा कि शेयर को लेकर उनका रवैया सकारात्मक है। एसीसी की बात करें तो ग्रामीण बाजारों में इसकी उपस्थिति मजबूत है और महंगे उत्पादों पर लगातार जोर दिए जाने से इसका परिचालन प्रदर्शन सुधर सकता है और इसके प्रमुख बाजारों में इसकी प्राप्तियां बढ़ सकती हैं। 
Keyword: ultratec, cement,,
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