बिजनेस स्टैंडर्ड - सूचनाओं के खुलासे से बढ़ेगी बैंकों की चिंता!
 Search  BS Hindi  Web   BS E-Paper|      Follow us on 
Business Standard
Sunday, May 26, 2019 01:31 PM     English | हिंदी

होम

|

बाजार

|

कंपनियां

|

अर्थव्यवस्था

|

मुद्रा

|

विश्लेषण

|

निवेश

|

जिंस

|

क्षेत्रीय

|

विशेष

|

विविध

|

अर्थनामा

 
होम मुद्रा खबर

सूचनाओं के खुलासे से बढ़ेगी बैंकों की चिंता!

अनूप रॉय और अभिजित लेले / मुंबई April 28, 2019

बैंकों और विश्लेषकों को आशंका है कि सूचना के अधिकार (आरटीआई) कानून के तहत बैंकों की गोपनीय सालाना जांच रिपोर्टों का खुलासा करने के लिए सर्वोच्च न्यायालय द्वारा आरबीआई को दिए गए आदेश से समस्याएं बढ़ सकती हैं और इससे कानूनी मामलों में इजाफा हो सकता है। सालाना जांच रिपोर्ट मुख्य तौर पर किसी बैंक की सॉल्वेंसी, तरलता और परिचालन सेहत पर ध्यान केंद्रित किया जाता है। यह रिपोर्ट पूंजी पर्याप्तता, परिसंपत्ति गुणवत्ता, प्रबंधन, आय, तरलता के साथ साथ प्रणाली और नियंत्रण के बारे में जानकारी देती है। यदि केंद्रीय बैंक इसे सही पाता है तो वह उस खाते की गहरी जांच कर सकता है, जो बैंक की बैलेंस शीट को प्रभावित करने के लिए जिम्मेदार है। इसलिए, ऐसी रिपोर्टों में ग्राहक भुगतान रिकॉर्ड और अन्य गोपनीय सूचना समेत सभी विवरण के साथ साथ केंद्रीय बैंक द्वारा जताई गई आपत्ति एवं जांच के विवरण भी होते हैं। 
 
सर्वोच्च न्यायालय ने शुक्रवार को केंद्रीय बैंक को आरटीआई के तहत संबद्घ जानकारी का खुलासा नहीं करने के लिए फटकार लगाई। आरबीआई ने बैंकों के साथ विश्वास के संबंधों का हवाला देते हुए इस तरह की जानकारी का खुलासा नहीं किया था। सर्वोच्च न्यायालय का कहना है कि केंद्रीय बैंक की बैंकों के प्रति ऐसी कोई जिम्मेदारी नहीं है और वह जांच रिपोर्टों तथा अन्य सामग्री से संबंधित सभी सूचनाएं देने के लिए बाध्य है। दो जजों के पीठ ने कहा, 'किसी तरह के अन्य उल्लंघन को इस अदालत द्वारा गंभीर समझा जाएगा।'
 
हालांकि बैंक अपने ग्राहकों के साथ गैर-खुलासा समझौते करते हैं और इनका उल्लंघन कानूनी उल्लंघन है। बैंकों की कानूनी टीमें अब यह स्पष्ट करने की कोशिश करेंगी कि केंद्रीय बैंक द्वारा खुलासा उन्हें पब्लिक डोमेन में ग्राहक जानकारी जारी करने की जिम्मेदारी से वंचित करता है। एक निजी बैंक के अधिकारी ने कहा, 'चूंकि मामला आरबीआई से जुड़ा हुआ है, जो कि सूचना का खुलासा करेगा और इसलिए हम उसे अदालत में चुनौती नहीं दे सकते। लेकिन दूसरी तरफ, ग्राहक को ऋणों के बारे में हमारे आकलन के बारे में जानकारी होगी, जो अब तक सिर्फ प्रबंधन तक ही सीमित है।'
 
इस स्थिति में, ग्राहक बैंक और केंद्रीय बैंक दोनों को लंबी कानूनी लड़ाई में घसीट सकता है। एक वरिष्ठ बैंकर के अनुसार, इन खुलासों का बैंकिंग उद्योग पर व्यापक प्रभाव पड़ेगा। आरबीआई की निगरानी रिपोर्टें स्वाभाविक तौर पर नकारात्मक हैं, क्योंकि ये खामियों, नियमों और कानूनों के उल्लंघन पर ध्यान केंद्रित करती हैं। सार्वजनिक क्षेत्र के दो वरिष्ठ बैंकरों के अनुसार पब्लिक डोमेन में रिपोर्ट बैंकिंग इकाइयों के लिए लाभदायक नहीं होगी।  इस अदालती फैसले पर आरबीआई की तरफ से फिलहाल कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है, पर केंद्रीय बैंक की कार्य प्रणाली की जानकारी रखने वाले एक अधिकारी ने कहा कि जब कानून के दो प्रावधान एक-दूसरे के विरोधाभासी दिखते हैं तो दोनों की ताकत मजबूत समझी जाती है। इस मामले में, सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय को प्रमुखता से देखना होगा।  अदालती फैसले का यह भी मतलब है कि आरबीआई रिपोर्ट का संशोधित संस्करण पेश नहीं कर सकेगा, उससे पूरी रिपोर्ट पेश करने को कहा जा सकता है। निश्चित तौर पर सूचनाओं के साझाा किए जाने को लेकर केंद्रीय बैंक सहज महसूस नहीं करेगा। 
Keyword: bank, loan, debt, RBI, NPA, RTI,,
Advertisements
  Cover from Earthquake & Floods. Buy Home Insurance
   Get seamless access to Business Standard & WSJ.com starting at just Rs. 49/- per month*
Display Name  Email-Id  
Post your comment

CAPTCHA Image Reload Image Enter Code*:
  आपका मत
 क्या एनबीएफसी पर मसौदा परिपत्र से कम होंगी मुश्किलें?
हां नहीं  
पढ़िये
ईमेल
About us Authors Partner with us Jobs@BS Advertise with us Terms & Conditions Contact us RSS Site Map  
Business Standard Private Ltd. Copyright & Disclaimer feedback@business-standard.com
This site is best viewed with Internet Explorer 6.0 or higher; Firefox 2.0 or higher at a minimum screen resolution of 1024x768
* Stock quotes delayed by 10 minutes or more. All information provided is on "as is" basis and for information purposes only. Kindly consult your financial advisor or stock broker to verify the accuracy and recency of all the information prior to taking any investment decision. While due diligence is done and care taken prior to uploading the stock price data, neither Business Standard Private Limited, www.business-standard.com nor any independent service provider is/are liable for any information errors, incompleteness, or delays, or for any actions taken in reliance on information contained herein.