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वित्त वर्ष व्यवस्था में बदलाव के प्रस्ताव पर हो रहा विचार

श्रीमी चौधरी / नई दिल्ली April 26, 2019

राजस्व विभाग ने आयकर विभाग से सालाना बजट में कर व्यवस्था में बदलाव के लिए प्रस्ताव मांगा है। सालाना बजट नई सरकार के गठन के बाद जुलाई में पेश किया जाएगा। 24 अप्रैल को भेजे अपने पत्र में विभाग ने कर अधिकारियों से 2019-20 की आगामी बजट चर्चाओं के दौरान इस पर 15 मई तक अपने सुझाव देने को कहा गया है।

कर अधिकारियों के अनुसार, कुछ सुझावों पर चर्चा की गई है और बजट-पूर्व परामर्श के तौर पर विभाग द्वारा सुझाव दिया जाएगा। अधिकारियों का कहना है कि नौकरशाहों ने प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष करों, दोनों के लिए कर नीतियों, विश्लेषणों और नियमों को लेकर माथापच्ची शुरू कर दी है।

प्रमुख सुझावों में से एक है वित्त वर्ष को कैलेंडर वष के साथ समाप्त किया जाना। अधिकारियों का कहना है कि यदि भाजपा सत्ता में आती है तो वह वित्त वर्ष (अप्रैल-मार्च) को कैलेंडर वर्ष (जनवरी-दिसंबर) में तब्दील कर सकती है। हालांकि, इससे कई तरह के परिचालन चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है और मौजूदा व्यवस्था को बदलने से पहले पर्याप्त समय दिया जाना चाहिए। यदि इसमें बदलाव होता है तो इससे 150 वर्ष पुरानी ब्रिटिश प्रणाली समाप्त हो जाएगी। 

इस संबंध में एक बार प्रस्ताव नीति आयोग के साथ बैठक में पेश किया गया था। मोदी सरकार ने अपने मौजूदा कार्यकाल में वित्त वर्ष को कैलेंडर वर्ष में तब्दील करने के लिए एक समिति का भी गठन किया था। प्रत्यक्ष कर संहिता पर लंबे समय से प्रतीक्षित रिपोर्ट भी 31 मई तक सौंप दिए जाने की संभावना है। रिपोर्ट में पूरी कराधान व्यवस्था को सुगम बनाने के लिए कई नई कर नीतियां शामिल होंगी।

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