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एस्सेल, आईएलऐंडएफएस में निवेश से एफएमपी के पुनर्भुगतान में चुनौती

जश कृपलानी / मुंबई April 26, 2019

संकटग्रस्त कंपनियों के साथ म्युचुअल फंड उद्योग की समस्या अभी खत्म नहीं हुई है। एस्सेल और इन्फ्रास्ट्रक्चर लीजिंग ऐंड फाइनैशियल सर्विसेज (आईएलऐंडएफएस) जैसे समूहों में निवेश वाली 44 एमएफपी (फिक्स्ड मैच्योरिटी प्लान) योजनाएं अगले कुछ महीनों और अगले साल जून तिमाही के बीच परिपक्व होने वाली हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि अन्य दबावग्रस्त समूहों के मुकाबले एस्सेल और आईएलऐंडएफएस में पुनर्भुगतान को लेकर कहीं अधिक चिंता दिख रही है। दोनों समूहों की कंपनियों में इन एमएफपी योजनाओं का निवेश 1,300 करोड़ रुपये से अधिक का है।

फंड्सइंडिया की प्रमुख (एमएफ अनुसंधान) विद्या बाला ने कहा, 'आईएलऐंडएफएस समूह से संबंधित सभी कंपनियों के लिए म्युचुअल फंडों को अभी तक पूरी रकम नहीं मिली है। साथ ही म्युचुअल फंडों द्वारा वसूली की अनुमानों के आधार पर एस्सेल ग्रुप में निवेश पर कोई मार्कडाउन नहीं लिया गया है।' यदि दीवान हाउसिंग फाइनैंस (डीएचएफएल) समूह और अनिल अंबानी समूह में किए गए निवेश को लिया जाए तो एफएमपी योजनाओं का निवेश बढ़कर 1,600 करोड़ रुपये हो जाएगा। साथ ही एफएमपी की संख्या बढ़कर 79 हो जाएगी।

विश्लेषकों के अनुसार, भुगतान में देरी होने अथवा इन समूहों की कंपनियों की कमजोर वित्तीय सेहत के कारण यदि रेटिंग घटाई जाती है तो एफएमपी एवं अन्य ऋण योजनाओं के निवेशकों को नुकसान होगा। क्रेडिट सूइस के विश्लेषकों ने एक हालिया नोट में कहा है, 'एफएमपी के बाहर भी म्युचुअल फंडों का इन समूहों में काफी निवेश है जो करीब 18,100 करोड़ रुपये तक हो सकता है। यदि रेटिंग घटाई गई तो इन योजनाओं में मार्कडाउन हो सकता है जिससे अंतत: निवेशकों को उनके निवेश पर नुकसान होगा।'

अगले साल जून तक परिपक्व होने वाले एफएमपी का 80 फीसदी निवेश एस्सेल समूह की कंपनियों में किया गया है। वैल्यू रिसर्च के आंकड़ों के अनुसार, एफएमपी निवेश के लिहाज से दूसरा सबसे बड़ा समूह डीएचएफएल है जहां करीब 272 करोड़ रुपये का निवेश किया गया है। इसके बाद 6 करोड़ रुपये के निवेश के साथ आईएलऐंडएफएस और 14 करोड़ रुपये के निवेश के साथ अनिल अंबानी समूह का स्थान है। म्युचुअल फंडों को चालू तिमाही के दौरान भी कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है। क्रेडिट सुइस के विश्लेषकों ने कहा, 'दबावग्रस्त समूहों में निवेश का एक बड़ा हिस्सा (56 फीसदी) जून 2019 तक परिपक्व होने वाला है।'

वैल्यू रिसर्च के आंकड़ों के अनुसार, इन दबावग्रस्त समूहों में डेट योजनाओं का कुल निवेश 17,000 करोड़ रुपये से अधिक है। सबसे अधिक 7,427 करोड़ रुपये का निवेश डीएचएफएल में है। एस्सेल समूह में 6,779 करोड़ रुपये का निवेश और अनिल अंबानी समूह में 2,058 करोड़ रुपये का निवेश है। जबकि शेष निवेश आईएलऐंडएफएस समूह में किया गया है। विशेषज्ञों ने कहा कि मार्कडाउन के जोखिम के अलावा दबावग्रस्त पत्रों में डेट योजनाओं के निवेश पर भी जोखिम दिख सकता है।

बाला ने कहा, 'यदि इन योजनाओं को बड़े पैमाने पर भुनाया गया तो आईएलऐंडएफएस अथवा एस्सेल समूह की कंपनियों से संबंधित दबावग्रस्त पत्रों में ओन-एंडेड योजनाओं पर जोखिम बढ़ सकता है।' एक फंड मैनेजर ने अपनी पहचान जाहिर न करने की शर्त पर कहा, 'भुनाने के दबाव को झेलने के लिए फंड मैनेजर आमतौर पर परिसंपत्तियों की बिक्री खत्म कर देते हैं।' इस महीने के आरंभ में कोटक एमएफ और एचडीएफसी एमएफ एस्सेल समूह की कंपनियों में निवेश से संबंधित एफएमपी योजनाओं के परिपक्व होने पर निवेशकों को अपेक्षित रकम देने में विफल रहे थे।

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