बिजनेस स्टैंडर्ड - श्रीलंका धमाकों से भड़की काली मिर्च
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श्रीलंका धमाकों से भड़की काली मिर्च

टीई नरसिम्हन / चेन्नई April 26, 2019

सप्ताहांत के दौरान श्रीलंका में शृंखलाबद्ध बम धमाकों के बाद भारत में काली मिर्च के दाम उछलकर 350 रुपये प्रति किलोग्राम से अधिक हो चुके हैं। दामों में आगे और इजाफा होने के आसार हैं क्योंकि इस पड़ोसी देश से आयात में कमी आने की संभावना है। घरेलू काली मिर्च उत्पादकों के अनुसार 2019 में दाम गिरकर 300 रुपये हो चुके थे जबकि 2018 में दाम 400 रुपये थे। पिछले पांच वर्षों में सबसे ज्यादा दाम 2015 में रहे। तब इसके दाम लगभग 700 रुपये प्रति किलोग्राम थे। इसके बाद श्रीलंका के जरिये वियतनाम से काली मिर्च आयात के कारण दामों में गिरावाट आने लगी थी। वियतनाम से आने वाली इस काली मिर्च से घरेलू दाम प्रभावित होते रहे हैं।

श्रीलंका से आयात की जाने वाली काली मिर्च पर दक्षिण एशियाई मुक्त व्यापार समझौते (सॉफ्टा) के तहत आठ प्रतिशत शुल्क लगता है जबकि 2,500 टन की मात्रा पर कोई शुल्क नहीं लगता है। श्रीलंका में काली मिर्च के कारोबारी 2,500 डॉलर से लेकर 2,800 डॉलर प्रति टन की दर से वियतनाम की काली मिर्च का निर्यात करते हैं जो लगभग 200-220 रुपये प्रति किलोग्राम बैठती है।

कर्नाटक प्लांटर्स एसोसिएशन के सदस्य और काली मिर्च के प्रमुख किसानों में शुमार रोहन कोलैको ने कहा कि वियतनाम मूल की काली मिर्च को श्रीलंका मूल की मिर्च के रूप में बताया जाता है और इसे भारत को बेच दिया जाता है। हालांकि वे 500 रुपये मांगते हैं लेकिन इसे 220-240 रुपये की दर पर बेच दिया जाता है। रोहन कहते हैं कि आयातित काली मिर्च बेहतर गुणवत्ता वाली नहीं होती लेकिन औसत स्वीकार्य गुणवत्ता देने के लिए उसेभारतीय काली मिर्च के साथ मिला दिया जाता है।

काली मिर्च उत्पादक और खरीदारों का कहना है कि पिछले सप्ताहांत श्रीलंका में शृंखलाबद्ध बम धमाकों और स्थानीय सरकार द्वारा आपातकाल की घोषणा किए जाने के बाद आयात में गिरावट आनी शुरू हो गई है जिससे काली मिर्च के घरेलू दामों में 20 रुपये तक इजाफा हो गया है और अगले तीन महीनों में 30 रुपये तक का और इजाफा होने की संभावना है।

एक खरीदार ने कहा कि चूंकि दामों में और इजाफा होने की संभावना है इसलिए बहुत-से खरीदार दो महीने पहले (जून में डिलिवरी के लिए) भुगतान (आज के दामों पर) कर रहे हैं। किसानों का कहना है कि उनकी उत्पादन लागत करीब 350 रुपये है और उन्हें मौजूदा दामों से कुछ राहत मिलने की उम्मीद है। अगर आयात में आगे और कमी आती है तो इससे दामों में इजाफा होगा क्योंकि इस साल मौसम परिवर्तन के कारण काली मिर्च के सबसे बड़े उत्पादक राज्यों में से एक केरल की उपज में कमी आने की आशंका है।

हालांकि पिछले साल का उत्पादन 60,000 से 70,000 टन के आस-पास रहने का अनुमान है लेकिन इस साल यह 50,000 टन से भी कम रहने के आसार हैं जबकि घरेलू खपत लगभग 17,700 टन और निर्यात लगभग 17,000 टन रहने की संभावना है। इंडियन पेपर ऐंड स्पाइस ट्रेडर्स, ग्रोवर्स, प्लांटर्स कंसोर्टियम (केरल खंड) के समन्वयक किशोर शामजी ने कहा कि असामान्य गर्म और आर्द्र मौसम ने खेती पर असर डाला है जो पिछले साल की बाढ़ के कारण पहले से ही प्रभावित है।

Keyword: Black Pepper, Grovers, Kerala, Srilanka, Terror Attack, bomb blast,
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