बिजनेस स्टैंडर्ड - डिजिटल भविष्य
 Search  BS Hindi  Web   BS E-Paper|      Follow us on 
Business Standard
Friday, July 19, 2019 07:27 AM     English | हिंदी

होम

|

बाजार

|

कंपनियां

|

अर्थव्यवस्था

|

मुद्रा

|

विश्लेषण

|

निवेश

|

जिंस

|

क्षेत्रीय

|

विशेष

|

विविध

|

अर्थनामा

 
होम विशेष खबर

डिजिटल भविष्य

संपादकीय /  April 26, 2019

कई मायनों में काफी निचले स्तर पर आ चुके और हकीकत से दूर के गलत आख्यानों को बढ़ावा देने के लिए याद रखे जाने लायक इस चुनावी मौसम में मोदी सरकार डिजिटल रूप से संबद्ध देश की दिशा में महत्त्वपूर्ण प्रगति का दावा कर सकती है। मैकिंजी ग्लोबल इंस्टीट्यूट की तरफ से तैयार रिपोर्ट 'डिजिटल इंडिया: टेक्नोलॉजी टू ट्रांसफॉर्म ए कनेक्टेड नेशन' में यह तथ्य उभरकर सामने आता है।

इंटरनेट उपभोक्ताओं की संख्या के लिहाज से भारत (56 करोड़) अब चीन के बाद दूसरे स्थान पर आ चुका है। वर्ष 2018 में भारत के स्मार्टफोन धारकों ने 12.3 अरब ऐप डाउनलोड किए थे। किसी भी देश की तुलना में सोशल मीडिया पर सबसे ज्यादा वक्त भारतीय ही बिताते हैं। इंडोनेशिया को छोड़कर किसी भी अन्य देश की तुलना में भारत सबसे तेजी से डिजिटल हो रहा है और अब भी इसके विस्तार की काफी गुंजाइश है। प्रति व्यक्ति आय के तुलनात्मक स्तर पर कोई भी देश इन पैमानों पर समान दायरे में नहीं दिखता है।

यह स्थिति किस वजह से आई है? अगर इसका संक्षिप्त जवाब दें तो आधार, जियो, जनधन और वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) इसके लिए जिम्मेदार हैं। जीएसटी लागू होने के बाद 1.03 करोड़ कारोबारी इकाइयां कर-भुगतान के डिजिटल मंच पर आ चुकी हैं। मैकिंजी रिपोर्ट कुछ सुविदित तथ्यों का भी जिक्र करती है। मसलन, इंटरनेट डेटा की लागत वर्ष 2013 के बाद से 95 फीसदी कम हो चुकी है जबकि फिक्स्ड लाइन पर डाउनलोड की रफ्तार चौगुनी हो चुकी है। इसके चलते प्रति व्यक्ति मोबाइल डेटा उपभोग सालाना 152 फीसदी बढ़ चुका है। इसके अलावा अपेक्षाकृत गरीब राज्य भी संपन्न राज्यों के साथ डिजिटल खाई पाटने में लगे हुए हैं। अकेले उत्तर प्रदेश की ऑनलाइन आबादी करीब 3.6 करोड़ बढ़ी है। कस्बों एवं गांवों में रहने वाले बेहद सामान्य लोग भी अब ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर जाकर खबरें देखते हैं, दोस्तों से बात करते हैं, पैसों का लेनदेन करते हैं, फिल्में देखते हैं और खरीदारी करते हैं। इन सभी बातों को एक साथ रखकर देखें तो यह किसी कायाकल्प से कम नहीं है। मोदी सरकार को इस शब्द का इस्तेमाल कई मायनों में पसंद है। 

नौकरियों समेत कई क्षेत्रों पर डिजिटलीकरण के वृहद-आर्थिक असर होते हैं। लेकिन रिपोर्ट में कहा गया है कि डिजिटल अर्थव्यवस्था में वर्ष 2025 तक 6-6.5 करोड़ रोजगार अवसर पैदा होंगे जो इसकी वजह से संकट में आए करीब 4-4.5 करोड़ नौकरियों से 2 करोड़ अधिक ही होगा। कृषि कार्यों में इस्तेमाल होने वाले उत्पादों का प्रभावी उपयोग होने से खेती की लागत 20 फीसदी तक कम हो सकती है और ऑनलाइन नेटवर्क पर अधिक मूल्य मिलने से कृषि आय 15 फीसदी तक बढ़ सकती है। फसल कटाई के अवशिष्ट में भी काफी कमी लाई जा सकती है। रखरखाव पर लागत जीडीपी की 14 फीसदी है जो अन्य देशों की तुलना में करीब दोगुनी है लेकिन ट्रकों की आवाजाही की प्रभावी निगरानी से इस अंतराल को पाटा जा सकता है। डिजिटल प्रौद्योगिकी के इस्तेमाल से स्वास्थ्य मंत्रालय के अलावा शिक्षा क्षेत्र को भी काफी फायदा हो सकता है। वास्तव में, डिजिटल तकनीक को अपनाने के मामले में बड़े एवं छोटे कारोबारों के बीच के फर्क को भी समय के साथ कम किया जा सकता है। जहां बड़ी कंपनियां कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) और इंटरनेट ऑफ थिंग्स (आईओटी) का अधिक लाभ ले पाएंगी, वहीं कनेक्टिविटी बेहतर होने और डेटा की कीमतें कम होने से यह फासला भी कम होता जाएगा। 

हालांकि इनमें से कोई भी स्थिति अपने-आप नहीं पैदा होगी। मैकिंजी का कहना है कि सरकारों, कारोबार जगत और आम लोगों को यह बदलाव आत्मसात करना होगा और डिजिटलीकरण की दिशा में आगे बढऩे के सबसे अच्छे तरीके तलाशने होंगे। मसलन,  भूमि रिकॉर्ड और कारोबारी पारदर्शिता के लिए प्रयास करने होंगे। डिजिटलीकरण की इस धारा के कुछ पहलू अच्छे नहीं हैं। इनमें विषाक्त सोशल मीडिया और निजता का ह्रास शामिल हैं। इस नई दुनिया के नियम इतनी सावधानी से बनाने होंगे कि कारोबार को बंदी के कगार पर पहुंचने और राजनीतिक इस्तेमाल से रोका जा सके और नागरिकों को हिंसा की गतिविधियों से सुरक्षित किया जा सके। 

इसके लिए लागत को कम करने और लाभ को अधिकतम करने की जरूरत है। फिर भी यह संदेश एकदम साफ है कि डिजिटलीकरण की संभावनाएं अगर अपरिहार्य नहीं तो इतनी अधिक लाभप्रद हैं कि इस नई हकीकत के मुताबिक ढलने में जो भी अवरोध बनेगा वह पीछे छूट जाएगा।

Keyword: digital, digitization, Digital India, Job, Internet Consumer, App, Modi government, Smartphone,
Advertisements
  Cover from Earthquake & Floods. Buy Home Insurance
   Get seamless access to Business Standard & WSJ.com starting at just Rs. 49/- per month*
Display Name  Email-Id  
Post your comment

CAPTCHA Image Reload Image Enter Code*:
  आपका मत
 क्या अधिभार की वजह से एफपीआई निवेश होगा प्रभावित?
हां नहीं  
पढ़िये
ईमेल
About us Authors Partner with us Jobs@BS Advertise with us Terms & Conditions Contact us RSS Site Map  
Business Standard Private Ltd. Copyright & Disclaimer feedback@business-standard.com
This site is best viewed with Internet Explorer 6.0 or higher; Firefox 2.0 or higher at a minimum screen resolution of 1024x768
* Stock quotes delayed by 10 minutes or more. All information provided is on "as is" basis and for information purposes only. Kindly consult your financial advisor or stock broker to verify the accuracy and recency of all the information prior to taking any investment decision. While due diligence is done and care taken prior to uploading the stock price data, neither Business Standard Private Limited, www.business-standard.com nor any independent service provider is/are liable for any information errors, incompleteness, or delays, or for any actions taken in reliance on information contained herein.