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श्रीराम से निकलने की कोशिश पीरामल ने की तेज

देव चटर्जी और टी ई नरसिम्हन / मुंबई/चेन्नई April 25, 2019

मई 2013 में पीरामल समूह के चेयरमैन अजय पीरामल ने श्रीराम ट्रांसपोर्ट फाइनैंस कंपनी की 10 फीसदी हिस्सेदारी के अधिग्रहण का ऐलान किया था। कुछ ही महीनों के भीतर पीरामल एंटरप्राइजेज ने श्रीराम समूह की दो और कंपनियों की अल्पांश हिस्सेदारी खरीदी और इस तरह से समूह कंपनियों में कुल निवेश 4,500 करोड़ रुपये पर पहुंचा दिया। यह पीरामल समूह की तरफ से श्रीराम समूह की कंपनियों के अधिग्रहण का पूर्ववर्ती कदम था क्योंकि श्रीराम समूह के संस्थापक आर त्यागराजन ने उत्तराधिकार की स्पष्ट योजना नहीं बनाई थी और मीडिया ने खबर दी कि यह दोनों के लिए बेहतर है।

 
छह साल बाद (अपनी हिस्सेदारी बेचने की कई कोशिशों के बाद) पीरामल ने एक बार फिर श्रीराम कंपनियों से अपना निवेश निकालने के लिए बातचीत शुरू की है। पिछले साल सितंबर में केकेआर व ब्लैकस्टोन समूह के साथ हिस्सेदारी बिक्री पर बातचीत के बाद इस बार पीरामल की बातचीत महिंद्रा समूह से हो रही है। बैंकरों ने कहा कि केकेआर व ब्लैकस्टोन समूह के साथ बातचीत के कोई नतीजे नहीं निकले और आईडीएफसी बैंक के साथ प्रस्तावित विलय भी नाकाम रहा। बैंकरों ने कहा, पीरामल अपनी हिस्सेदारी बेचना चाहती है क्योंंकि इससे उनके समूह की मुख्य कंपनी पीरामल एंटरप्राइजेज को नकदी मिल जाएगी, जो आईएलऐंडएफएस के संकट के बाद नकदी समस्या का सामना कर रही है। एक बैंकर ने कहा, किसी रियल एस्टेट कंपनी के लिए अतिरिक्त नकदी अच्छी खबर है। बैंकर ने कहा, पीरामल व श्रीराम समूह की संस्कृति में कभी मेल नहीं हो पाया। श्रीराम जहां ज्यादा संकीर्ण था, वहीं पीरामल ज्यादा आक्रामक, खास तौर से रियल एस्टेट उधारी में। इसके अलावा श्रीराम समूह के अधिकारियों ने पीरामल के नेतृत्व को स्वीकार नहीं किया और कई आला अधिकारियों ने कंपनी छोड़ दी। श्रीराम समूह के वरिष्ठ अधिकारियों मसलन आर श्रीधर, जीएस सुंदरराजन, एस श्रीराम आदि ने कई दशक तक काम करने के बाद समूह छोड़ दिया। यह पीरामल की तरफ से श्रीराम का चेयरमैन पद संभालने के बाद हुआ, वहीं संस्थापक चेयरमैन आर त्यागराजन पिछली सीट पर पहुंच गए। श्रीराम समूह के अन्य साझेदारों श्रीराम ट्रस्ट व सनलम ने भी इस पर सहमति जताई थी कि पीरामल ही सभी फैसले लेंगे।
 
श्रीराम समूह के वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, अहम समस्या यह रही कि श्रीराम समूह के पास उत्तराधिकार योजना नहीं है और हमारे संस्थापक ने बाहरी व्यक्ति पर भरोसा किया। त्यागराजन ने परिवार के किसी सदस्य को वित्तीय कारोबार में शामिल होने की अनुमति नहीं दी और उनके बेटे अब स्वतंत्र अक्षय ऊर्जा कारोबार चला रहे हैं। त्यागराजन ने कहा, श्रीराम समूह के पीरामल का निकलना कारोबारी फैसला ज्यादा है, न कि पीरामल व श्रीराम समूह के बीच किसी तरह के मसले या मतभेद का। उन्होंने कहा, पीरामल का निकलना नेतृत्व में किसी तरह का शून्य पैदा नहीं करेगा क्योंकि समूह के पास उद्यमिता की संस्कृति है और हर कंपनी खुद के दम पर और स्वतंत्र प्रबंधन के जरिए आगे बढ़ी है। त्यागराजन ने 1974 में इसकी स्थापना की थी। 
 
पीरामल समूह ने इस बारे में जानकारी के लिए भेजे गए ईमेल का जवाब नहीं दिया, वहीं अजय पीरामल ने भी भेजे गए संदेश का कोई उत्तर नहीं दिया। त्यागराजन ने बिजनेस स्टैंडर्ड से कहा, पीरामल पिछले 5-6 महीने से हिस्सा बेचना चाह रहे हैं और अच्छे रिटर्न के साथ बाहर निकलना चाहते हैं। उनके निकलने का संस्कृति से कोई लेनादेना नहीं है और न ही दोनों समूह या प्रबंधन के बीच किसी तरह का मसला है। पीरामल के लिए श्रीराम महज एक निवेश था। हमें लगा था कि वह कारोबार चलाने में भाग लेंगे, जो उन्होंने पिछले पांच वर्षों में किया। आज उनके पास शायद रकम  निवेश के लिए अन्य महत्वपूर्ण प्राथमिकता है। लेकिन हमारे संबंध काफी अच्छे रहे हैं।  पीरामल दबाव वाले रियल एस्टेट डेवलपर से जमीन खरीदना और वाणिज्यिक इमारत बनाना चाहते थे।
Keyword: shreeram, piramal,,
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