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दिल्ली में 5 साल बाद भी स्ट्रीट वेंडरों का विनियमन नहीं

रामवीर सिंह गुर्जर / नई दिल्ली April 24, 2019

करीब 5 साल पहले स्ट्रीट वेंडर्स (आजीविका संरक्षण और स्ट्रीट वेंडर्स विनियमन), 2014 राष्ट्रीय कानून बनने के बाद भी दिल्ली में इन वेंडरों का विनियमन नहीं हो पाया है। अब इनका विनियमन चुनावी भंवर में फस गया है। काफी मशक्कत के बाद पिछले साल इनके विनियमन के लिए जरूरी टाउन वेंडिंग समिति (टीवीसी) का गठन किया गया। लेकिन लोकसभा चुनाव के चलते अब स्ट्रीट वेंडर की पहचान, वेंडिंग जोन घोषित करने जैसे आगे के काम अटक गए हैं। दिल्ली में 4 से 5 लाख रेहड़ी-पटरी विके्रता होने का अनुमान है।
 
नैशनल एसोसिएशन ऑफ स्ट्रीट वेंडर्स ऑफ इंडिया (नासवी) के राष्ट्रीय समन्वयक अरविंद सिंह कहते हैं कि वर्ष 2014 में स्ट्रीट वेंडरों के विनियमन के लिए राष्ट्रीय कानून बन गया था। इस कानून के बाद भी दिल्ली में इनका विनियमन नहीं हो पाया क्योंकि विनियमन के लिए टीवीसी गठित होना जरूरी है। जैसे तैसे पिछले साल टीवीसी गठन की प्रक्रिया शुरू हुई और इस साल के शुरुआत में दिल्ली में तीनों निगमों और नई दिल्ली नगरपालिका परिषद में 27 टीवीसी गठित हुई हैं। इसके बाद स्ट्रीट वेंडरों को जगह देने के लिए इनकी पहचान के लिए सर्वेक्षण होना था और सर्वे से इस बात पता चलता कि किन किन वेंडरों को पंजीकृत कर जगह दी जानी है। इसके साथ ही पूरी दिल्ली में वेंडिंग जोन बनने थे लेकिन ये काम अब तक नहीं हुए हैं। इससे स्ट्रीट वेंडरों का विनियमन अटक गया है। निगम अधिकारियों का कहना है कि चुनाव के चलते इस काम को करने में देरी हो रही है। चुनाव बाद यह काम तेजी से किया जाएगा।
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