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समाधान में 66 फीसदी बैंकों की सहमति!

रघु मोहन और सुरजीत दास गुप्ता / मुंबई/नई दिल्ली 04 24, 2019

100 फीसदी ऋणदाताओं की सहमति से मुश्किल

समाधान योजना पर 100 की जगह 66 फीसदी ऋणदाताओं की सहमति की मिल सकती है अनुमति

बिजनेस स्टैंडर्ड समाधान में 66 फीसदी बैंकों की सहमति!भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) फंसी संपत्तियों के समाधान के लिए अपने संशोधित परिपत्र में ऋणदाताओं की सहमति के लिए जरूरी सीमा को घटाकर 66 फीसदी कर सकता है। अभी समाधान योजना को मंजूरी के लिए 100 फीसदी ऋणदाताओं की सहमति जरूरी होती है। समाधान योजना में ऋणदाताओं के साथ समझौता नहीं होने पर बैंकों के निवेश को खरीदने के बारे में भी आरबीआई विस्तृत प्रणाली ला सकता है। 12 फरवरी, 2018 के मूल परिपत्र जो अब निरस्त हो चुका है, उसमें समाधान योजना के लिए सभी ऋणदाताओं की मंजूरी की जरूरत होती थी। इंडियन बैंक एसोसिएशन (आईबीए) ने 90 फीसदी मंजूरी का सुझाव दिया था।

आरबीआई थर्ड-पार्टी और विशिष्ट सिक्योरिटी के साथ ही अतिरिक्त वित्तपोषण के बारे में भी कुछ उपाय कर सकता है। सशक्त परियोजना के तहत जुलाई 2018 में अंतर-ऋणदाता समझौता (आईसीए) को आरबीआई के 12 फरवरी के परिपत्र में शामिल नहीं किया गया था। इसके तहत कंसोर्टियम में शामिल नहीं रहने वाले ऋणदाताओं, जो विविध बैंकिंग या द्विपक्षीय समझौतों में शामिल थे, उनकी थर्ड-पार्टी और अतिरिक्त वित्तपोषण पर अलग राय थी।

इन दोनों नियमों को लेकर ऋणदाताओं की राय भी बंटी हुई थी। एक्सक्लूसिव सिक्योरिटी वाले बैंक इसे कॉमन पूल में नहीं रखना चाहते थे। वे प्रस्ताव के पक्ष में थे लेकिन अतिरिक्त कर्ज का जोखिम नहीं लेना उठाना चाहते थे। हालांकि बाद में कुछ बैंक इस पर मान गए थे। आरबीआई के 12 फरवरी के परिपत्र से हुई समस्या का सबसे प्रत्यक्ष उदाहरण रिलायंस कम्युनिकेशंस है। कंपनी अपने टावर, फाइबर और स्पेक्ट्रम परिसंपत्तियों को रिलायंस जियो को बेचना चाहती थी लेकिन सभी ऋणदाताओं के सहमत नहीं होने के कारण यह सौदा परवान नहीं चढ़ा। हालांकि 90 फीसदी से अधिक ऋणदाता इसके लिए तैयार थे। इसके बाद आरकॉम के पास एनसीएलटी जाने के अलावा कोई विकल्प नहीं था।
Keyword: bank, loan, debt, RBI, NPA,,
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