बिजनेस स्टैंडर्ड - डॉलर खरीद को भारी सफलता
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डॉलर खरीद को भारी सफलता

अनूप रॉय / मुंबई April 23, 2019

भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की दूसरी तीन वर्षीय डॉलर अदला-बदली नीलामी को जबरदस्त सफलता मिली है क्योंकि बैंकों ने इस पेशकश पर तिगुनी से अधिक की बोली लगाई है। लेकिन बोली पैटर्न से पता चलता है कि केंद्रीय बैंक इस योजना को जल्द ही खत्म कर सकता है। कट-ऑफ प्रीमियम पिछली नीलामी के मुकाबले काफी अधिक था। नीलामी के बाद फॉरवर्ड प्रीमियम दर में भी इजाफा हो गया क्योंकि बैंकों को लग रहा है कि डॉलर अदला-बदली के लिए यह सस्ता विकल्प अगले महीने से उपलब्ध नहीं होगा। एक साल के लिए फॉरवर्ड प्रीमियम नीलामी के बाद 4.5 फीसदी को पार कर गया। सामान्य तौर पर प्रीमियम इसी स्तर पर बरकरार रहता है।
 
मेकलाई फाइनैंशियल सर्विसेज के प्रबंध निदेशक जमाल मेकलाई ने कहा, 'इससे पता चलता है कि डॉलर अदला-बदली का विकल्प अब खत्म होने के करीब है। बाजार आरबीआई को अधिक समय तक दरों में कमी की अनुमति नहीं देगा।' करीब 5 अरब डॉलर तक की नीलामी के लिए बैंकों ने 18.65 अरब डॉलर की पेशकश की है। केंद्रीय बैंक को 255 बोलियां प्राप्त हुईं जो मार्च की नीलामी के मुकाबले अधिक है। मार्च में रिजर्व बैंक को 240 बोलियां प्राप्त हुई थीं। कट-ऑफ प्रीमियम 838 पैसे था। 26 मार्च को आयोजित पहली नीलामी में कट-ऑफ 776 पैसे था। नीलामी से पहले सुबह में तीन वर्षीय फॉरवर्ड प्रीमियम 775 पैसे था। लेकिन नीलामी के बाद यह बढ़कर करीब 860 पैसे हो गया।
 
एक विदेशी बैंक के वरिष्ठ मुद्रा कारोबारी ने कहा, 'बोली प्रक्रिया शुरू होते ही बैंकों ने अपने डॉलर की अंधाधुंध अदला-बदली की। बाजार में काफी मात्रा में डॉलर मौजूद थे।' अधिक प्रीमियम कट-ऑफ से केंद्रीय बैंक को मदद मिलेगी जबकि इससे बैंकों के लिए लागत बढ़ेगी। इसके अलावा इस अदला-बदली से बाजार में वायदा दरों में इजाफा होगा जो हेजिंग के लिहाज से आयातकों के लिए अच्छा नहीं होगा। इन दो नीलामी के जरिये केंद्रीय बैंक ने बैंकिंग प्रणाली में 69,435 करोड़ रुपये झोंक दिया जहां पिछले सप्ताह नकदी की किल्लत दिख रही थी। मार्च में इस नीलामी की घोषणा के बाद आगे का प्रीमियम ध्वस्त हो गया था। मार्च के आरंभ में जब इसकी घोषणा की गई थी तो आगे का प्रीमियम तीन वर्षों के लिए 970 पैसे था। लेकिन बाद में दरों में जबरदस्त गिरावट दर्ज की गई जिससे बड़े उद्योग घरानों को दीर्घावधि विदेशी मुद्रा उधारी के साथ अपने निवेश को सस्ते में हेज करने में मदद मिली। लेकिन अब दरों में दोबारा तेजी दिख रही है और बैंक भी अपने डॉलर की अदला-बदली के लिए काफी उत्सुक दिख रहे हैं।
 
इस अदला-बदली से रुपये की हाजिर विनिमय दर में भी कुछ उतार-चढ़ाव दिख सकता है। पिछले दो दिनों में डॉलर की मांग में तेजी दिख रही थी क्योंकि आरबीआई के साथ अदला-बदली के लिए बैंक अपने डॉलर स्टॉक बढ़ा रहे थे। अप्रैल में अब तक इसका प्रवाह करीब 2 अरब डॉलर रहा है जो मार्च में करीब 7 अरब डॉलर था।
Keyword: RBI, dollar, swap,,
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