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कंपनियों की आय में 15 फीसदी की बढ़त मानकर चल रहा बाजार

पुनीत वाधवा / नई दिल्ली April 23, 2019

भारतीय इक्विटी बाजार 18 गुने प्राइस टु अर्निंग (पीई) पर कारोबार कर रहा है और बाजार मध्यम अवधि में आय में 15 फीसदी की बढ़ोतरी मानकर चल रहा है और निवेशकोंं के लिए अहम बढ़त की उम्मीद बनी हुई है। यह कहना है यूबीएस सिक्योरिटीज के विश्लेषकों का। इन विश्लेषकों ने भारत के शोध प्रमुख गौतम छाओछाडिय़ा की अगुआई में तैयार इंडिया स्ट्रैटिजी रिपोर्ट में ये बातें कही है। यूबीएस का मानना है कि कंपनियों की आय में बढ़ोतरी हो सकती है अगर जीडीपी में वास्तविक बढ़त 8 फीसदी से ज्यादा हो। यूबीएस का कहना है कि यह बढ़त हासिल हो सकती है क्योंकि विनिर्माण गतिविधियां चीन से दूर हो रही हैं। यूबीएस की रिपोर्ट में कहा गया है, बाजार में और बढ़ोतरी हो सकती है। एशिया में यूबीएस एविडेंस लैब के सर्वेक्षण से पता चलता है कि कई मुख्य निवेश अधिकारी अपनी विनिर्माण गतिविधियां चीन से बाहर ले जाने के विकल्पों का आकलन कर रहे हैं और भारत तरजीही गंतव्यों में से एक के तौर पर उभर रहा है।
 
यूबीएस का मानना है कि बिजली उत्पादन, बुनियादी ढांचे की उपलब्धता और स्थानीय बाजार के आकार के लिहाज से भारत की स्थिति फायदा उठाने वाली है। यूबीएस ने भारत की वास्तविक जीडीपी बढ़त 2023 में 7 से 7.5 फीसदी रहने का अनुमान जताया है, वहीं भारत को बाजार हिस्सेदारी का फायदा टैरिफ लगाने से पहले चीन से अमेरिका को हुए निर्यात का समानुपातिक होगा। बढ़त के परिदृश्य में जीडीपी की वास्तविक रफ्तार 2023 तक 8 से 8.5 फीसदी रह सकती है, वहीं अमेरिकी निर्यात में अगले पांच साल में भारत की बाजार हिस्सेदारी 2018 के स्तर तक सुधरेगी। इस स्थिति में भारत की बाजार हिस्सेदारी में करीब 20 फीसदी की बढ़ोतरी होगी क्योंकि चीन की हिस्सेदारी घटेगी। यूबीएस का मानना है कि सबसे अच्छे परिदृश्य में जीडीपी की वास्तविक रफ्तार 8.5-9 फीसदी रह सकती है, जहां भारत की बाजार हिस्सेदारी पहले के समानुपात के मुकाबले ज्यादा बेहतर तरीके से सुधरेगी। भारत की स्थिति और कंपनियों के चीन से निकलने को देखते हुए यूबीएस का मानना है कि अगले पांच साल में चीन की हिस्सेदारी में गिरावट के चलते भारत इस हिस्सेदारी का 60 फीसदी तक हासिल कर सकता है।
 
नौकरियों का सृजन
 
निर्यात में बढ़ोतरी से देश को रुपये को स्थिर करने में मदद मिलेगी और विदेशी मुद्रा आय में इजाफा होगा। यूबीएस का कहना है कि जीडीपी में वास्तविक बढ़ोतरी से अगले कुछ वर्षों में नौकरियों का सृजन होगा। रिपोर्ट में कहा गया है, तीन परिदृश्य में निर्यात समर्थित प्रत्यक्ष विनिर्माण में सालाना 5 लाख से 40 लाख तक नौकरियों का सृजन का अनुमान है और इससे अप्रत्यक्ष रोजगार को भी मजबूती मिलेगी। इससे अप्रत्यक्ष तौर पर कम से कम एक अतिरिक्त नौकरी का सृजन हो सकता है।  करीब 70 लाख लोग हर साल कामगारों में शामिल हो रहे हैं।
 
ऐसे में निवेशकों को इसके कैसे फायदा होगा? यूबीएस का कहना है कि विनिर्माण का इलाका बदलने से सिले-सिलाए परिधान, रसायन, इंडस्ट्रियल्स और इलेक्ट्रॉनिक क्षेत्र को फायदा मिलेगा। उन क्षेत्रों की कंपनियोंं के शेयरों को सबसे ज्यादा फायदा मिलेगा, जो जीडीपी में उच्च बढ़ोतरी से लाभान्वित होंगे। 
Keyword: equity, PE, MF, market, share,,
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