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जेट पर ईवाई की रिपोर्ट से लेनदार परेशान

देव चटर्जी / मुंबई April 23, 2019

जेट एयरवेज की वित्तीय स्थिति पर ऑडिट फर्म ईवाई की नकारात्मक रिपोर्ट ने पिछले हफ्ते कंपनी के बंद होने से ठीक पहले इसमें और रकम झोंकने को लेकर भारतीय लेनदारों को परेशान कर दिया। यह रिपोर्ट विमानन कंपनी की पूरी फॉरेंसिक ऑडिट की नहीं है और सूत्र ने कहा कि उसने विमानन कंपनी के खातों में कुछ कमियां खोजी हैं। रिपोर्ट अब तक सार्वजनिक नहीं की गई है, लेकिन लेनदारों को सौंप दी गई है। जेट एयरवेज के बारे में प्रधानमंत्री कार्यालय को शिकायत करने वाले अरविंद गुप्ता ने कहा कि ईवाई ने वित्त वर्ष 2014 से लेकर 2018 तक के जेट के खाते पर नजर डाली है जब लेनदारों ने उनके आरोपों की जांच के लिए ऑडिट फर्म की नियुक्ति की। उन्होंने कहा, यह पर्याप्त नहीं है। हमने पिछले 10 साल में विमानन कंपनी की तरफ से रकम की हेराफेरी की बात सामने रखी है। कंपनी मामलों का मंत्रालय कंपनी के खाते की जांच कर रहा है और गुप्ता ने कहा कि और सबूत देने के लिए हमसे संपर्क किया गया है।
 
इस बारे में जानकारी के लिए जेट एयरवेज को भेजे गए ईमेल का जवाब नहीं मिला। ईवाई के प्रवक्ता ने टिप्पणी करने से मना कर दिया। गुप्ता ने कहा कि गोयल की प्राइवेट इकाई जेटएयर प्राइवेट लिमिटेड सामान्य बिक्री एजेंट के तौर पर जेट एयरवेज से हर महीने 4 करोड़ रुपये कमा रही थी और प्राइवेट इकाई ने कर्ज मुक्त बने रहने के लिए बैंक से किसी तरह की उधारी सुविधा का इस्तेमाल नहीं किया। पिछले साल दिसंबर में गोयल के स्वामित्व वाली कंपनी के पास 260 करोड़ रुपये की नकदी थी और इसने बोली की समयसीमा समाप्त होने के बाद 12 अप्रैल को इस कंपनी के लिए अभिरुचि पत्र जमा कराया था।
 
इस इकाई ने ज्यादातर नकदी यूपीएस जेटएयर एक्सप्रेस की हिस्सेदारी पिछले साल अक्टूबर में बेचकर जुटाए थे, जो 232 करोड़ रुपये में बिकी थी। प्राइवेट इक्विटी के राजस्व का मुख्य स्रोत सूचीबद्ध इकाई जेट एयरवेज थी, जो खराब वित्तीय हालात के बावजूद इसे रकम दे रही थी। लेनदारों ने कहा कि जेट एयरवेज को मार्च 2019 तक 1,700 करोड़ रुपये का पुनर्भुगतान करना था, जहां इसने डिफॉल्ट किया। इसके अलावा वित्त वर्ष 2020 में 2,444.5 करोड़ रुपये और चुकाने हैं। लेकिन पर्याप्त नकदी के अभाव में इसने परिचालन बंद करने का फैसला लिया और खाता-बही में भारी कर्ज लेनदारों पर छोड़ दिया।
 
भारतीय बैंकों ने कंपनी को 8,500 करोड़ रुपये उधार दिए हैं और अब उसे मई में इस कंपनी की होने वाली बिक्री से उम्मीदें हैं। एक संपत्ति पुनर्गठन कंपनी के प्रमुख ने कहा, परिचालन बंद होने के साथ कंपनी को गंभीर बोलीदाता मिलना मुश्किल होगा। उन्होंने कहा, बोलीदाताओंं की तरफ से की गई पेशकश के साथ काफी पूर्व शर्त है, जो बैकों को स्वीकार्य नहीं होगा। ऐसे में यह मामला दिवालिया अदालत जाएगा। बैंकों ने अभी तक कर्ज को इक्विटी में नहीं बदला है और गोयल के पास कंपनी की 51 फीसदी हिस्सेदारी है। एक अन्य सूत्र ने कहा कि बोली लगाने वाली नैशनल इन्वेस्टमेंट ऐंड इन्फ्रास्ट्रक्चर फंड चाहता है कि भारत सरकार विमानन उद्योग को बुनियादी ढांचे का दर्जा दे। तब तक एनआईआईएफ को इस क्षेत्र में सीधे निवेश करने में मुश्किल होगी।
Keyword: aviation, flight, airport, jet airways,,
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