बिजनेस स्टैंडर्ड - तिरुवनंतपुरम में रोजगार का छाया रहा मुद्दा
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तिरुवनंतपुरम में रोजगार का छाया रहा मुद्दा

शुभायन चक्रवर्ती /  04 22, 2019

लोकसभा चुनाव

बिजनेस स्टैंडर्ड तिरुवनंतपुरम में रोजगार का छाया रहा मुद्दातिरुवनंतपुरम अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डे के बाहर सार्वजनिक पार्किंग में आपको कई तरह के राजनीतिक रंग देखने को मिलते हैं। केरल में लगभर हर पेशे में श्रम संगठनों की लंबी परंपरा रही है और यही वजह है कि ऑटो चालकों ने इस पार्किंग को अपनी-अपनी पार्टियों के हिसाब से बांट रखा है। कांग्रेस और मार्क्‍सवादी कम्युनिस्ट पार्टी से जुड़े श्रम संगठनों के झंडे मुख्य द्वार के करीब हैं। भाजपा से जुड़े भारतीय मजदूर संघ का झंडा परिसर के बाहर लहरा रहा है। इसने बाकी दो दलों से जुड़े संगठनों के सदस्यों को बड़ी संख्या में अपने साथ जोड़ा है।

केरल में लोकसभा की सभी 21 सीटों पर मंगलवार को चुनाव होना है। भाजपा तिरुवनंतपुरम में पिछली बार से बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद कर रही है। मौजूदा सांसद कांग्रेस के शशि थरूर वह लगातार तीसरी बार इस सीट पर अपनी दावेदारी ठोक रहे हैं। केरल के 21 लाख से अधिक लोग दुनिया के कई देशों में बसे हुए हैं। लेकिन तिरुवनंतपुरम की संस्था सेंटर फॉर डेवलपमेंट स्टडीज के मुताबिक 2018 में 13 लाख लोग वापस केरल लौट आए। ऑटो चालक जोसेफ पनन कहते हैं, '2015 के बाद से शहर में भाजपा की ताकत बढ़ी है जब पार्टी स्थानीय निकाय चुनावों में दूसरी बड़ी पार्टी बनकर उभरी थी। इस बार उसे और ज्यादा वोट मिलेंगे क्योंकि दो बड़ी पार्टियां के बीच कड़ी प्रतिस्पर्धा है।'

बनी अनिश्चितता

चाय बेचने वाले राजू रतीश कहते हैं, 'नए चालकों के श्रम संगठनों के जुडऩे से यह लड़ाई और गहरा गई है। कुछ लोग बाढ़ प्रभावित ग्रामीण इलाकों से आए हैं जबकि बाकी खाड़ी देशों से वापस आए हैं और उनके पास कोई काम नहीं है। ये नए लोग भाजपा की तरफ जा सकते हैं।' सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात द्वारा उठाए गए कई कदमों के कारण प्रवासियों के वापस लौटने की समस्या पैदा हुई है। जेद्दाह में ड्राइवर रह चुके अरुण गोपी ने कहा कि सऊदी अरब में महिलाओं को वाहन चलाने की अनुमति मिलने के कारण केरल के 5 लाख से अधिक चालक प्रभावित हुए हैं। उन्होंने कहा, 'मैं एक बहुराष्ट्रीय होटल शृंखला में ड्राइवर था लेकिन अब मुझे टूरिस्ट टैक्सियां चलाकर आधी कमाई हो रही है। मेरे पास कुछ और करने का हुनर नहीं है।' गोपी ने कहा कि उन्होंने पिछले 15 साल के मतदान नहीं किया है लेकिन इस बार वह अपने मताधिकार का प्रयोग करेंगे। 

140 सदस्यीय केरल विधानसभा में भाजपा का केवल एक विधायक है लेकिन तिरुवनंतपुरम से भाजपा के उम्मीदवार और पार्टी के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष के. राजशेखरन को जीत की पूरी उम्मीद है। स्थानीय मीडिया के मुताबिक उन्होंने प्रचार में उतना ही समय लगाया है जितना शशि थरूर ने। चुनावी गहमागहमी के बीच 27 साल के शांतो थॉमस के दिमाग में शादी की बात चल रही है। उन्होंने तमिलनाडु के एक निजी कॉलेज से इंजीनियरिंग की डिग्री ली है और पिछले छह महीने से नौकरी की तलाश में हैं। वह कहते हैं, 'जहां तक परिवार और परंपरा की बात है, तो चीजें बहुत नहीं बदली हैं। अब माता-पिता लड़कियों को शादी करने के लिए 25 साल तक इंतजार करने की अनुमति दे सकते हैं लेकिन अब भी खाड़ी में काम करने वालों को वरीयता दी जाती है।' कोवलम में एक होटल में रिसेप्शनिस्ट का काम कर रहे शांतो ने कहा कि उनके कई दोस्त विदेशों से वापस आ रहे हैं लेकिन वह विदेश जाना चाहते हैं। वह पर्यटन क्षेत्र में नौकरी को इसका विकल्प मानते हैं। केरल की जीडीपी में पर्यटन की 10 फीसदी से अधिक हिस्सेदारी है और कुल रोजगार में इसका योगदान एक चौथाई से अधिक है। लेकिन गर्मियों में विदेशी पर्यटकों की संख्या में कमी से रोजगार कम हो जाता है।

राह नहीं आसान

शांतो वामपंथी मोर्चे के उम्मीदवार माकपा के सी दिवाकरन के समर्थक हैं लेकिन चुनावी पंडितों का मानना है कि उनका जीतना मुश्किल है।  मौलवी मोहम्मद फैसल मस्लियार का कहना है कि दिवाकरन तिरुवनंतपुरम के करीब नेदुमंगड से विधायक हैं और पार्टी के परंपरागत जनाधार के दम पर चुनावी वैतरणी पार करना चाहते हैं। मुस्लियार मुस्लिम बहुल बीमापल्ली में एक मस्जिद का संचालन करते हैं। उनकी मस्जिद राजनीतिक रूप से सक्रिय समस्त केरल जमीयतुल उलेमा के अधीन है। इस धार्मिक संस्था को राज्य की तीसरी सबसे बड़ी पार्टी इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग का समर्थन हासिल है। यह कांग्रेस की सहयोगी पार्टी है।

यह पूछने पर कि क्या धर्म यहां मुद्दा है, मुस्लियार ने कहा, 'भाजपा के लिए केरल में जगह बनाना असंभव है। यहां लोगों का अपनी पार्टियों से गहरा लगाव है।' विडंबना है कि अन्य अल्पसंख्यक संगठन दूसरी तरफ जा रहा है। केरल कैथोलिक बिशप्स काउंसिल ने पादरियों और चर्च अधिकारियों को तटस्थ रहने को कहा है लेकिन कांग्रेस का आरोप है कि दक्षिण केरल की विशाल ईसाई आबादी का झुकाव वाममोर्चे की तरफ है। कॉलेज में पढऩे वाले 23 साल के प्रकाश जॉर्ज ने कहा, 'वाममोर्चे की सरकार ने चर्च के वित्तीय अधिकारों में सुधार के बारे में एक विधेयक को पेश करने से रोक दिया। इसके बदले में चर्च गुप्त रूप से अपने लोगों को वाममोर्चे को वोट देने के लिए कह रहा है।' थरूर को 2009 में 44 फीसदी वोट मिले थे जो 2014 में घटकर 34 फीसदी रह गए। पिछले चुनावों में उनके बाद भाजपा उम्मीदवार को सबसे अधिक वोट मिले थे लेकिन थरूर के निशाने पर अब भी कम्युनिस्ट उम्मीदवार हैं। यह शहर मंगलवार को उनके भविष्य का फैसला करेगा। 
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