बिजनेस स्टैंडर्ड - कंपनियों ने बढ़ाईं दरें, महंगा होगा बीमा
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कंपनियों ने बढ़ाईं दरें, महंगा होगा बीमा

शुभमय भट्टाचार्य / नई दिल्ली 04 21, 2019

ऐतिहासिक निचले स्तर के बाद बीमे की दरों में बढ़ोतरी

जीआईसी ने कम दर पर कारोबार लेने से किया इनकार
साधारण बीमा कंपनियों का मुनाफा होगा प्रभावित

बिजनेस स्टैंडर्ड कंपनियों ने बढ़ाईं दरें, महंगा होगा बीमाभारतीय उद्योग में बीमा की दरें कई वर्षों तक ऐतिहासिक निचले स्तर पर रहने के बाद बढऩी शुरू हो गई हैं। इसकी शुरुआत इसी महीने हुई जब देश की अग्रणी पुनर्बीमा कंपनी जीआईसी आरई ने साधारण बीमा कंपनियों से कम दर पर कारोबार लेने से इनकार कर दिया।  अब अगर बीमा कंपनियों ने जिम्मेदार प्रथाओं का पालन नहीं किया तो वे अपने अंडरराइटिंग के लिए पुनर्बीमा कवर नहीं खरीद पाएंगी। भारतीय बीमा कानूनों के तहत घरेलू बीमा कंपनियों को पुनर्बीमा की पहली पेशकश सरकारी कंपनी जीआईसी आरई को करनी होती है। अगर जीआईसी आरई को लगता है कि कंपनियां अपने जोखिम के मुताबिक कीमत देने में नाकाम रही हैं तो उन्हें पुनर्बीमा कवर नहीं मिलेगा। इससे उन्होंने अपने जोखिमों के लिए ज्यादा प्रावधान करना पड़ेगा जिससे उनका मुनाफा प्रभावित होगा।

भारत बीमा कारोबार में दुनिया का प्रमुख केंद्र बनने की ओर अग्रसर है लेकिन यहां जोखिम की कई श्रेणियों खासकर आग में बीमे की दर बहुत कम है। जीआईसी आरई ने सभी 34 साधारण बीमा कंपनियों को भेजे नोटिस में कहा है कि उद्योग की हर श्रेणी में आग के जोखिम की दर को भारी इजाफा करने की जरूरत है। इनमें बिजली संयंत्र, स्टील संयंत्र, कपड़ा मिल, प्लास्टिक इकाइयां और रबर का सामान बनाने वाली इकाइयां शामिल हैं।

एक सूत्र ने कहा कि इसे दूसरे क्षेत्रों में भी लागू किया जा सकता है। बीमा कंपनियों के लिए स्वास्थ्य, वाहन और अग्नि बीमा अहम हैं। कुल सकल प्रत्यक्ष किस्त में आग की हिस्सेदारी सात फीसदी है और वित्त वर्ष 2018 में यह 150,662 करोड़ रुपये थी। अमूमन दुनिया भर में पुनर्बीमा कंपनियां जोखिम की कीमत के बारे में बीमा कंपनियों को निर्देश नहीं देती हैं। लेकिन जीआईसी के परिपत्र ने इसे बदल दिया है। अक्टूबर 2017 में सूचीबद्घ होने के बाद से कंपनी का रुख सख्त हो गया है। यही वजह है कि कंपनी को अंडरराइटिंग नुकसान पर शेयरधारकों के मुश्किल सवालों का सामना करना पड़ सकता है।

जीआईसी के बाद अब विदेशी कंपनियों भी दरों में बढ़ोतरी करेंगी। आग बीमा में उनकी 31 फीसदी हिस्सेदारी है और उनकी लागत में भी बढ़ोतरी हुई है। अगर कंपनियां कम दर पर कारोबार लेती हैं तो उन्हें पुनर्बीमा कवर खरीदने के लिए संघर्ष करना पड़ेगा जो पुनर्बीमा कंपनियों के लिए अच्छी खबर नहीं है। वित्त वर्ष 2018 में साधारण बीमा कारोबार का समग्र अंडरराइटिंग नुकसान 15,341 करोड़ रुपये रहा था। पिछले दशक में देश में साधारण बीमा कारोबार 17 फीसदी (सालाना चक्रवृद्घि) की रफ्तार से बढ़ा लेकिन कुछ ही कंपनियां मुनाफे में रहीं। इससे साधारण बीमा क्षेत्र की चार सरकारी कंपनियां भी बुरी तरह प्रभावित हुई है।

सरकार ने ओरियंटल इंश्योरेंस, युनाइटेड इंडिया इंश्योरेंस और नैशनल इंश्योरेंस को मिलाकर एक कंपनी बनाने की योजना बनाई है। इसी संदर्भ में जीएसआई आरई ने बीमा कंपनियों को दरें बढ़ाने को कहा है। कंपनी इससे बेहतर परिणाम की उम्मीद कर रही है। भारतीय बीमा नियामक विकास प्राधिकरण के पूर्व सदस्य (गैर-बीमा) पी जोसेफ ने कहा कि जीआईसी का फैसला स्वागतयोग्य है। बीमा कंपनियों के अब अपने जोखिम की कीमतें व्यावहारिक बनाने की उम्मीद है अन्यथा उन्हें किस्त की कमाई से ज्यादा रकम दावों के रूप में चुकानी पड़ेगी।

Keyword: insurance, premium, company, IRDA,,
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