बिजनेस स्टैंडर्ड - आईबीसी में मध्यस्थता के उपाय!
 Search  BS Hindi  Web   BS E-Paper|      Follow us on 
Business Standard
Tuesday, July 23, 2019 09:17 PM     English | हिंदी

होम

|

बाजार

|

कंपनियां

|

अर्थव्यवस्था

|

मुद्रा

|

विश्लेषण

|

निवेश

|

जिंस

|

क्षेत्रीय

|

विशेष

|

विविध

|

अर्थनामा

 
होम अर्थव्यवस्था खबर

आईबीसी में मध्यस्थता के उपाय!

वीणा मणि / नई दिल्ली 04 21, 2019

हो सकता है संशोधन

पहले से निर्धारित ऋणशोधन पैकेज, व्यक्तिगत दिवालिया प्रणाली लाने पर भी विचार
ऋणशोधन के मामलों में कृत्रिम बुद्धिमता के इस्तेमाल पर भी विचार
ऋणशोधन मामलों के निपटान की लागत कम करने और समय घटाने की कवायद
विदेश में दिवालिया या कॉरपोरेट विवाद के मामलों में मध्यस्थता की है अहम भूमिका

बिजनेस स्टैंडर्ड आईबीसी में मध्यस्थता के उपाय!सरकार ऋणशोधन अक्षमता और दिवालिया संहिता (आईबीसी) में बदलाव करने की योजना बना रही है। इसके तहत आईबीसी में मध्यस्थता जैसे कुछ प्रावधान शामिल किए जा सकते हैं ताकि समाधान के मामलों की लागत और समय दोनों कम हो सके। आईबीसी की संपूर्ण समीक्षा से सरकार को समाधान के लिए पहले से तैयार पैकेज, व्यक्तिगत दिवालिया योजना और समाधान के मामलों में कृत्रिम बुद्धिमता जैसी प्रणालियों को लागू करने में सहूलियत हो सकती है।

राष्ट्रीय कंपनी लॉ पंचाट में भेजे जाने वाले मामलों का समाधान 180 दिन में करना था जिसे 90 दिन के लिए और बढ़ाया गया है। लेकिन सभी मामलों में तय समयसीमा का सख्ती से पालन नहीं हो पा रहा है क्योंकि इसमें कानूनी पचड़ों को ध्यान में नहीं रखा गया है। उदाहरण के लिए एस्सार स्टील का समाधान एनसीएलटी में जाने के 600 दिन बीतने के बाद भी लंबित है। यह मामला अभी एनसीएलएटी में लंबित है। आम तौर पर एनसीएलटी में मामलों को स्वीकार करने या उसे खारिज करने में करीब एक महीने का वक्त लग जाता है। इससे निपटने के लिए सरकार विदेशों में प्रचलित आधुनिक कार्यप्रणाली लाने पर विचार कर रही है।

भारतीय ऋणशोधन अक्षमता और दिवालिया बोर्ड के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, 'क्या कॉरपोरेट ऋणशोधन के तहत समयसीमा कारगर है? क्या इसकी लागत कम की जा सकती है? हम इन चीजों का विश्लेषण कर रहे हैं।' संबंधित पक्षों के बीच विवाद की स्थिति में समाधान प्रक्रिया के लिए मध्यस्थता का प्रावधान है। इसके तहत समझौते की संभावना तलाशी जाती है और संयुक्त मूल्यांकन के आधार पर मामले का निपटारा किया जाता है। इस प्रक्रिया का प्रबंधन तटस्थ व्यक्ति द्वारा किया जाता है जिसे मध्यस्थ कहा जाता है। हालांकि समझौते को लागू करने का अधिकार उसे नहीं होता है।

मध्यस्थता विवाद निपटान का वैकल्पिक उपाय है। अमेरिका में दिवालिया मामलों के समाधान में यह काफी प्रभावी माध्यम है। ऋणशोधन से जुड़े वकील सुमंत बत्रा ने कहा, 'मध्यस्थता अमेरिका और अन्य देशों में स्थापित धारणा है और विवादित मामलों के निपटान तथा समय की बचत करने में इसे प्र्रभावी पाया गया है। भारत में भी इसकी काफी संभावनाएं हैं।' पिछले साल उच्चतम न्यायालय ने कर्ज में फंसी फर्मों के समाधान मामलों में देरी रोकने के लिए चर्चा शुरू की थी। अदालत ने कहा था कि इसमें होने वाली देरी बंद होनी चाहिए।

आरएफ नरीमन और इंदु मल्होत्रा के पीठ ने कहा था कि आईबीसी में समधान प्रक्रिया को समयबद्घ तरीके से निपटाने की व्यवस्था की गई है लेकिन विभिन्न प्राधिकरणों के हस्तक्षेप की वजह से इसमें देरी होती है, जिससे इस प्रणाली का फायदा नहीं मिल पाता है। सूत्रों ने कहा कि वे व्यक्तिगत ऋणशोधन प्रावधान तैयार करने के लिए कॉरपोरेट ऋणशोधन के अनुभव का इस्तेमाल करेंगे। लीमन ब्रदर्स ने जब 2008 में दिवालिया आवेदन किया था जब उसने वैकल्पिक विवाद निपटान का अनुरोध किया था ताकि समय और लागत कम हो सके। अदालत ने सहमति जताई थी कि लीमन के कुछ डेरिवेटिव अनुबंधों के लिए मध्यस्थता का उपयोग किया जा सकता है।

सूत्रों ने कहा कि कॉरपोरेट ऋणशोधन मामलों की तरह ही समाधान पेशेवर व्यक्तिगत समाधान का रास्ता तलाशने में मदद करेंगे। इसके साथ ही सरकार पहले से निर्धारित समाधान पैकेज लाने की भी संभावना तलाश रही है। इस बारे में प्रतिक्रिया भी मांगी गई है। इस योजना के तहत आम तौर पर कर्ज में फंसी कंपनी को एनसीएलटी में किसी भी पक्ष द्वारा ऋणशोधन आवेदन दायर करने से पहले कम से कम दो-तिहाई ऋणदाताओं की मंजूरी के साथ वित्तीय पुनर्गठन योजना तैयार करने की सहूलियत देती है।

वर्तमान में कर्ज में फंसी कंपनी, उसके वित्तीय या परिचालन ऋणदाता ऋणशोधन प्रक्रियाय शुरू करने के लिए एनसीएलटी में जा सकते हैं और कर्ज भुगतान के निपटान का तरीका तलाशते हैं। फंसे कर्ज के समाधान के लिए आईबीसी को 2016 में लाया गया था। सूत्रों ने कहा कि ऋणशोधन समाधान में कृत्रिम बुद्घिमत्ता के उपयोग पर विचार हो रहा है, जिससे अनुपालन आदि पर नजर रखने में मदद मिलेगी।
Keyword: IBC, code, IBBI, NCLT, RBI,,
Advertisements
  Cover from Earthquake & Floods. Buy Home Insurance
   Get seamless access to Business Standard & WSJ.com starting at just Rs. 49/- per month*
Display Name  Email-Id  
Post your comment

CAPTCHA Image Reload Image Enter Code*:
  आपका मत
 क्या सरकार को अपनी डिजिटल करेंसी लानी चाहिए?
हां नहीं  
पढ़िये
ईमेल
About us Authors Partner with us Jobs@BS Advertise with us Terms & Conditions Contact us RSS Site Map  
Business Standard Private Ltd. Copyright & Disclaimer feedback@business-standard.com
This site is best viewed with Internet Explorer 6.0 or higher; Firefox 2.0 or higher at a minimum screen resolution of 1024x768
* Stock quotes delayed by 10 minutes or more. All information provided is on "as is" basis and for information purposes only. Kindly consult your financial advisor or stock broker to verify the accuracy and recency of all the information prior to taking any investment decision. While due diligence is done and care taken prior to uploading the stock price data, neither Business Standard Private Limited, www.business-standard.com nor any independent service provider is/are liable for any information errors, incompleteness, or delays, or for any actions taken in reliance on information contained herein.