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बैंक शेयरों पर म्युचुअल फंडों का बड़ा दांव, ऑटो में घटा

जश कृपलानी / मुंबई April 21, 2019

म्युचुअल फंड 2019-20 के लिए विभिन्न क्षेत्रों में अपने निवेश में फेरबदल कर रहे हैं क्योंकि वे अपने पोर्टफोलियो के रिटर्न में सुधार चाह रहे हैं। आय में तीव्र सुधार की उम्मीद में बैंकिंग क्षेत्र में म्युचुअल फंडों का निवेश 31 मार्च 2019 को एक साल पहले के मुकाबले करीब 50 फीसदी बढ़ा है। इस अवधि में हालांकि वाहन क्षेत्र में फंडों का निवेश घटा है क्योंकि इस क्षेत्र में बढ़त की रफ्तार सुस्त बने रहने की संभावना है। वित्त वर्ष 2019 के आखिर में बैंकों में म्युचुअल फंडों का निवेश 2.6 लाख करोड़ रुपये था, जो 31 मार्च 2018 को 1.7 लाख करोड़ रुपये रहा था। दूसरी ओर वाहन व वाहन कलपुर्जा कंपनियों में इनका निवेश 65,675 करोड़  रुपये था, जो वित्त वर्ष 2018 के आखिर के मुकाबले 16 फीसदी कम है।
 
विशेषज्ञों ने कहा कि परिसंपत्ति गुणवत्ता में सुधार और गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों की कमजोर बैलेंस शीट कॉरपोरेट व खुदरा बैंकों के लिए बेहतर रहा है। सुंदरम एमएफ के मुख्य निवेश अधिकारी एस कृष्ण कुमार ने कहा, कॉरपोरेट सेवा पर ज्यादा जोर देने वाले बैंकों के मामले में हम नया एनपीए नहींं देख रहे हैं और पुराने के लिए ठीक तरह से प्रावधान किया जा चुका है। ऐसे में उधारी की लागत घट रही है और लाभ दोगुना हो जाएगा। खुदरा बैंक भी बाजार हिस्सेदारी पाने के लिहाज से बेहतर स्थिति में हैं।
 
टाटा एमएफ की फंड मैनेजर सोनम उïडासी ने कहा, एनबीएफसी में दबाव के चलते निजी क्षेत्र के ज्यादातर बैंकों की बाजार हिस्सेदारी में इजाफा होगा क्योंकि उधारी में होने वाली बढ़ोतरी में हिस्सा लेने के लिए वे बेहतर तरीके से पूंजीकृत हैं। फंड मैनेजर स्पष्ट तौर से वाहन क्षेत्र से दूर हो रहे हैं क्योंकि उन्हें बाजार की कुल आय में यह संभावित तौर पर अवरोध पैदा करने वाला नजर आ रहा है। एनबीएफसी पर दबाव और कम कर्ज वितरण ने वाहन क्षेत्र के शेयरों की नकारात्मक धारणा में और बढ़ोतरी की है।
 
एडलवाइस के विश्लेषकों ने एक नोट में कहा, ज्यादा इन्वेंट्री वाहन कंपनियों को उत्पादन में कटौती के लिए बाध्य कर रहे हैं। नकदी के सख्त हालात और कमजोर धारणा का भी मांग पर असर पड़ रहा है। हालांकि विशेषज्ञों ने कहा कि कुछ अन्य क्षेत्रों में इनका निवेश चुनाव नतीजे के आसपास बढ़ सकता है। एक फंड मैनेजर ने कहा, मोटे तौर पर चुनाव के बाद पूंजीगत खर्च के चक्र में इजाफे की प्रवृत्ति होती है। ऐसे में पूंजीगत सामान बनाने वाली कंपनियों के शेयर पसंदीदा बनकर उभर सकते हैं। साथ ही कुछ मामलों में क्षमता इस्तेमाल का स्तर 70-75 फीसदी के पास है, ऐसे में हम निजी क्षेत्र के पूंजीगत खर्च में सुधार देख सकते हैं। 31 मार्च 2019 को पूंजीगत सामान बनाने वाली कंपनियों में फंड मैनेजरों का निवेश 21,851 करोड़ रुपये था, जो म्युचुअल फंडों की कुल इक्विटी परिसंपत्तियों का 2 फीसदी है।
 
उपभोक्ता एक अन्य क्षेत्र है जहां चुनाव के बाद सुधार दिख सकता है। उडासी ने कहा, ग्रामीण अर्थव्यवस्था में दबाव है, जिसके चलते बिक्री की रफ्तार नरम रही है। लेकिन प्रमुख राजनीतिक पार्टियां ग्रामीण मतदाता को लुभा रहे हैं। ऐसे में जो भी पार्टी सत्ता में आएगी, ग्रामीण खर्च में इजाफा हो सकता है। 31 मार्च 2019 को कंज्यूमर ड््यूरेबल यानी टिकाऊ उपभोक्ता क्षेत्र में म्युचुअल फंडों का निवेश 26,484 करोड़ रुपये (इक्विटी परिसंपत्ति का 2.4 फीसदी) और एफएमसीजी में 81,697 करोड़ रुपये निवेश था (इक्विटी परिसंपत्तियों का 7.4 फीसदी)। 
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