बिजनेस स्टैंडर्ड - तेल कीमतें बढऩे से ओएनजीसी के शेयर को दम
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तेल कीमतें बढऩे से ओएनजीसी के शेयर को दम

उज्ज्वल जौहरी /  April 21, 2019

कच्चे तेल (ब्र्रेंट क्रूड) की कीमतों में तेजी के बीच ओएनजीसी के शेयर में फरवरी के निचले स्तर के मुकाबले 20 प्रतिशत की तेजी आई है। कच्चा तेल लगातार उछल रहा है और अब यह 2019 के उच्च स्तर के करीब कारोबार कर रहा है। कच्चा तेल उबलने से ओनएनजीसी को तो लाभ होगा ही, साथ ही इसे घरेलू स्तर पर गैस की कीमतों और उत्पादन में बढ़ोतरी से भी फायदा पहुंचेगा। ओएनजीसी देश की सबसे बड़ी गैस उत्पादक कंपनी है। कीमतों और उत्पादन को लेकर बढ़ती संभावनाओं के बीच विश्लेषकों का मानना है कि वित्त वर्ष 2019-21 के दौरान कंपनी का गैस कारोबार इसकी आय में खासा इजाफा करेगा। अगर ओएनसीसी जेफरीज और सीएलएसए जैसी कई दूसरी ब्रोकरेज कंपनियों की पसंद (तेल एवं गैस खंड में) है तो इसमें किसी को हैरानी नहीं होना चाहिए। 

 
कच्चे तेल से बढ़ेगा राजस्व 
 
मार्च 2019 तिमाही में कच्चा तेल प्रति बैरल औसत 63.2 डॉलर रहा, जो दिसंबर 2018 में दर्ज 64.7 डॉलर प्रति बैरल के मुकाबले थोड़ा कम था। उस समय कीमतें 86.09 डॉलर के ऊंचे स्तर से कम होकर 49.73 डॉलर के स्तर पर आ गई थीं। वैसे विश्लेषकों का मानना है कि ओएनजीसी की प्राप्तियां तीसरी तिमाही में प्रति बैरल 66.4 डॉलर से कम होकर चौथी तिमाही में 63.0 डॉलर रहेंगी। लेकिन कच्चे तेल का प्रदर्शन ठीक रहा है और यह बुधवार को 2019 के उच्चतम स्तर 72 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया। इससे आगे चलकर ओएनजीसी की शुद्ध प्राप्तियों में संभवत: इजाफा होगा। माना जा रहा है कि आने वाले समय में कच्चा तेल और मजबूत हो सकता है। इस बारे में कोटक इंस्टीट्यूशनल इक्विटीज के विश्लेषकों ने कहा, 'कच्चे तेल की कीमतें मजबूत दिख रही हैं और मौजूदा भू-राजनीतिक तनावों के कारण यह 80 डॉलर प्रति बैरल के स्तर तक जा सकती हैं।'
 
हालांकि कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों का एक मतलब यह भी होगा कि सब्सिडी साझा करने का बोझ बढ़ेगा। विश्लेषकों का मानना है कि जब तक कच्चे तेल की कीमतें 85 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर बरकरार रहेंगी तब तक ओएनजीसी पर सब्सिडी वहन करने का बोझ भी सीमित रहेगा। वास्तव में विश्लेषकों का कहना है कि पिछले पांच वर्षों में तेल पर सब्सिडी 1.3 प्रतिशत से कम होकर सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) का 0.2 प्रतिशत रह गई है। आने वाले समय में रसोई गैस की सब्सिडी पर भी वार हो सकता है और 2 से 3 साल में सब्सिडी कम होकर शून्य हो सकती है। सीएलएसए के विश्लेषकों का मानना है कि भविष्य में सब्सिडी और कम किए जाने से ओएनजीसी/ऑयल इंडिया के लिए दबाव कम हो सकता है। उनके अनुसार इससे ओएनजीसी के शेयर को दम मिल सकता है और अगले तीन वर्षों में यह 150 प्रतिशत से अधिक प्रतिफल दे सकता है।
 
गैस कीमत व उत्पादन सुधरा
 
हाल में गैस कीमतें बढ़ीं हैं, जिनसे ओएनजीसी की भविष्य में होने वाली कमाई और बढ़ सकती है। अप्रैल-सितंबर 2019 के दौरान घरेलू स्तर पर गैस की कीमतें लगभग 10 प्रतिशत बढ़कर 3.69 डॉलर प्रति मिलियन मीट्रिक ब्रिटिश थर्मल यूनिट (एमएमबीटीयू) हो गई हैं। अक्टूबर 2018 से मार्च 2019 के बीच कीमतें 3.36 एमएमबीटीयू थीं।  कंपनी की कमाई के लिहाज से यह फायदे का सौदा है, क्योंकि गैस उत्पादन में भी तेजी देखी जा रही है। विश्लेषकों का मानना है कि गैस कीमतें बढऩे से ओएनजीसी और ऑयल इंडिया को लाभ होगा, क्योंकि अगर प्रति एमएमबीटीयू 1 डॉलर कीमत बढ़ती है तो इन दोनों कंपनियों की कमाई भी 10 से 11 प्रतिशत बढ़ जाती है। ओएनजीसी का गैस उत्पादन इसके सर्वश्रेष्ठ स्तर पर पहुंच चुका है। ऐसे में जेफरीज के विश्लेषकों का मानना है कि कंपनी का गैस कारोबार वित्त वर्ष 2019-21 के दौरान इसके बाद भी कमाई में अहम भूमिका निभाएगा। ï 
 
विश्लेषकों का कहना है कि वैसे ओएनजीसी का तेल उत्पादन बहुत अधिक नहीं बढ़ा है, लेकिन उनके अनुसार केजी-डीडब्ल्यूएन-98/2 हाइड्रोकार्बन ब्लॉक (देश के पूर्वी तट पर गोदावरी डेल्टा में) से उत्पादन शुरू होने पर उत्पादन खासा बढ़ जाएगा। मोतीलाल ओसवाल सिक्योरिटीज (एमओएसएल) के विश्लेषकों को अगले 3 से 4 वर्षों में ओएनजीसी का गैस उत्पादन सालाना 5 से 6 प्रतिशत बढऩे की उम्मीद है, जबकि तेल उत्पादन में मामूली इजाफा हो सकता है। हालांकि ऊपर जितने फायदे गिनाए गए हैं वे समेकित स्तर (हिंदुस्तान पेट्रोलियम में ओएनजीसी की 51.11 प्रतिशत हिस्सेदारी है) पर कमजोर साबित हो सकते हैं क्योंकि हाल में रिफाइनिंग ओर पेट्रो-रसायन मार्जिन दबाव में रहे हैं। कुल मिलाकर एमओएसएल के विश्लेषकों का कहना है कि ओएनजीसी पर फिलहाल सब्सिडी का बोझ नहीं है और इसकी लाभांश प्राप्ति भी अच्छी है, साथ ही शेयर का मूल्यांकन भी आकर्षक है।
Keyword: ONGC, oil, gas, share,,
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