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एनबीएफसी : निवेशकों का रुझान सुधरने में लगेगा समय!

हंसिनी कार्तिक /  April 21, 2019

खबरों के मुताबिक गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (एनबीएफसी) के लिए परिचालन का माहौल जमीनी स्तर पर सुधरा है। हाल में इस क्षेत्र की कंपनियों ने कहा है कि नकदी की किल्लत दूर हो रही है। इसके चलते फंड की लागत नवंबर, 2018 के सर्वोच्च स्तर के मुकाबले नीचे आई है। फिर भी ऐसा लगता है कि बाजार इन सुधरते मानकों से संतुष्ट नहीं है।  ब्लूमबर्ग की रायशुमारी में शामिल विश्लेषकों के मुताबिक 24 में से 22 एनबीएफसी शेयरों की 12 महीने की लक्षित कीमत में लगातार कमी आ रही है। उनमें से 20 से अधिक की लक्षित कीमत में पिछले छह महीनों के दौरान भारी कमी दर्ज की गई है। मुश्किल में फंसी एनबीएफसी दीवान हाउसिंग की 12 महीने की लक्षित कीमत में सितंबर, 2018 की लक्षित कीमत के मुकाबले 43 फीसदी घटी है। सितंबर, 2018 में एनबीएफसी क्षेत्र में नकदी का संकट पैदा हुआ था। एक अन्य एनबीएफसी इंडियाबुल्स हाउसिंग फाइनैंस के लक्ष्मी विलास बैंक में विलय के प्रस्ताव के बावजूद उसकी लक्षित कीमत में 20 फीसदी कमी आई है। 

 
यहां तक कि एलआईसी हाउसिंग फाइनैंस, एमऐंडएम फाइनैंशियल सर्विसेज और श्रीराम ट्रांसपोर्ट फाइनैंस ने अपनी लक्षित कीमतों में 5 से 15 फीसदी गिरावट दर्ज की है, जबकि उन्हें कम जोखिम वाले एनबीएफसी शेयर माना जाता है। पीएनबी हाउसिंग की लक्षित कीमत 28 फीसदी नीचे है। रोचक बात यह है कि बाजार की अगुआ एचडीएफसी लिमिटेड का शेयर हाल में नई ऊंचाई पर पहुंच गया है। बावजूद विश्लेषकों का रुख इस शेयर में अगले 12 महीनों में संभावित चढ़ाव को लेकर निराशाजनक है। एचडीएफसी और बजाज फिनसर्व की लक्षित कीमतों में सितंबर, 2018 के स्तरों के मुकाबले एक फीसदी कटौती की गई है। रोचक बात यह है कि केवल बजाज फाइनैंस और मुथूट फाइनैंस ही ऐसे दो शेयर हैं, जिनकी कीमतों में इस अवधि के दौरान बढ़ोतरी के आसार हैं। 
 
इस क्षेत्र को लेकर बाजार के निराशाजनक रवैये के बारे में प्रभुदास लीलाधर में विश्लेषक श्वेता दप्तरदार ने कहा कि इस क्षेत्र की वृद्धि पिछले कुछ वर्षों में 20 फीसदी से अधिक रही है, लेकिन आगे इसमें भारी गिरावट आएगी और इसके मुताबिक ही मूल्यांकन तथा कीमत अनुमानों में कमी आएगी। उन्होंने कहा, 'जब देनदारी के ढांचे को फिर से तय किया जाता है तो संपत्ति ढांचे में भी बदलाव आता है।' जेपी मॉर्गन की हाल की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि फंड की लागत और उपलब्धता इस क्षेत्र की वृद्धि के लिए 2019-20 में चुनौती बनेंगी। 
 
रिपोर्ट में कहा गया है, 'बैंक, विशेष रूप से सरकारी स्वामित्व वाली बैंकों के एनबीएफसी के लिए प्रमुख नकदी प्रदाता बने रहने की संभावना है और प्रतिभूतिकरण देनदारी रणनीति का एक प्रमुख हथियार बनता जा रहा है। येस सिक्योरिटीज के विश्लेषक राजीव मेहता ने कहा कि मुख्य रूप से हाउसिंग फाइनैंस कंपनियों के लिए सबसे खराब परिणाम यह हो सकता है कि उनका कारोबारी मॉडल बदल सकता है। इसका उनके मुनाफे पर असर पड़ सकता है और उनकी आमदनी में उतार-चढ़ाव बढ़ सकता है। इन चिंताओं की वजह से बाजार इस क्षेत्र को लेकर अपने पुराने सकारात्मक नजरिये पर नहीं लौट पा रहा है। आगामी तिमाहियों में देखना होगा कि आवास, यात्री एवं वाणिज्यिक वाहन और टिकाऊ उपभोक्ता उत्पाद जैसे खंडों में ऋण की मांग कैसी रहती है। 
 
मंदी से संपत्ति की गुणवत्ता और एनबीएफसी के मुनाफे को नुकसान पहुंच सकता है और आगामी तिमाहियों में वृद्धि प्रभावित हो सकती है। यूबीएस सिक्योरिटीज के विश्लेषकों का मानना है कि ऋण वृद्धि की रफ्तार वित्त वर्ष 2016-2018 के दौरान 19 फीसदी थी। यह वित्त वर्ष 2018-2021 के दौरान एनबीएफसी के लिए घटकर 13 फीसदी और हाउसिंग फाइनैंस कंपनियों के लिए 14 फीसदी पर आ सकती है। हालांकि उनका रुख लाभ और संपत्ति की गुणवत्ता को लेकर सकारात्मक है। इस क्षेत्र की अनिश्चितताओं को मद्देनजर रखते हुए विश्लेषकों का रुख भी इस क्षेत्र के बड़े ऋणदाताओं जैसे बजाज फाइनैंस और एचडीएफसी को लेकर ही सकारात्मक है। इसमें कहा गया है कि वर्तमान स्तरों पर उनके शेयरों में निकट भविष्य में बढ़ोतरी की बहुत अधिक गुंजाइश नहीं है। 
Keyword: NBFC, bank, micro finance,,
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