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पुराने निजी बैंकों पर बाजार की नजर

श्रीपाद एस ऑटे /  April 21, 2019

बाजार लक्ष्मी विलास बैंक और इंडियाबुल्स हाउसिंग फाइनैंस के विलय पर भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के फैसले का बेसब्री से इंतजार कर रहा है। इस विलय की घोषणा इस महीने की शुरुआत में की गई थी। हो सकता है कि कुछ लोग बाजार के कयासों और दोनों ऋणदाताओं के आंतरिक स्तर पर विलय को मंजूरी देने के तत्काल बाद आए आरबीआई के स्पष्टीकरण केआधार पर अनुमान लगा रहे हों। लेकिन अगर नियामक ने इस विलय को मंजूरी दे दी तो इससे अन्य पुराने छोटे निजी ऋणदाताओं के शेयर भी आकर्षण का केंद्र बन सकते हैं। पुराने छोटे निजी बैंकों में करूर वैश्य बैंक, कर्णाटका बैंक, साउथ इंडियन बैंक और धनलक्ष्मी बैंक आदि शामिल हैं। 

 
इन बैंकों में से ज्यादातर के शेयर पिछले एक साल के दौरान 14 से 30 फीसदी लुढ़के हैं, जबकि इस दौरान निफ्टी बैंक सूचकांक 20 फीसदी चढ़ा है। इस गिरावट की मुख्य वजह इन बैंकों की संपत्ति गुणवत्ता की चिंता थी। इसके बावजूद बाजार की नजर में इन छोटे पुराने निजी बैंकों के आने का आधार यह है कि लक्ष्मी विलास बैंक घाटे में होने के बावजूद इंडियाबुल्स ने शेयर अदला-बदली अनुपात और वित्त वर्ष 2019 की अनुमानित बुक वैल्यू के आधार पर उसके मूल्यांकन पर 36 फीसदी प्रीमियम दिया है। 
 
शेयरखान में एवीपी ललिताभ श्रीवास्तव ने कहा, 'अगर विलय को आरबीआई की मंजूरी मिल गई तो इससे छोटे बैंकों के शेयरों में निवेशकों की रुचि बढ़ सकती है। अगर पुराने छोटे और क्षेत्रीय निजी बैंकों को अच्छी कीमत मिलती है तो उनमें से कई विलय या अधिग्रहण की संभावनाओं पर विचार कर सकते हैं।' दरअसल लक्ष्मी विलास बैंक की समायोजित बुक वैल्यू (नेट वर्थ में से फंसा कर्ज घटाने के बाद) दिसंबर, 2018 में ऋणात्मक थी। प्रस्तावित विलय के तहत लक्ष्मी विलास बैंक का मूल्यांकन उन बैंकों से दो से तीन गुना है, जिनका ऊपर जिक्र किया गया है। लक्ष्मी विलास बैंक की दक्षिण भारत में 569 शाखाएं हैं। हालांकि इन अन्य बैंकों के प्रदर्शन के आंकड़े अच्छे हैं। इससे पता चलता है कि इन बैंकों के मूल्यांकन से अधिक कीमत मिल सकती है। हालांकि कुछ बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि लक्ष्मी विलास बैंक और इंडियाबुल्स हाउसिंग सौदे का संभावित रणनीतिक मूल्य सृजन लक्ष्मी विलास बैंक के मूल्यांकन को तर्कसंगत साबित करता है। 
 
अशिका स्टॉक ब्रोकिंग के अनुसंधान प्रमुख (संस्थागत इक्विटी) आशुतोष मिश्रा ने कहा कि अगर आरबीआई लक्ष्मी विलास बैंक और इंडियाबुल्स हाउसिंग के सौदे को मंजूरी दे देता है तो अन्य कई गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियां (एनबीएफसी) पुराने निजी बैंकों में विलय के बारे में विचार कर सकती हैं। हाल में आईडीएफसी बैंक और कैपिटल फस्र्ट का विलय दर्शाता है कि किसी बैंक में विलय या अधिग्रहण एनबीएफसी के लिए बैंकिंग लाइसेंस हासिल करने या सार्वजनिक जमाएं स्वीकार करने का रास्ता हो सकता है। कुछ समय पहले इंडसइंड बैंक ने भी भारत फाइनैंशियल इनक्लूजन का अधिग्रहण किया था। यह रुझान आगे भी जारी रहने की संभावना है। उदाहरण के लिए वर्तमान माहौल में धनलक्ष्मी बैंक किसी एनबीएफसी का अधिग्रहण लक्ष्य हो सकता है। 
 
इन निजी बैंकों की अपने क्षेत्रों में मजबूत उपस्थिति है। इसलिए इनका अधिग्रहण या विलय किसी मजबूत बैंक द्वारा किए जाने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता है। इक्विनोमिक्स रिसर्च ऐंड एडवाइजरी के संस्थापक जी चोक्कालिंगम के मुताबिक नोटबंदी और सब्सिडी का प्रत्यक्ष हस्तांतरण शुरू होने के बाद शहरी इलाकों में बैंकों का विस्तार अपने चरम पर पहुंच चुका है। वहीं सूक्ष्म वित्त या सहकारी बैंकों से बने नए अनुसूचित वणिज्यिक बैंक अपने कारोबार को बढ़ाने के लिए पुराने निजी बैंको का विलय या अधिग्रहण कर सकते हैं। बड़े निजी बैंकों के पुराने निजी बैंकों का अधिग्रहण करने का क्रम काफी लंबे समय से चला रहा है। उदाहरण के लिए आईसीआईसीआई बैंक ने 2001 में बैंक ऑफ मदुरा का अधिग्रहण किया था। इसके अलावा 2007 में सांगली बैंक का आईसीआईसीआई बैंक में विलय हुआ था। सेंचुरियन बैंक का 2008 में एचडीएफसी बैंक में विलय हुआ था। इनसे इन बड़े बैंकों को अपनी भौगोलिक मौजूदगी और ग्राहक आधार बढ़ाने में मदद मिली।
 
इन पुराने निजी बैंकों में प्रवर्तकों की हिस्सेदारी मामूली है। इससे इन बैंकों की किसी अन्य बैंक या एनबीएफसी में विलय या अधिग्रहण की संभावनाएं और प्रबल हो जाती हैं। करूर वैश्य बैंक में प्रवर्तकों की हिस्सेदारी दिसंबर, 2018 में महज 2 फीसदी थी, जबकि मार्च, 2019 में कर्णाटका बैंक और साउथ इंडियन बैंक में प्रवर्तकों की कोई हिस्सेदारी नहीं थी। विशेषज्ञों का मानना है कि नियामक भी चाहेगा कि ये बैंक किसी प्रतिष्ठित ऋणदाता के हाथ में जाएं। कुल मिलाकर आरबीआई का फैसला लक्ष्मी विलास बैंक और इंडियाबुल्स हाउसिंग फाइनैंस के अलावा पुराने निजी बैंकों के शेयरों के लिए निर्णायक साबित होगा। 
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