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ब्रेंट के औसत दाम रहेंगे करीब 70 डॉलर : पॉल

पुनीत वाधवा /  April 19, 2019

कैलेंडर वर्ष 2019 में अब तक ब्रेंट कू्रड तेल के दाम 16 प्रतिशत से ज्यादा बढ़ चुके हैं। लंदन में एसऐंडपी ग्लोबल प्लैट्स के सहायक निदेशक पॉल हिकिन ने पुनीत वाधवा को बताया कि अगर अमेरिका ईरान पर प्रतिबंधों को लेकर बाजार की उम्मीद से अधिक कड़ा रुख अपनाता है तो बड़ा सवाल ईरान के तेल की मांग को लेकर होगा। बातचीत के अंश: 

 
आपका कच्चे तेल की कीमतों लेकर आगे का नजरिया क्या है? 
 
ब्रेंट क्रूड एक निश्चित दायरे में रहने के आसार हैं। इसके औसत दाम 2019 में करीब 70 डॉलर प्रति बैरल रह सकते हैं। लेकिन हाल में एसऐंडपी ग्लोबल प्लैट्स द्वारा प्रमुख बैंकों और तेल ब्रोकरों के बीच किए गए सर्वेक्षण के मुताबिक मांग और आपूर्ति का संतुलन कभी भी बिगड़ सकता है। इसकी वजह यह है कि इस साल के आखिर में अमेरिका में तेल की जितनी आपूर्ति बढ़ेगी, उतनी ही तेल निर्यातक देशों के संगठन (ओपेक) द्वारा उत्पादन में कटौती और ईरान तथा वेनेजुएला पर प्रतिबंधों के कारण कम हो जाएगी।  पिछले साल नवंबर में अमेरिका ने ईरान पर प्रतिबंध लगाया था। इस घटनाक्रम का तेल की आपूर्ति पर कोई असर न पड़े, इसके लिए सऊदी अरब और रूस ने उत्पादन बढ़ाया था। इसके चलते पिछले साल के अंत में तेल के दाम 50 डॉलर प्रति बैरल तक गिर गए थे, लेकिन अब कीमतों में काफी सुधार आ चुका है। अमेरिका के 8 देशों को प्रतिबंध से छूट देने और ओपेक के मुश्किल में होने के कारण अति आपूर्ति की स्थिति पैदा हो रही है। जनवरी के बाद से ओपेक उत्पादन में कटौती करने के अपने समझौते का पालन कर रहा है और उसकी अगली बैठक जून में होगी। उत्पादन को नियंत्रित करने की अगुआई सऊदी अरब कर रहा है। 
 
वैश्विक वृद्धि की धीमी रफ्तार और व्यापार युद्ध की आशंका को तेल बाजार किस तरह देख रहा है? 
 
व्यापार युद्ध की चिंताओं का वैश्विक आर्थिक वृद्धि और तेल की मांग पर असर पड़ रहा है। वैश्विक जीडीपी (सकल घरेलू उत्पाद) में 2019 में भी वृद्धि जारी रहेगी। हालांकि इसकी रफ्तार पिछले दो वर्षों के मुकाबले कम रहेगी। बाजार में मांग वृद्धि को लेकर चिंता है, खासतौर पर सबसे बड़े उपभोक्ता चीन को लेकर। विश्लेषकों ने अपने पूर्वानुमान घटाए हैं। सबसे बड़ा सवाल यह है कि अगर अमेरिका ईरान पर प्रतिबंधों को लेकर बाजार की उम्मीद से अधिक कड़ा रुख अख्तियार करता है तो ईरान के तेल की मांग कैसी रहेगी।  विश्लेषकों को उम्मीद है कि अधिकांश प्रमुख खरीदारों को नई छूट मिलेगी, लेकिन यह मामूली रहेगी। प्लैट्स एनालिटिक्स का अनुमान है कि नवंबर 2019 तक ईरान के तेल का निर्यात 8,00,000 बैरल प्रतिदिन तक घट जाएगा। हालांकि काफी कुछ तेल के सबसे बड़े खरीदार और ओपेक के तीसरे सबसे बड़े देश (ईरान) से तेल खरीदने में रुचि दिखाने वाले चीन पर भी निर्भर करेगा। ईरान ने कुछ हद तक प्रतिबंधों से पार पाने का तरीका खोज लिया है।
 
मौजूदा वैश्विक मांग-आपूर्ति और स्टॉक की स्थिति क्या है? आगे में कितनी बढ़ोतरी के आसार हैं? 
 
मासिक तेल बाजार पर ओपेक की ताजा रिपोर्ट के अनुसार जनवरी में वैश्विक तेल स्टॉक 2.88 अरब बैरल था, जो पांच साल के औसत से लगभग 1.91 करोड़ बैरल अधिक है। ओपेक अपनी वर्तमान उत्पादन नीति के तहत इसे कम करने की कोशिश कर रहा है। सबसे ज्यादा ध्यान आपूर्ति पर होना चाहिए क्योंकि वेनेजुएला और लीबिया जैसे ओपेक से इतर देशों की भी आपूर्ति में अहम भूमिका है। जहां तक मांग पक्ष की बात है तो आईएमओ 2020 के रूप में पहचाने जाने वाले समुद्री ईंधन नियमों में बदलाव होगा। यह एक बड़ा कारक है जिस पर ध्यान दिया जाना चाहिए। अगले साल की शुरुआत में जहाजों के ईंधन में गंधक की सीमा 3.5 प्रतिशत से घटाकर 0.5 प्रतिशत करने के इंटरनैशनल मैरीटाइम ऑर्गनाइजेशन के निर्णय ने उद्योग के लिए बहुत अनिश्चितता पैदा कर दी है और 2019 के आखिर में तेल की कीमतें बढ़ सकती हैं।
 
भारत की कच्चे तेल की मांग को लेकर आपका क्या अनुमान है?
 
कैलेंडर वर्ष 2019 की दूसरी तिमाही में भारत में डीजल मांग में भारी इजाफा होने के आसार नजर आ रहे हैं क्योंकि देश में आम चुनाव चल रहे हैं। इसके चलते रिफाइनरी सुधार योजनाओं में देरी कर रही हैं, निर्यात घटा रही हैं और मांग में बढ़ोतरी की उम्मीद में स्टॉक बढ़ा रही हैं। आम चुनावों और कुछ राज्यों में विधानसभा चुनावों से भारत में डीजल की खपत बढ़ेगी क्योंकि इन तीन महीनों के दौरान वाणिज्यिक वाहनों की मांग में बढ़ोतरी के आसार हैं। प्लैट्स एनालिटिक्स को उम्मीद है कि 2019 में भारत की कुल तेल उत्पादों की मांग बढ़कर करीब 2,35,000 बैरल प्रतिदिन रहेगी, जो 2018 में 2,00,000 बैरल प्रतिदिन थी। 
 
इन घटनाक्रमों पर अब ओपेक की क्या प्रतिक्रिया होगी?
 
ओपेक से अब तक जो संकेत मिले हैं, वे यह हैं कि वे लोग ईरान पर अमेरिकी नीति को लेकर बहुत जल्द प्रतिक्रिया देने की गलती नहीं करना चाहते हैं और वे इस बात का इंतजार करेंगे कि अमेरिका भारत, चीन और दक्षिण कोरिया को दी हुई मियाद में बढ़ोतरी को लेकर क्या रवैया अपनाता है।
Keyword: crude oil, price, iran, america,,
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