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नरेश गोयल के सपनों की उड़ान का एक अवसान

सियासी हलचल
आदिति फडणीस /  April 19, 2019

नरेश गोयल (उनके मित्र उन्हें एन जी कहकर पुकारते हैं) पंजाब के पटियाला शहर के रहने वाले हैं। जिस वक्त उनके पिता का निधन हुआ, वह बहुत छोटे थे। उनकी मां (वह उन्हें बीजी कहते) सेठ चरण दास की गोद ली हुई बहन थीं। दास पटियाला के महाराजा के प्रबंधक थे। गोयल की मां ने दास से विनती की कि वे चार भाइयों में सबसे छोटे एनजी को अपनी शरण में लें। सेठ चरण दास दूरदर्शी उद्यमी थे। सन 1965 में बहुत ही कम लोग विदेश यात्रा के लिए विमानों का इस्तेमाल करते थे। उस वक्त सेठ चरण दास ने मिडल ईस्टर्न एयरवेज का जनरल सेल्स एजेंट (जीएसए) बनने की पेशकश की। 

 
जीएसए की अवधारणा भारत में विकसित हुई। हालांकि ब्रिटिश एयरवेज, एयर फ्रांस और केएलएम जैसी अंतरराष्ट्रीय कंपनियों के बड़े-बड़े कार्यालय थे लेकिन उनके पास ऐसा कोई नहीं था जो पंजाब जैसे राज्यों के दूरदराज गांवों से आने वाले लोगों की हवाई यात्रा में मदद कर सके। जीएसए कमीशन लेकर बड़ी विमानन सेवाओं की वितरण संबंधी जरूरतें पूरी करते थे। जीएसए को एक क्षेत्र विशेष आवंटित किया जाता और दिल्ली में कार्यालय उपलब्ध कराया जाता। उन दिनों जालंधर पंजाब का केंद्र था और केएलएम और ब्रिटिश एयरवेज के जीएसए वहीं से काम करते थे। 
 
सेठ चरण दास दूरदर्शी व्यक्ति थे। मिडल ईस्टर्न एयरवेज के अलावा वह एयर फ्रांस और दो अन्य यूरोपीय विमान कंपनियों के जीएसए बन गए। इस वक्त तक एनजी उनके पास आ गए। सेठ चरण दास ने कारोबार स्थापित कर लिया था लेकिन उन्हें इसे चलाने वाले व्यक्ति की आवश्यकता थी, एन जी ने यह कमी दूर कर दी। एनजी ने काम के दौरान ही सबक लिए। सन 1970 के दशक के मध्य में उनकी मित्रता एयर फ्रांस के प्रबंधक से हो गई और वह गोवा के लिए कंपनी के जीएसए बन गए। परंतु वह केवल तत्कालीन बांबे में ही टिकट बेच सकते थे। यह बहुत बड़ा कारोबार था और इसने उनकी कंपनी के विकास में मदद की। बाद में यूरोप का इलाका तथा अन्य विमानन कंपनियां उनके कारोबार का हिस्सा बनीं। सन 1972 में वह गल्फ एयर के अखिल भारतीय जीएसए बन गए। 
 
खाड़ी देशों में रोजगार की उछाल आने को थी। इसका भरपूर फायदा एनजी को मिला। सन 1970 के दशक के आरंभ में उन्होंने फिलीपीन एयरलाइंस से बात की और वह उसके क्षेत्रीय प्रमुख बन गए। हालांकि उस वक्त कंपनी भारत में एक भी उड़ान का परिचालन नहीं कर रही थी। इससे उन्हें आईएटीए में प्रवेश मिल गया। इससे उन्हें नेटवर्किंग में फायदा मिला। उन्होंने आईएटीए की हर सालाना बैठक में भाग लिया है। ऐसी ही एक बैठक में उन्होंने अमेरिकी संघीय विमानन प्राधिकार के प्रमुख मैरियन ब्लैक्ले से कहा था कि वह इंतजार करें उन्हें उनसे बात करनी है। इसके बाद एनजी कक्ष में मौजूद तमाम लोगों से हाथ मिलाते और चर्चा करते रहे और दुनिया के सबसे ताकतवर मुल्क का प्रतिनिधि प्रतीक्षा करता रहा। 
 
सन 1996 में सीएम इब्राहिम गठबंधन सरकार में विमानन मंत्री थे। नरेश गोयल के लिए यह समय मुफीद था। उस वक्त घरेलू विमानन कंपनी में 49 फीसदी एफडीआई की नीति थी। वहीं अनिवासी भारतीयों के लिए यह 100 फीसदी थी। उस वक्त तक वह अनिवासी भारतीय बन चुके थे। हालांकि कोई विदेशी विमानन कंपनी प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से कोई निवेश नहीं कर सकती थी। इस प्रकार उन्होंने एक नई विमानन कंपनी में सिंगापुर इंटरनैशनल एयरलाइंस के निवेश को रोका, जिसे टाटा समूह शुरू करना चाहता था। सरकार में उनकी पहचान ने उनकी मदद की। 
 
जेट में चुनिंदा राजनेताओं की श्रेणी को उन्नत करने के स्पष्ट निर्देश थे। इसके अलावा भी उनको प्रभावित करने के और तरीके थे। एक बार शरद पवार एक हवाई अड्डे के लाउंज में बैठकर क्रिकेट देख रहे थे। नरेश गोयल ने अपने जीवन में भी क्रिकेट नहीं खेला था न ही उन्हें उसके बारे में कुछ पता था। इसके बावजूद वह पवार के बगल में बैठकर खेल पर ऐसे निगाह जमाए रहे जैसे उन्हें इस खेल में बहुत दिलचस्पी हो। जब-जब पवार ताली बजाते, वह भी ताली बजाते। उनको जानने वाले यह दिलचस्प नजारा देखकर हंस रहे थे। सन 2008 में जेट स्टॉक एक्सचेंज में सूचीबद्ध होने वाली थी। हैदराबाद में एयरशो हो रहा था। उस वक्त फलकनुमा पैलेस होटल में एक शानदार पार्टी का आयोजन किया गया। प्रफुल्ल पटेल नागर विमानन मंत्री थे और चर्चा थी कि जेट को अमेरिका में उड़ान संचालित करने की इजाजत मिल सकती है। यह बड़ा सौदा था।
 
उसी वक्त कंपनी का आकार कम करने की कोशिश में एनजी ने केबिन क्रू और ग्राउंड स्टाफ में कई लोगों की छंटनी कर दी। तो एक ओर जहां फलकनुमा में शानदार पार्टी हो रही थी, वहीं दूसरी ओर हैदराबाद एयरपोर्ट पर जेट के कर्मचारी प्रदर्शन कर रहे थे और नागर विमानन मंत्री प्रफुल्ल पटेल को संदेश भेज रहे थे कि उन्हें अपने बच्चों का पेट भरना है। तब सरकारी विमानन कंपनी एयर इंडिया ने कहा था कि वह अपने कर्मचारियों को वैसे कभी नहीं निकालेगी जैसे निजी विमानन कंपनियां निकालती हैं।
 
फलकनुमा में मौजूद पटेल को शर्मिंदगी उठानी पड़ी और वह बेहद नाराज हुए। एनजी एक योजना लेकर आए। उन्होंने उसी शाम गंभीर मुखमुद्रा के साथ एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित किया और कहा, 'बीती रात मेरी मां सपने में आई। उन्होंने कहा कि नरेश तुम क्या कर रहे हो? इन लोगों के परिवार और बाल बच्चे हैं। तुम उनको ऐसे कैसे निकाल सकते हो। इसलिए मैं अपने सारे ओदश वापस लेता हूं, किसी को काम से नहीं निकाला जाएगा।' जाहिर है बाद में इन कर्मचारियों को ऐसी दूरदराज जगहों पर स्थानांतरित किया गया कि उनके पास काम छोडऩे के अलावा कोई विकल्प ही नहीं था। विडंबना देखिए कि नरेश गोयल को उड़ान से नफरत है। वह हर बार उड़ान के समय घबरा जाते हैं और प्रार्थना करते हैं। अब जेट एयरवेज भी शायद ही उड़ान भरे।
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