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छह महीने में 10 हजार खुदरा निवेशक जेट के शेयर में फंसे

सचिन मामबटा / मुंबई April 18, 2019

जेट एयरवेज पर लगातार दबाव के संकेत के बावजूद पिछले छह महीने से खुदरा निवेशक जेट एयरवेज के शेयर खरीद रहे हैं। भारतीय स्टेट बैंक और अन्य लेनदारों ने जब कंपनी को और फंड देने से इनकार कर दिया तो बुधवार को जेट ने परिचालन बंद कर दिया। यह स्थिति किंगफिशर एयरलाइंस की याद दिलाता है क्योंंकि तब भी खुदरा निवेशक कंपनी के कायापलट की उम्मीद में इसके शेयर खरीद रहे थे। जेट एयरवेज के खुदरा निवेशकों की कुल संख्या पिछले छह महीने में 11,680 बढ़ी है। खुदरा निवेशक उन्हें कहा जाता है जो कंपनी के 2 लाख रुपये तक के शेयर खरीद सकते हैं। उनकी कुल हिस्सेदारी इस अवधि में 9.82 फीसदी से बढ़कर 11.42 फीसदी पर पहुंच गई। मार्च 2019 में विमानन कंपनियों के खुदरा निवेशकों की संख्या 1.38 लाख थी।
 
वित्त्तीय सेवा फर्म प्रभुदास लीलाधर के मुख्य कार्याधिकारी (पोर्टफोलियो मैनेजमेंट सर्विसेज) अजय बोडके के मुताबिक, कराधान व टैरिफ की नीतियों आदि के चलते पूरा विमानन क्षेत्र मुश्किलों का सामना कर रहा है। इससे इस क्षेत्र व इसकी वित्तीय सेहत पर असर पड़ा है। साथ ही विभिन्न विमानन कंपनियों के मालिकों के कमजोर प्रबंधन का भी प्रभाव पड़ा है। उन्होंने कहा, किंगफिशर, डेक्कन, सहारा आदि की नाकामी के बाद अब जेट एयरवेज नाकाम हुई है। राष्ट्रीय विमानन कंपनी एयर इंडिया को करदाताओं के हजारों करोड़ रुपये देकर सरकार ने जिंदा रखा है। विमानन अधिकारियों के लिए अब इस पर गंभीरता से नजर डालने का समय आ गया है कि आखिर भारत देसी विमानन कंपनियों के लिए कब्रगाह क्यों बन रहा है।
 
31 दिसंबर 2018 को जेट का शुद्ध कर्ज 7,299 करोड़ रुपये था। इसका संचयी नुकसान 13,980 करोड़ रुपये पर पहुंच गया है। इस कंपनी को शुरुआती तौर पर बैंकों से 1,500 करोड़ रुपये का अंतरिम फंड मिलना था। बताया जाता है कि बैंकों के बीच इस पर सहमति नहीं बन पाई, जिसके बारे में कुछ लोगों ने कहा कि इस कदम से लेनदार और रकम गंवा देंगे। जेट एयरवेज के मुख्य कार्याधिकारी विनय दुबे ने कंपनी की वेबसाइट पर एक बयान में कहा है, बुधवार की रात एसबीआई ने हमें भारतीय लेनदारों केकंसोर्टियम के बदले सूचित किया कि अंतरिम फंड के तौर पर कंपनी के अनुरोध को स्वीकार करने में हम सक्षम नहीं हैं। चूंकि लेनदारोंं से व अन्य स्रोतों से आपात फंड नहीं मिला, लिहाजा परिचालन की खातिर र्ईंधन व अन्य खर्च का भुगतान करना हमारे लिए संभव नहीं होगा। पिछले कुछ हफ्तों व महीनों में हमने रकम पाने के लिए हर संभव कोशिश की, लेकिन ऐसा नहीं हो पाया। दुर्भाग्य से कोशिशों के बावजूद हमारे पास कोई विकल्प नहीं बचा।
 
कंपनी का शेयर आज 31.08 फीसदी की गिरावट के साथ 165.75 रुपये पर रहा। ऐंजल ब्रोकिंग के मुख्य कार्याधिकारी ने कहा, ऐसी कंपनियों में निवेशकोंं को निवेश से बचना चाहिए जहां परिचालन बंद हो गया हो और कायापलट की संभावना काफी कम हो। उन्होंने कहा, लोग इसी तरह किंगफिशर में फायदा उठाना चाह रहे थे। वह कंपनी बंद हो गई और शेयर गैर-सूचीबद्ध हो गया।
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