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फसल मूल्य का पूर्वानुमान लगाने वाली सेवा किसानों की मददगार

खेती-बाड़ी
सुरिंदर सूद /  April 17, 2019

कृषि विपणन की एक खास खामी पर अभी तक पर्याप्त ध्यान नहीं दिया गया है। विभिन्न फसलों के अनुमानित मूल्य व्यवहार यानी बाजार बुद्धिमत्ता के बारे में अग्रिम सूचना का भारी अभाव रहा है। यह जानकारी किसानों के लिए सूझबूझ भरा फैसला लेने के लिए महत्त्वपूर्ण है ताकि वे फैसला कर सकें कि किस फसल को कितना उगाया जाए और उसे कब एवं कहां बेचा जाए? कृषि बाजार के बारे में सूचना देने वाली मौजूदा सेवाओं में सामान्य तौर पर केवल बड़ी मंडियों में प्रभावी कीमतों का ही उल्लेख होता है। ये जानकारियां किसानों के लिए सीमित उपयोगिता वाली ही होती हैं क्योंकि अलग स्थानों पर अलग समय पर इनके भावों में अंतर होता है। सब्जियों और फलों जैसे बड़े पैमाने पर उगाए जाने वाले और जल्द खराब होने वाले उत्पादों के दाम में काफी उतार-चढ़ाव देखा जाता है। किसान बेहतर रिटर्न के लिए इनकी खेती करते हैं लेकिन भरोसेमंद विपणन परामर्श नहीं होने से उनकी मेहनत अक्सर बेकार हो जाती है।

 
विपणन संबंधी परामर्श तमाम दूसरी वजहों से भी जरूरी है। कृषि क्षेत्र में कीमत पड़ताल और मूल्य जोखिम प्रबंधन के तरीके और साधन काफी सीमित हैं। दुनिया भर में मूल्य पड़ताल और मूल्य जोखिम हेजिंग के लिए वायदा कारोबार और उससे भी बढ़कर विकल्प कारोबार साधनों का इस्तेमाल किया जाता है लेकिन भारत में अधिकांश खाद्य उत्पादों के लिए इनकी इजाजत नहीं है। इसके अलावा सरकार द्वारा निर्धारित मूल्य पर कृषि उत्पादों की सरकारी खरीद और भाव-अंतर भुगतान प्रणाली जैसी मौजूदा मूल्य आश्वासन योजनाएं किसानों के एक छोटे हिस्से को ही संरक्षण दे पाई हैं। बाकी किसान अपनी उपज को नजदीकी मंडियों में उसी भाव पर बेच देते हैं जो शोषक कारोबारी उन्हें देता है। भले ही किसान इस बात से बेखबर नहीं हैं कि उपज की कीमत खरीद-बिक्री का असली समय खत्म होने के बाद ही बढ़ती है फिर भी वे उपज की बिक्री को देर तक टाल नहीं सकते हैं क्योंकि उन्हें आगे होने वाली मूल्य वृद्धि का कोई अंदाजा ही नहीं होता है। उपज को अपने पास रखना किसान के लिए उल्टा नतीजा देने वाला भी साबित हो सकता है अगर आलू, प्याज और टमाटर जैसी उपज के भंडारण पर आई लागत की भरपाई नहीं हो पाती है। 
 
ऐसे में उपज की खरीद-बिक्री के बारे में मिलने वालीभरोसेमंद सलाह से होने वाले लाभों का प्रदर्शन कुछ पायलट परियोजनाओं में देखने को मिला है। सार्वजनिक क्षेत्र के कुछ शोध निकायों की तरफ से ये पायलट परियोजनाएं चलाई गई हैं। इनमें सबसे अहम परियोजना भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) ने चलाई थी और 2017-18 की वार्षिक रिपोर्ट में इसका उल्लेख भी किया है। देश भर में फैले 14 संस्थानों के नेटवर्क के जरिये लागू की गई इस पायलट परियोजना में 40 से अधिक कृषि उत्पादों के बारे में साल भर में दो बार मूल्य पूर्वानुमान जारी करना था। उपज के बारे में पहला पूर्वानुमान फसल की बुआई के पहले किया जाना था जबकि दूसरा पूर्वानुमान फसल कटाई के समय लगाया जाना था। इसके बारे में बताने के लिए संचार के हरसंभव साधन का इस्तेमाल किया गया। निजी संपर्क, एसएमएस, पर्चों का वितरण, टीवी, रेडियो, कृषि विश्वविद्यालयों की वेबसाइट, फेसबुक, व्हाट्सऐप और यूट्यूब के जरिये किसानों को इन पूर्वानुमान के बारे में जानकारी दी गई।
 
इस सेवा के असर का विश्लेषण करने पर पता चला कि उत्तर प्रदेश के आलू उत्पादक किसानों ने बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के विशेषज्ञों से मिली सलाह पर अमल करते हुए अपनी उपज मार्च-अप्रैल के परंपरागत वक्त के बजाय मई के महीने में बेची तो उन्हें औसत भाव से 30-40 फीसदी ऊंची कीमतें मिलीं। इस तरह उन्हें प्रति क्विंटल 100-150 रुपये की अधिक आय हुई। इसी तरह गुजरात के कपास उत्पादक किसानों ने जूनागढ़ स्थित राज्य कृषि विश्वविद्यालय की तरफ से मिली सलाह पर अमल करते हुए औसतन 36,000 रुपये अधिक कमाए। 
 
अगर सार्वजनिक क्षेत्र की इकाइयां किसानों को इतनी लाभप्रद सलाह दे सकती हैं तो निजी कंपनियां शायद कहीं बेहतर तरीके से इस काम को अंजाम दे सकती हैं। निजी कंपनियां किसानों की विभिन्न जरूरतों को पूरा करने के लिए कहीं अधिक विविध एवं मूल्य-वद्र्धित सूचनाएं देने के नए मॉडल ईजाद कर सकती हैं। सहकारिता क्षेत्र की खाद कंपनी इफ्को की तरफ से शुरू की गई किसान संचार सेवा इस मामले में एक नजीर बन सकती है। इफ्को ने भारती एयरटेल और स्टार ग्लोबल रिसोर्सेज लिमिटेड के सहयोग से किसानों को फसल कीमत का पूर्वानुमान देना शुरू किया। 
 
वर्ष 2017-18 में इफ्को किसान संचार सेवा ने करीब 20 लाख किसानों को स्थानीय भाषाओं में करीब 75,000 वॉयस संदेश भेजे थे। इस दौरान बाजार के अनुमानित भावों के अलावा खेती एवं पशुपालन से जुड़े अन्य पहलुओं, मौसम पूर्वानुमान, सरकारी योजनाएं और कृषि जगत से संबंधित समाचार भी प्रसारित किए गए। अगर कृषि व्यवसाय में लगी दूसरी कंपनियां भी इसी तरह की परामर्श सेवाएं लेकर आती हैं तो कृषि उपज की मार्केटिंग करना अधिक लाभदायक हो सकेगा। इससे भारतीय कृषि भी अधिक मुनाफा कमाने का क्षेत्र बन सकेगी। 
Keyword: agri, farmer, crop, monsoon, iffco,,
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