बिजनेस स्टैंडर्ड - संपत्ति का स्वामित्व : आवंटन पत्र से तय होती है खरीद की तारीख
 Search  BS Hindi  Web   BS E-Paper|      Follow us on 
Business Standard
Saturday, November 16, 2019 02:04 AM     English | हिंदी

होम

|

बाजार

|

कंपनियां

|

अर्थव्यवस्था

|

मुद्रा

|

विश्लेषण

|

निवेश

|

जिंस

|

क्षेत्रीय

|

विशेष

|

विविध

|

अर्थनामा

 
होम विश्लेषण खबर

संपत्ति का स्वामित्व : आवंटन पत्र से तय होती है खरीद की तारीख

तिनेश भसीन /  April 17, 2019

संपत्ति का मालिकाना हक मिलने की प्रक्रिया लंबी हो सकती है। खासकर आज के दौर में, जब बहुत सी परियोजनाओं में देर हो रही है और कई तो ठप पड़ी हैं। ऐसे ढेरों खरीदार हैं, जो कई साल पहले अपने मकानों के लिए पूरे पैसे भर चुके हैं, लेकिन आज भी उन्हें मकान की चाबी अपने हाथ में आने का इंतजार है। इस सूरत में खरीद की तारीख क्या मानी जाएगी खासकर उस स्थिति में, जब पूंजीगत लाभ तय करने के लिए यह तारीख बेहद जरूरी हो। इसे लंबी अवधि का पूंजीगत लाभ माना जाएगा या अल्प अवधि का कहा जाएगा?
 
मान लीजिए, किसी व्यक्ति ने 2012 में कोई मकान बुक किया और डेवलपर ने उसे आवंटन पत्र भी दे दिया। इसके अगले साल उसने अपने मकान की रजिस्ट्री भी करा ली। उसने तीन साल के भीतर यानी 2015 तक अपने मकान की पूरी कीमत डेवलपर को अदा भी कर दी। लेकिन मकान उसके सुपुर्द करने में देर की गई और खरीदार को उसका मकाना 2018 में मिला। ऐसे में कर के लिहाज से खरीद का साल कौन सा माना जाएगा - 2012, 2013, 2015 या 2018? बंबई उच्च न्यायालय ने पिछले दिनों अपने एक फैसले में कहा कि आवासीय इकाई की खरीद की तारीख वह मानी जानी चाहिए, जिस दिन डेवलपर ने आवंटन पत्र जारी किया। इससे पहले बहुत से न्यायाधिकरणों का भी यही फैसला था। हाल के मामले में खरीदार को 31 दिसंबर, 2004 को आवंटन पत्र मिला था, लेकिन दोनों के बीच जो करारनामा हुआ, उसकी तारीख 17 मई, 2008 थी। जब उस व्यक्ति ने वित्त वर्ष 2008-09 में फ्लैट बेचा तो उसने दीर्घावधि पंूजीगत लाभ के तहत कर लाभ का दावा कर दिया। लेकिन कर अधिकारी ने उसके दावे को मानने से और यह लाभ देने से इनकार कर दिया। अधिकारी ने कहा कि खरीद की तारीख वही मानी जाएगी, जिस दिन करारनामा किया गया था। लेकिन उच्च न्यायालय ने अधिकारी की दलील ठुकरा दी और करदाता के पक्ष में फैसला सुना दिया।
 
कर विशेषज्ञों की राय है कि ऐसे मामलों में केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) के 15 अक्टूबर, 1986 को जारी परिपत्र संख्या 471 का हवाला दिया जा सकता है। सीबीडीटी ने उसमें स्पष्टï तौर पर कहा था कि दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) की स्व-वित्तपोषण योजना के तहत जो भी करदाता संपत्ति बुक कराते हैं, उनकी संपत्ति की खरीद की अवधि आवंटन पत्र जारी होने की तारीख से ही गिनी जाएगी। पीडब्ल्यूसी में पार्टनर और लीडर (पर्सनल टैक्स) कुलदीप कुमार ने कहा, 'हालांकि इसके आधार पर फैसले जारी किए गए हैं, लेकिन इस को भी मुकदमे के जरिये चुनौती दी जा सकती है। प्राधिकरण इसे चुनौती दे सकते हैं और सुपुर्दगी की तारीख को मालिकाना हक की तारीख मान सकते हैं। इस बारे में कर कानूनों में कोई विशेष प्रावधान नहीं है और यह विभिन्न विशेष परिस्थितियों पर निर्भर करता है।' 
 
कई बार कर न्यायाधिकरण और अदालतें खरीदारों की मंशा को भी जांचती हैं। चार्टर्ड अकाउंटेंट और अरविंद राव ऐंड एसोसिएट्स के संस्थापक अरविंद राव ने कहा, 'अगर खरीदार का असल इरादा फ्लैट खरीदने का था और उसके जरिये वह लाभ कमाना भर नहीं चाहता था तो आवंटन की तारीख ही पर्याप्त है।' वह समझाते हैं, 'इरादे या मंशा का पता तो आवंटन पत्र देखकर ही लग जाता है। अगर आवंटन पत्र में मकान से जुड़ा पूरा ब्योरा जैसे फ्लैट नंबर, फ्लोर आदि मौजूद रहते हैं तो बेहतर होता है।' कुमार की राय है कि आवंटन पत्र में दिए गए नियम एवं शर्तें अहमियत रखती हैं। कुमार कहते हैं, 'संबंधित तथ्यों एवं परिस्थितियों पर ध्यान देना बहुत जरूरी है, जैसे आवंटन पत्र के नियम एवं शर्तें क्या हैं, 'अधिकार' से 'इमारत' में  तब्दीली स्वत: यानी ऑटोमैटिक है या शर्तों पर निर्भर है और खरीदार ने भुगतान कितना और किस तरह किया है।'
 
अगर कोई व्यक्ति खुद ही अपना घर बनवा रहा हो तो उसके मालिकाना हक की तारीख को दो हिस्सों में बांट दिया जाएगा। एक तारीख प्लॉट के लिए होगी और दूसरी निर्माण पूरा हो जाने की तारीख होगी। अगर घर बेचने से हासिल होने वाली राशि पर दीर्घावधि पूंजीगत लाभ हासिल करना है तो प्लॉट और मकान दोनों को ही दो साल से ज्यादा वक्त तक अपने पास रखना होगा। राव तो बताते हैं कि आवंटन के दो साल बाद अगर मकान निर्माणाधीन ही है तो भी खरीदार उसे बेचकर दीर्घावधि पूंजीगत लाभ कर का फायदा उठा सकते हैं। जो लोग मकान का निर्माण पूरा हो जाने के बाद बेचेंगे, उन्हें धारा 54 के तहत कर लाभ मिलेंगे। लेकिन इस धारा के मुताबिक आवासीय संपत्ति से हुए लाभ को नई संपत्ति में निवेश करना पड़ता है। जो खरीदार निर्माणाधीन मकान बेचते हैं, उन्हें धारा 54एफ का लाभ मिलता है। इस धारा के प्रावधानों के अनुसार भी दीर्घावधि पूंजीगत संपत्ति से प्राप्त होने वाली समूची रकम को नए मकान में निवेश करना होगा। 
Keyword: property, income tax, CBDT, आयकर विभाग कराधान,
Advertisements
  Cover from Earthquake & Floods. Buy Home Insurance
   Get seamless access to Business Standard & WSJ.com starting at just Rs. 49/- per month*
Display Name  Email-Id  
Post your comment

CAPTCHA Image Reload Image Enter Code*:
  आपका मत
 क्या बैंक जमा पर बीमा गारंटी बढ़ाने से ग्राहकों के बीच बढ़ेगा भरोसा?
हां नहीं  
पढ़िये
ईमेल
About us Authors Partner with us Jobs@BS Advertise with us Terms & Conditions Contact us RSS Site Map  
Business Standard Private Ltd. Copyright & Disclaimer feedback@business-standard.com
This site is best viewed with Internet Explorer 6.0 or higher; Firefox 2.0 or higher at a minimum screen resolution of 1024x768
* Stock quotes delayed by 10 minutes or more. All information provided is on "as is" basis and for information purposes only. Kindly consult your financial advisor or stock broker to verify the accuracy and recency of all the information prior to taking any investment decision. While due diligence is done and care taken prior to uploading the stock price data, neither Business Standard Private Limited, www.business-standard.com nor any independent service provider is/are liable for any information errors, incompleteness, or delays, or for any actions taken in reliance on information contained herein.