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एनपीए पर बैंकों को नहीं दे सकते राहत

आशिष आर्यन / नई दिल्ली April 16, 2019

भारतीय रिजर्व बैंक ने मंगलवार को नैशनल कंपनी लॉ अपीली ट्रिब्यूनल (एनसीएलएटी) से कहा कि 90 दिन के डिफॉल्ट के बाद बैंकों की जिम्मेदारी बनती है कि वह फंसे कर्ज को गैर-निष्पादित आस्तियों के तौर पर अंकित करे और इस पर बैंकों को राहत नहीं दी जा सकती। बैंंकिंग क्षेत्र के नियामक ने 25 फरवरी के आदेश में संशोधन के लिए एनसीएलएटी का दरवाजा खटखटाया है, जिसमें अपीली ट्रिब्यूनल ने कहा था कि आईएलऐंडएफएस व इसकी सहायक कंपनियों के खाते को बिना मंजूरी के गैर-निष्पादित आस्तियों के तौर पर वर्गीकृत नहीं किया जा सकता।
 
आरबीआई का प्रतिनिधित्व करने वाले वकील गोपाल जैन ने कहा, ऐसे कर्ज को एनपीए के तौर पर बताया जाना बैंकों के खाते में महत्वपूर्ण है क्योंंकि यह शुरुआती चेतावनी के तौर पर काम करता है। जैन ने कहा, आपको बैंकों के खाते की वास्तविकता जाननी होगी। अन्यथा अगर आप एनपीए नहींं दिखाते तो आप लगातार कर्ज के मूलधन पर ब्याज दिखाते जाएंगे और यह तस्वीर गुलाबी होगी। पूरी व्यवस्था पारदर्शी होनी चाहिए व लेखा की व्यवस्था उचित होनी चाहिए, ताकि संस्थान की सेहत प्रभावित न हो। 
 
बैंंकिंग क्षेत्र के नियामक ने कहा कि आईएलऐंडएफएस की समाधान प्रक्रिया पर कोई सवाल नहीं है और वह आदेश में संशोधन चाहता है ताकि बैंकोंं को अपने खाते में मास्टर सर्कुलर के लिहाज से एनपीए दर्ज करने की अनुमति मिले, जिसे सर्वोच्च न्यायालय ने भी उचित ठहराया है। एनसीएलएटी की सदस्यीय पीठ ने कहा कि ट्रिब्यूनल इस पर सवाल नहींं कर रहा है कि सर्कुलर के लिहाज से आरबीआई व बैंक के पास ये शक्तियां हैं, लेकिन वह सिर्फ इस पर फैसला करेगा कि क्या खातों को एनपीए घोषित किया जा सकता है।
 
पीठ ने कहा, कोई भी आपके सर्कुलर को खराब बताकर चुनौती नहीं दे सकता। हम आपके सर्कुलर के बारे में कुछ नहीं कह सकते। हम इस पर चर्चा कर रहे हैं कि क्या इसे एनपीए घोषित किया जा सकता है। जब इसे एनपीए घोषित किया जाएगा तो आईएलऐंडएफएस की कोई कंपनी समाधान के लिए नहीं जाएगी। इस मामले पर अगली सुनवाई 29 अप्रैल को होगी।
Keyword: bank, loan, debt, RBI, NPA,,
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