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कर्ज घटाएगी शापूरजी पलोनजी

अभिजित लेले / मुंबई April 15, 2019

अपने वित्तीय प्रोफाइल में सुधार के इरादे से शापूरजी पलोनजी ऐंड कंपनी प्राइवेट लिमिटेड (एसपीसीपीएल) ने एकल बाह्य कर्ज मार्च 2020 तक घटाकर 6,200 करोड़ रुपये पर लाने की योजना बनाई है, जो दिसंबर 2018 में 7,700 करोड़ रुपये से ज्यादा रहा था। समूह की परिचालक व होल्डिंग इकाई एसपीसीपीएल अगले छह से नौ महीने में अपनी 975 करोड़ रुपये की जमीन भी बेचेगी। कंपनी पहले ही अपनी जमीन बेचने की प्रक्रिया शुरू कर चुकी है। यह जानकारी रेटिंग एजेंसी केयर रेङ्क्षटग्स से मिली।
 
एसपीसीपीएल का कुल कर्ज एकल आधार पर वित्त वर्ष 2015-16 के 6,503 करोड़ रुपये के मुकाबले वित्त वर्ष 2017-18 में बढ़कर 7,562 करोड़ रुपये पर पहुंच गया। 31 दिसंबर 2018 के आखिर में इसका कुल कर्ज 7,753 करोड़ रुपये रहा था। अपना कर्ज घटाने के लिए कंपनी सार्वजनिक पेशकश के जरिए निवेश का मुद्रीकरण भी करने जा रही है। इसकी योजना स्टर्लिंग सोलर प्राइवेट लिमिटेड के आरंभिक सार्वजनिक निर्गम और आईपीओ पूर्व पेशकश के जरिये कैलेंडर वर्ष 2019 में 1,400 से 1,600 करोड़ रुपये जुटाने की है।
 
31 दिसंबर 2018 तक एसपीसीपीएल की तरफ से दी गई गारंटी मार्च 2018 के 3,689 करोड़ रुपये के मुकाबले बढ़कर 4,458 करोड़ रुपये पर पहुंच गई।इसमें एसपीसीपीएल की तरफ से विभिन्न सहायकों व संयुक्त उद्यमों को दिया गया लेटर ऑफ कम्फर्ट के जरिए कवर किया गया कर्ज शामिल नहीं है। केयर ने एसपीसीपीएल के पूंजीगत ढांचे के चलते (कॉरपोरेट गारंटी समेत) क्रेडिट वॉच पर लंबी अवधि की रेटिंग दी थी। इसके बाद समूह ने अपनी बैलेंस शीट को इक्विटी निवेश, कर्ज में कटौती आदि के जरिये सुधारने की रणनीतिक योजना पर विचार किया। वित्त वर्ष 2018-19 के आखिर में कंपनी को कुछ निश्चित परिसंपत्तियोंं का मुद्रीकरण करना था। रेटिंग अभी भी निगरानी के दायरे में है।
 
चुनौतीपूर्ण आर्थिक माहौल और बाजार की स्थिति के बावजूद समूह ने वित्त वर्ष 2019 की दूसरी छमाही में 900-1,000 करोड़ रुपये की परिसंपत्तियों का मुद्रीकरण किया। इसके दायरे में चेन्नई आईटी पार्क, पुणे आईटी पार्क और सोलर पोर्टफोलियो जैसी परिसंपत्तियां कवर हुईं। इसके अतिरिक्त प्रवर्तकों ने अपने स्रोत से कंपनी में करीब 1,700 करोड़ रुपये लगाए। एकल आधार पर निर्माण कारोबार एसपीसीपीएल का अहम कारोबार बना हुआ है, जो एसपीसीपीएल के राजस्व में 90 फीसदी से ज्यादा का योगदान करता है। इसकी ऑर्डर बुक 31 दिसंबर 2018 को 35,000 करोड़ रुपये की थी, जो 30 सितंबर 2018 को 36,000 करोड़ रुपये रही थी। इसकी ऑर्डर बुक में डिजाइन व निर्माण वाले अनुबंध, विदेशी बाजारों के ऑर्डर शामिल है, जिसका मार्जिन अपेक्षाकृत ज्यादा होता है।
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