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जितनी महिलाएं नहीं, उससे ज्यादा दागी उम्मीदवार

सचिन मामबटा /  April 15, 2019

इस बार देश के आम चुनाव में महिला उम्मीदवारों के मुकाबले उन उम्मीदवारों की तादाद ज्यादा है जिनके खिलाफ आपराधिक मामले चल रहे हैं। दो गैर-सरकारी संगठनों (एनजीओ) नैशनल इलेक्शन वॉच और एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉम्र्स (एडीआर) की रिपोर्ट बताती हैं कि लोकसभा के पहले दो चरण में चुनाव लडऩे वाली महिलाओं की तादाद महज 209 है जबकि आपराधिक आरोपों वाले उम्मीदवारों की तादाद 464 है।  इसका अर्थ यह हुआ कि करीब 16 फीसदी उम्मीदवारों ने अपने हलफनामों में अब तक खुद पर दर्ज आपराधिक मामलों का खुलासा किया है। कुल 1590 उम्मीदवारों में से 251 उम्मीदवारों के आपराधिक मामलों से जुड़े खुलासे का विश्लेषण चुनाव के दूसरे चरण में किया गया। पहले चरण में आपराधिक मामले वाले 213 उम्मीदवार थे। चुनाव के दो चरणों में शामिल कुल 2923 उम्मीदवारों में से रिपोर्ट में 2,856 उम्मीदवारों का विश्लेषण किया गया। कुछ उम्मीदवारों को इसमें नहीं शामिल किया गया क्योंकि पर्याप्त तरीके से जांचा हुआ हलफनामा उपलब्ध नहीं था। 

 
दूसरे चरण में हत्या के आरोपी छह उम्मीदवार शामिल हैं जबकि 25 उम्मीदवारों पर हत्या की कोशिश के आरोप हैं। इसके अलावा 8 ऐसे उम्मीदवार हैं जिन पर अपहरण के आरोप हैं। 15 उम्मीदवारों पर भड़काऊ  बातें कहने से जुड़े मामले दर्ज हैं। इसमें कहा गया है, '10 उम्मीदवारों ने अपने ऊपर महिलाओं से जुड़े अपराध के मामलों का जिक्र किया है जिनमें बलात्कार (आईपीसी की धारा-376), हमले या महिलाओं के शीलभंग के इरादे से उन पर आपराधिक बल का प्रयोग करना (आईपीसी की धारा-354), पति या पति के रिश्तेदारों द्वारा महिला के उत्पीडऩ (आईपीसी की धारा-498 ए) जैसे मामले शामिल हैं। इसकी तुलना में 120 उम्मीदवार (8 फीसदी) महिलाएं हैं। यह पहले चरण की 89 महिला उम्मीदवार (पहले चरण की कुल उम्मीदवारों का 7 फीसदी) की तुलना में ज्यादा हैं। आपराधिक मामलों वाले उम्मीदवारों को चुनाव से रोकने का प्रस्ताव भी था। 20वें विधि आयोग की अध्यक्षता करने वाले न्यायाधीश ए पी शाह ने फरवरी 2014 की रिपोर्ट में कहा है, 'चर्चा में यह बात भी आई कि लोगों को गलत मामलों में भी फंसाया जा सकता है ताकि उन्हें चुनाव लडऩे से रोका जा सके। कई राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों ने यह आशंका जताई है किऐसी अयोग्यता का इस्तेमाल राजनीतिक प्रतिशोध के हथियार के के तौर पर किया जाएगा।'
 
दिलचस्प बात यह है कि एक करोड़ से ज्यादा संपत्ति वाले भी कई उम्मीदवार हैं। चुनाव के दूसरे चरण में प्रत्येक उम्मीदवार की औसत संपत्ति 3.9 करोड़ है जो पहले चरण के उम्मीदवारों की 6.6 करोड़ रुपये की औसत संपत्ति के मुकाबले कम है। कई प्रमुख राजनीतिक दलों के उम्मीदवारों की औसत संपत्ति करोड़ रुपये से ज्यादा है जिनमें बहुजन समाज पार्टी (बसपा), कांग्रेस  भारतीय जनता पार्टी (भाजपा), द्रविण मुन्नेत्र कषगम (द्रमुक) और ऑल इंडिया अन्ना द्रविण मुन्नेत्र कषगम (अन्नाद्रमुक) शामिल हैं।
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