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सरकार का आकार कम होने के नजर नहीं आ रहे आसार

दिल्ली डायरी
ए के भट्टाचार्य /  April 15, 2019

केंद्र सरकार ने विभिन्न केंद्रीय मंत्रालयों में 9 पेशेवरों को पाश्र्विक नियुक्ति दी है, जिसका स्वागत किया जाना चाहिए। परंतु इससे एक और बात रेखांकित होती है कि देश की शासन व्यवस्था में सुधार के लिए अभी काफी कुछ किए जाने की आवश्यकता है। सच तो यह है न्यूनतम सरकार, अधिकतम शासन के वादे के बावजूद बीते कुछ वर्षों के दौरान सरकार की ओर से आकार को कम करने या नौकरशाही में सुधार के लिए कुछ खास नहीं किया गया। ऐसे में यह देखना जानकारीपरक है कि दोनों प्रमुख राजनीतिक दलों के 2019 के चुनाव घोषणापत्र में इस संबंध में क्या वायदा किया गया है। आश्चर्य नहीं कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और कांग्रेस दोनों ने एक बार फिर सरकार के आकार को कम करने और उसे प्रभावी बनाने की बात दोहराई है। 

 
भाजपा के घोषणापत्र में वादा किया गया है कि एक समान और पूरक विभागों को क्षेत्रवार मंत्रालयों में विलय किया जाएगा ताकि नीतियों का बेहतर क्रियान्वयन और तालमेल हो सके। इससे एक ओर नीति निर्माताओं को समग्र और व्यापक नीतियां बनाने का अवसर मिलेगा तो दूसरी ओर क्रियान्वयन सहज हो सकेगा। भाजपा ने अपने घोषणापत्र में न्यूनतम सरकार, अधिकतम शासन की बात को दोहराया है और नौकरशाही में सुधार लागू करने की बात भी कही है। कांग्रेस के घोषणापत्र में भी यह वादा किया गया है कि पार्टी केंद्र सरकार के मंत्रालयों और विभागों की संख्या कम करेगी। यह कमी उन क्षेत्रों में की जाएगी जिनमें राज्य सरकारें पर्याप्त क्षमता विकसित कर चुकी हैं। भाजपा घोषणापत्र के साथ इन समानताओं के अलावा कांग्रेस ने स्कूल शिक्षा, प्राथमिक और द्वितीयक स्वास्थ्य सुविधा, बाल पोषण, पेयजल, स्वच्छता और बिजली वितरण के क्षेत्र में राज्यों को प्राथमिकता देने और यह सुनिश्चित करने की बात कही है कि केंद्र सरकार, राज्य सरकारों के साथ सहयोगी भूमिका निभाएगी। विडंबना यह है कि दोनों घोषणापत्रों में एक-एक नए मंत्रालय के गठन का वादा भी किया गया है।
 
भाजपा ने नए जल मंत्रालय के गठन का वादा किया है। उम्मीद की जा रही है कि यह मंत्रालय जल प्रबंधन के कामकाज को समग्र बनाएगा और यह सुनिश्चित करेगा कि संबंधित प्रयासों का बेहतर ढंग से तालमेल किया जा सके। परंतु यह नहीं बताया गया है कि मौजूदा जल संसाधन मंत्रालय का क्या होगा, क्या इसका कामकाज नए मंत्रालय के हवाले हो जाएगा? परंतु घोषणापत्र से यह स्पष्ट है कि नया मंत्रालय राजग की ही पिछली वाजपेयी सरकार की नदी जोड़ परियोजना को देश भर में तेजी से आगे ले जाएगा और यह सुनिश्चित करेगा कि पेय जल और सिंचाई के पानी की कोई दिक्कत न हो। न केवल एक नया मंत्रालय बल्कि भाजपा ने एक नए प्राधिकार के गठन के साथ इस दिशा में काम करने का वादा भी किया है। 
 
दूसरी ओर कांग्रेस ने कहा है कि वह मत्स्यपालन और इससे जुड़े लोगों के लिए नए मंत्रालय का गठन करेगी। उसने मत्स्यपालन और उससे संबंधित लोगों के कल्याण के लिए नैशनल फिशरफॉक कमीशन गठित करने की बात कही है। इसके जरिए कर्ज और फंडिंक की जरूरतों का ध्यान रखा जाएगा।  प्रश्न यह है कि तब कृषि एवं कृषक कल्याण मंत्रालय के अधीन आने वाले मौजूदा मत्स्य विभाग का क्या होगा? ऐसा लगता है कि मंत्रालयों की संख्या कम होने के बजाय बढ़ेगी।  भाजपा और कांग्रेस के घोषणापत्र में एक और साझा बात है आदर्श पुलिस अधिनियम बनाने का वादा। दोनों दल राज्यों के साथ मशविरा करके यह कानून बनाना चाहते हैं। भाजपा को उम्मीद है कि आदर्श पुलिस अधिनियम के जरिए पुलिस को नागरिकों के अनुकूल बनाया जा सकेगा जबकि कांग्रेस का मानना है कि यह प्रस्ताव पुलिस बल को आधुनिक, तकनीक सक्षम और मानवाधिकार तथा विधिक अधिकारों से जोडऩे वाला बनाएगा। 
 
दोनों घोषणापत्र जीएसटी परिषद जैसी प्रणाली के माध्यम से और राज्यों के साथ मशविरा करके विकास को नए-नए क्षेत्रों में ले जाने की बात करते हैं। यह वादा संघवाद के प्रति प्रतिबद्घता को भी दर्शाता है। भाजपा जीएसटी परिषद के सिद्घांत को अन्य क्षेत्रों में ले जाने का वादा करती है और कहती है कि राज्यों केा साथ लेकन नीति निर्माण और शासन के विभिन्न पहलुओं पर काम किया जाएगा। कांग्रेस का वादा है कि वह जीएसटी परिषद की अवधारणा को आगे ले जाकर कृषि, शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में परिषद गठित करेगी। 
 
दोनों की समानताएं यहीं समाप्त हो जाती हैं। कांग्रेस ने कहा है कि वह नीति आयोग को भंग करके उसके स्थान पर कहीं बेहतर योजना आयोग लाएगी, जिसमें 100 से अधिक कर्मचारी नहीं होंगे। कांग्रेस इसके अलावा अनेक नए संस्थान गठित करना चाहती है- उच्च न्यायालयों के निर्णय और आदेशों की सुनाई के लिए छह नए अपीलीय न्यायालय, एक नया पर्यापत पूंजी वाला पर्यटन विकास बैंक ताकि पर्यटन क्षेत्र को पूंजी मिल सके, सीमांत किसानों और कृषि श्रमिकों के लिए आयोग तथा कृषि विकास एवं नियोजन पर एक स्थायी राष्ट्रीय आयोग जिसमें किसान, कृषि विज्ञानी और अर्थशास्त्री शामिल होंगे और कृषि को व्यवहार्य, प्रतिस्पर्धी और लाभकारी बनाने के सुझाव देंगे।  संक्षेप में कहें तो भाजपा और कांग्रेस के वादों में कई समानताएं हैं। परंतु अगली सरकार चाहे जिस राजनीतिक दल की बने, सरकार का आकार छोटा होने की उम्मीद नहीं है। यह वादा हमेशा कागजी ही रहेगा।
Keyword: parliament, election, ECI, BJP, congress,,
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