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स्टार्टअप फर्मों के लिए आसान हुई यूनिकॉर्न की राह

युवराज मलिक / बेंगलूरु April 14, 2019

देश के यूनिकॉर्न क्लब यानी एक अरब डॉलर मूल्यांकन वाली स्टार्टअप की सूची न केवल लंबी होती जा रही है बल्कि पिछले कुछ महीनों के दौरान इस मुकाम पर पहुंचने वाली कंपनियों की संख्या तेजी से बढ़ी है। आने वाले महीनों में इस प्रक्रिया के और तेज होने की उम्मीद है क्योंकि यूनिकॉर्न बनने के मुहाने पर खड़ी कंपनियों की संख्या सर्वकालिक उच्च स्तर पर है।  उद्योग के जानकारों और विश्लेषकों के मुताबिक पिछले साल देश में नौ स्टॉर्टअप कंपनियों ने यूनिकॉर्न का तमगा हासिल किया जबकि करीब एक दर्जन स्टार्टअप अपनी बारी का इंतजार कर रहे हैं और उनके इस वित्त वर्ष में यह उपलब्धि हासिल करने की प्रबल संभावना है। इनमें ऑनलाइन टैक्स फाइलिंग प्लेटफॉर्म क्लीयरटैक्स, स्थानीय भाषा कंटेंट फर्म डेलीहंट, भुगतान समाधान कंपनी रेजरपे, ऑटो क्लासीफाइड पोर्टल कारदेखो, भुगतान कंपनी लाइनलैब्स, लॉजिस्टिक्स टेक्रोलॉजी कंपनी रिविगो और कुछ अन्य स्टार्टअप शामिल हैं। 
 
वेंचर डेट फर्म ऑल्टीरिया कैपिटल के संस्थापक और मैनेजिंग पार्टनर विनोद मुरली ने कहा, 'एक अरब डॉलर मूल्यांकन क्लब में शामिल होने की रफ्तार इस समय सबसे अधिक है। बड़ी स्टार्टअप कंपनियां तेजी से अपने कारोबार को फैला रही हैं।' पिछले कई वर्षों से केवल चार भारतीय कंपनियां फ्लिपकार्ट, पेटीएम, ओला और ओयो ही यूनिकॉर्न क्लब में शामिल थीं जबकि कई अन्य इंटरनेट स्टार्टअप इसकी परिधि से बाहर थीं। पिछले 12 महीनों में सिकोया, सॉफ्टबैंक विजन फंड जैसी वेंचर कैपिटल कंपनियों और नेस्पर्स जैसे विदेशी रणनीतिक निवेशकों के साहसिक निवेश के दम पर कई अन्य स्टार्टअप इस क्लब का हिस्सा बने हैं। बैजूस, बिग बास्केट, स्विगी, डेलीवरी और उड़ान सहित नौ स्टार्टअप ने पिछले साल यूनिकॉर्न बनने का गौरव हासिल किया। 1एमजी और डेलीहंट जैसी स्टार्टअप जल्दी ही इस मुकाम पर पहुंच सकती हैं। 
 
ईवाई के मुताबिक 2018 में करीब 200 सौदों में कंज्यूमर इंटरनेट स्टार्टअप में 7 अरब डॉलर से अधिक राशि झोंकी गई। इससे खानपान, लॉजिस्टिक्स, भुगतान, ई-कॉमर्स, शिक्षा और सॉफ्टवेयर जैसे क्षेत्रों में कई मजबूत इंटरनेट कंपनियों का उदय हुआ है। वर्ष 2015-16 देश में स्टार्टअप कंपनियों में जमकर निवेश आया जब बाजार की अग्रणी कंपनियां बनाने के लिए बड़े विदेशी निवेशकों ने शीर्ष भारतीय वेंचर कैपिटल के साथ मिलाया। पेटीएम को देश की शीर्ष मोबाइल भुगतान सेवा बनाने के लिए चीन की दिग्गज ई-कॉमर्स कंपनी अलीबाबा और भुगतान कंपनी ऐंट फाइनैंशियल ने इसमें निवेश किया। सॉफ्टबैंक ने ओयो, ओला और ग्रोफर्स सहित कई कंपनियों पर दाव लगाया। वीचैट का मालिकाना हक रखने वाली टेंसेंट ने गाना, ड्रीम 11 और प्रेक्टो में निवेश किया जबकि नेस्पर्स ने बैजूस, स्विगी, ओएलएक्स और पेयू पर दाव लगाया। 
 
अपने क्षेत्र की अग्रणी स्टार्टअप कंपनियों के यूनिकॉर्न बनने से नंबर दो और नंबर तीन की राह आसान हुई। मोबाइल भुगतान सेवा में फोनपे, एमेजॉन पे और गूगल पे के बीच होड़ है जबकि ग्रोसरी के क्षेत्र में फ्लिपकार्ट तेजी से बिग बास्केट के करीब पहुंच रही है। स्वास्थ्य के क्षेत्र में पोर्टिया मेडिकल, लिबरेट और निरामय तथा शिक्षा में अनएकेडमी और टॉपर तेजी से आगे बढ़ रही हैं।  इस बीच कई नए क्षेत्र भी उभरे हैं। उदाहरण के लिए फ्लिपकार्ट के पूर्व शीर्ष अधिकारी अंकित नागोरी और मुकेश बंसल ने क्यूरफिट का गठन किया है जिसके तहत फिटनेस सेंटर, न्यूट्रीशन, मेंटल हेल्थ ऐंड एडवाइजरी को एक  साथ मिलाया जा रहा है। 
Keyword: startup, company, unicorn,,
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