बिजनेस स्टैंडर्ड - बकायेदारों को मिली है आधी रकम
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बकायेदारों को मिली है आधी रकम

आशिष आर्यन / नई दिल्ली April 14, 2019

भारतीय ऋणशोधन अक्षमता एवं दिवाला बोर्ड (आईबीबीआई) द्वारा दायर एक हलफनामे से पता चलता है कि सफल कॉरपोरेट दिवालिया समाधान प्रक्रिया (सीआईआरपी) से गुजरीं 88 कंपनियों में 1.42 लाख करोड़ रुपये के कुल स्वीकृत दावों में से लगभग 68,766 करोड़ रुपये दावेदारों को प्राप्त हुए। इन दावेदारों में परिचालन और वित्तीय लेनदार भी शामिल हैं। आईबीबीआई का यह हलफनामा नैशनल कंपनी लॉ अपीलेट ट्रिब्यूनल में पेश किया गया था। हलफनामे में शामिल आंकड़े 28 फरवरी तक के हैं। बिजनेस स्टैंडर्ड ने इस हलफनामे की प्रति देखी है।
 
एस्सार स्टील इंडिया लिमिटेड की मौजूदा सीआईआरपी की सुनवाई के दौरान 27 मार्च को अपीलीय न्यायाधिकरण ने आईबीबीआई से उन विभिन्न कंपनियों के परिचालन और वित्तीय लेनदारों के बीच कोष के औसत वितरण की जानकारी सौंपने को कहा था जो आईबीसी के तहत कर्ज समाधान प्रक्रिया में सफल रहीं। इन 88 कंपनियों के वित्तीय लेनदारों का कुल स्वीकृत दावा 1.30 लाख करोड़ रुपये पर था जिसमें से उन्हें 65,635 करोड़ रुपये मिले। हलफनामे से जुड़े आंकड़े में कहा गया है कि दूसरी तरफ, परिचालन लेनदारों ने 6,469 करोड़ रुपये के दावे किए थे जिसमें से उनहें 3,131 करोड़ रुपये प्राप्त हुए। 
 
बिजनेस स्टैंडर्ड ने शुरू में यह जानकारी दी थी कि इन 88 कंपनियों के वित्तीय लेनदारों के लिए, उनके स्वीकृत दावों के प्रतिशत के तौर पर प्राप्त रकम लगभग 48.24 प्रतिशत थी। वहीं परिचालन लेनदारों के लिए उनके स्वीकृत दावों के प्रतिशत के तौर पर यह रकम 48.41 प्रतिशत पर थी, जबकि इन सभी कंपनियों में वित्तीय और परिचालन लेनदारों, दोनों द्वारा प्राप्त की गई कुल रकम 48.25 प्रतिशत थी। सफल सीआईआरपी वाले इन 88 मामलों के अलावा, 70-75 मामले कानून की धारा 12(ए) के तहत वापस ले लिए गए क्योंकि कॉरपोरेट देनदार ने पूरा कर्ज चुकाने पर सहमति जता दी थी और अपनी कंपनी को दिवालिया प्रक्रिया से बाहर कर लिया था।
 
आईबीबीआई के चेयरमैन एम एस साहू ने बिजनेस स्टैंडर्ड को बताया कि लेनदारों द्वारा कंपनियों को नैशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (एनसीएलटी) में घसीटे जाने के बाद सैकड़ों मामले वापस ले लिए गए, लेकिन इससे पहले इन्हें भी सुना गया या स्वीकार किया गया था, क्योंकि कॉरपोरेट देनदार कर्ज चुकाकर ऋणदाताओं के साथ मामले निपटाने में कामयाब रहे। भूषण स्टील, इलेक्ट्रोस्टील स्टील्स, मोनेट इस्पात ऐंड एनर्जी, एमटेक ऑटो, और बिनानी सीमेंट्स जैसे बड़े नाम इन 88 कंपनियों की सूची में शामिल हैं।
 
सफल सीआईआरपी में शामिल भूषण स्टील ने 57,505 करोड़ रुपये के कुल दावे स्वीकार किए जिनमें वित्तीय लेनदारों के स्वीकृत दावे 56,022 करोड़ रुपये रहे। वित्तीय लेनदार 35,571 करोड़ रुपये वसूलने में कामयाब रहे, जो उनके स्वीकृत दावों का लगभग 63.5 प्रतिशत था। भूषण स्टील के परिचालन  लेनदारों ने अपेक्षाकृत बेहतर सौदे दर्ज किए, क्योंकि वे अपने 1,483 करोड़ रुपये के स्वीकृत दावों की तुलना में 1200 करोड़ रुपये प्राप्त करने में सफल रहे जिससे लगभग 81 प्रतिशत रिकवरी में मदद मिली।
 
वित्तीय और परिचालन लेनदारों के लिए रकम मिलने के बड़े मामलों में सिनर्जीज डूरे ऑटोमेटिव, श्री मेटालिक, मोनेट इस्पात ऐंड एनर्जी, एमटेक ऑटो और ऑर्किड फार्मा भी शामिल हैं।  साहू ने बिजनेस स्टैंडर्ड को बताया, 'आपको बीआईएफआर के तहत पिछली व्यवस्था की तुलना में आईबीसी प्रक्रिया पर विचार करना होगा। यदि आप समाधान प्रक्रिया की लागत पर विचार करें तो यह प्रात रकम का 0.5 प्रतिशत है, लेकिन बीआईएफआर में यह खर्च 9 प्रतिशत था। वहीं आईबीसी के तहत समाधान प्रक्रिया में लगने वाले समय के संदर्भ में बात की जाए तो मामले के समाधान में औसत 300 दिन लगते हैं।'
Keyword: IBC, code, IBBI, NCLT, RBI,,
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