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कृत्रिम मेधा से जुड़े भय में है आखिर कितनी सच्चाई?

तकनीकी तंत्र
देवांग्शु दत्ता /  April 14, 2019

कृत्रिम बुद्धिमता यानी एआई के व्यापक होते इस्तेमाल के बीच इसे लेकर भय का माहौल भी बढ़ता जा रहा है। फरवरी के मध्य में उस समय तूफान आ गया जब एक ओपन सोर्स एआई डेवलपर ने दुरुपयोग की आशंका के चलते अपने उत्पाद को सार्वजनिक करने से इनकार कर दिया। ओपनएआई सान-फ्रांसिस्को का एक गैर लाभकारी संस्थान है जिसके पास 100 लोगों की एक टीम है। इस संस्थान को विनोद खोसला, एलन मस्क, पीटर थिएल जैसे अरबपतियों से फंडिंग मिलती है। संस्थान का मिशन है यह सुनिश्चित करना कि जब भी आर्टिफिशियल जनरल इंटेलिजेंस (एजीआई) का आगमन हो, तब वह मानवता के हित में काम करे।

 
ओपनएआई, एजीआई को परिभाषित करते हुए कहता है कि यह एक ऐसा उच्च स्वायत्तता वाला तंत्र है जो अधिकांश आर्थिक कार्यों में मनुष्यों को पीछे छोड़ सकता है। ओपनएआई ने एआई सिस्टम को लेकर पर्चे भी जारी किए हैं जहां उसने परामानवीय क्षमताओं का प्रदर्शन किया। इतना ही नहीं यहां प्रशिक्षित रोबोटिक हाथों ने चीजों को थामने और उनको यहां-वहां रखने में पर्याप्त निपुणता का प्रदर्शन किया। ऊपर हमने जिस प्रोग्राम की बात की, वह एक टेक्स्ट जनरेटर था जिसे जीपीटी-2 का नाम दिया गया। इसे एक बिना निगरानी की मशीन लर्निंग के माध्यम से प्रशिक्षित किया गया। यह सुनने में थोड़ा अजीब लगता है। एआई का प्रयोग बहुत बड़े पैमाने पर ऐसे हथियारों में किया जाता है जो वास्तव में लोगों को जान से मारते हैं। इसका प्रयोग ऐसे स्वायत्त वाहनों में भी किया जाता है जो कई बड़ी दुर्घटनाओं में शामिल रह चुके हैं। जीपीटी-2 को लेकर जो माहौल बनाया गया वह शायद जरूरत से ज्यादा था। ओपनएआई ने इसे पूरी तरह जारी करने का काम छह महीने के लिए टाल दिया गया है। उसने इससे संबंधित तकनीकी पर्चा प्रकाशित किया और यह साफ किया कि उसने इससे जुड़े ब्योरों को फिलहाल क्यों प्रकाशित नहीं किया।
 
जीपीटी-2 आखिर क्या है और इसे लेकर इतने भय का माहौल क्यों है? ओपनएआई ने रेडिट कर्मा नामक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म की लाखों पोस्ट को एकत्रित किया। इसके बाद उसने 40 जीबी का यह डेटाबेस अपने एआई मॉडल को दिया और उसे कहा कि वह अगले शब्द के बारे में अपना अनुमान प्रकट करे। हम हर रोज जब भी कोई ईमेल या एसएमएस टाइप करते हैं तो हम ऐसे टेक्स्ट जनरेटर का इस्तेमाल करते हैं। परंतु जीपीटी-2 ने खुद को सवालों के जवाब देने, पढऩे, अनुवाद करने आदि की प्रणाली में दक्ष कर लिया जबकि उसे इसके लिए कोई स्पष्टï प्रशिक्षण भी नहीं प्रदान किया गया था। मशीन लर्निंग की भाषा में इसे 'बगैर निगरानी का सबक' कहा जाता है। जीपीटी-2 अपने स्तर पर सामान्य भाषण या लेखन के तौर तरीके सीखने लगा। उसने जीपीटी के 10 गुना से अधिक संसाधनों का प्रयोग किया। 
 
यह एक सामान्य टेक्स्ट जनरेटर में बड़ा सुधार है कि किसी वाक्य में अगले संभावित शब्द तक का अंदाजा लगाया जा सके। ओपनएआई का कहना है कि जीपीटी-2 व्यवस्थित पैराग्राफ, लिखी सामग्री का संक्षेपण या विस्तार, मशीनी अनुवाद, प्रश्नोत्तर आदि सभी कुछ कर सकता है और वह भी बिना प्रशिक्षण के।  ओपनएआई के नीतिगत निदेशक जैक काल ने एक ब्लॉग में लिखा कि तकनीक के दुरुपयोग की आशंका को देखते हुए इस मॉडल को फिलहाल रोका जा रहा है। इस निर्णय की व्याख्या करते हुए कहा गया कि चूंकि व्यापक भाषायी मॉडलों का इस्तेमाल पूर्वग्रह युक्त हो सकता है और बड़े पैमाने पर गलत भाषा का इस्तेमाल हो सकता है इसलिए फिलहाल हम जीपीटी-2 का बहुत छोटा संस्करण, सैंपलिग कोड के साथ जारी कर रहे हैं। 
 
ओपनआई ने कहा कि वह डेटा सेट, प्रशिक्षण कोड अथवा जीपीटी-2 के संपूर्ण मॉडल को जारी नहीं कर रहा है। जो छोटा मॉडल जारी किया जा रहा है वह केवल पाठकों को मूर्ख बनाने के लिए ही संबंधित शब्द तैयार करने में सक्षम है। यह निर्णय और इसके बाद उपजी चर्चा को ओपनएआई प्रायोगिक करार दे रहा है। जीपीटी-2 की क्षमताएं कहीं अधिक व्यापक हैं। मानक भाषाओं और अवधारणा के परीक्षण में उसका प्रदर्शन अच्छा रहा है। वह मानवीय गुणवत्ता से युक्त वाक्यों के नमूने भी तैयार कर सकता है, बशर्ते कि उसे सामग्री उपलब्ध कराई जाए और विस्तार करने के बारे में पूछा जाए। 
 
यह भी स्पष्टï होना चाहिए कि आखिर ओपनएआई इसके दुरुपयोग को लेकर चिंतित क्यों है? जीपीटी-2 से कहा गया था कि वह एक मानव लिखित वक्तव्य का विस्तार करे। यह वक्तव्य था: पुनर्चक्रण दुनिया के लिए बेहतर है, नहीं आप इससे अधिक गलत नहीं हो सकते। इस वाक्य को स्पष्टï करते हुए जीपीटी-2 ने लिखा: 'पुनर्चक्रण दुनिया के लिए अच्छा नहीं है। यह पर्यावरण के लिए भी खराब है, स्वास्थ्य के लिए खराब है और अर्थव्यवस्था के लिए भी। यह पृथ्वी के लिए नुकसानदेह है और जलवायु परिवर्तन का बहुत बड़ा कारक है। पुनर्चक्रण मोटापा, दिल की बीमारियों और कैंसर तक को जन्म देता है। यह हमारी अर्थव्यवस्था के लिए भी बेहतर नहीं है। इससे न केवल उत्पाद बल्कि उससे बनने वाली वस्तु की लागत बढ़ती है। हमें दुनिया के सबसे उन्न्त और किफायती पुनर्चक्रण तंत्र की अच्छी खासी कीमत चुकानी होती है। यह ऊर्जा, धन, संसाधन और समय सबकी बरबादी है।'
 
मान लिया कि यह बेवकूफाना है लेकिन ये बेमतलब के शब्द बिल्कुल नहीं हैं। यह ऐसी बेवकूफी भरी बाते हैं जो थोड़ा पढ़ालिखा आदमी बोल सकता है। जीपीटी-2 फेक न्यूज के डरावने नमूने तैयार कर सकता है और वह यह काम बहुत बड़े पैमाने पर कर सकता है। ओपनएआई की इस बात के लिए आलोचना की गई कि उसने इसे जारी करने की तारीख आगे बढ़ाई और प्रोग्राम को लेकर अतिरंजित भय पैदा किया। निश्चित रूप से अन्य डेवलपर भी इसी गुणवत्ता का टेक्स्ट जनरेटर तैयार करेंगे। परंतु यह बहस उपयोगी हो सकती है और फेक न्यूज को रोकने के लिए कुछ अन्य चरण तैयार करने में मददगार हो सकती है। 
Keyword: AI, robot, open AI, AGI,,
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